आज हम जिस वैश्वीकरण (Globalisation) को देखते हैं, उसकी शुरुआत बहुत पहले हो चुकी थी। प्राचीन समय में भी लोग व्यापार, धर्म, यात्राओं और सांस्कृतिक संबंधों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। उस समय आधुनिक तकनीक नहीं थी, फिर भी दुनिया के विभिन्न हिस्सों के बीच संपर्क बना हुआ था।
मानव समाज और प्रारंभिक संपर्क
प्रारंभिक मानव भोजन और सुरक्षा की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान जाते थे।
इसी प्रवास (Migration) ने विभिन्न सभ्यताओं को जोड़ने का कार्य किया।
लोग अपने साथ भाषा, संस्कृति, तकनीक और परंपराएँ भी ले जाते थे।
प्राचीन सभ्यताएँ और वैश्विक संपर्क
सिंधु घाटी सभ्यता
मेसोपोटामिया के साथ व्यापार करती थी।
मोतियों, कपास और धातुओं का व्यापार होता था।
मेसोपोटामिया सभ्यता
टिगरिस और यूफ्रेटीस नदी के किनारे विकसित।
भारत और मिस्र से व्यापारिक संबंध।
मिस्र सभ्यता
नील नदी के किनारे विकसित।
अनाज, सोना और कपड़े का व्यापार।
सिल्क रूट (Silk Route)
सिल्क रूट विश्व का सबसे प्रसिद्ध व्यापारिक मार्ग था।
विशेषताएँ
यह मार्ग चीन से शुरू होकर मध्य एशिया होते हुए यूरोप तक जाता था।
लगभग 6000 किलोमीटर लंबा नेटवर्क।
केवल एक सड़क नहीं बल्कि कई मार्गों का समूह था।
व्यापारिक वस्तुएँ
चीन → रेशम
भारत → मसाले, कपास, नील
अरब → घोड़े
यूरोप → धातुएँ और ऊनी वस्त्र
सिल्क रूट का महत्व
व्यापार बढ़ा।
संस्कृतियों का आदान-प्रदान हुआ।
बौद्ध धर्म का प्रसार हुआ।
कला और विज्ञान फैले।
समुद्री व्यापार मार्ग
स्थलीय मार्गों के अलावा समुद्री मार्ग भी अत्यंत महत्वपूर्ण थे।
हिंद महासागर व्यापार
भारत, अरब और पूर्वी अफ्रीका के बीच व्यापार।
मानसूनी हवाओं का उपयोग जहाजों को चलाने में किया जाता था।
धार्मिक प्रसार
बौद्ध धर्म
भारत से चीन, जापान और कोरिया पहुँचा।
इस्लाम
अरब व्यापारियों के माध्यम से फैला।
ईसाई धर्म
यूरोपीय मिशनरियों द्वारा फैला।
यात्राएँ और यात्री
मार्को पोलो
इटली का व्यापारी।
चीन की यात्रा की।
इब्न बतूता
मोरक्को का यात्री।
भारत सहित कई देशों की यात्रा।
फाह्यान और ह्वेनसांग
चीन से भारत आए।
भारतीय संस्कृति और बौद्ध धर्म का अध्ययन किया।
खोज अभियान (Voyages of Discovery)
खोजों के कारण
मसालों की माँग
नए व्यापारिक मार्गों की खोज
धन और सोने की लालसा
ईसाई धर्म का प्रसार
प्रमुख खोजकर्ता
क्रिस्टोफर कोलंबस
1492 में अमेरिका पहुँचा।
भारत की खोज में निकला था।
वास्को-डी-गामा
1498 में भारत के कालीकट पहुँचा।
यूरोप और भारत के बीच समुद्री मार्ग खोजा।
फर्डिनेंड मैगलन
विश्व की परिक्रमा का अभियान।
2. भोजन और वैश्वीकरण (Food Travels: Spaghetti and Potato)
भोजन भी वैश्वीकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज हम जिन खाद्य पदार्थों को सामान्य मानते हैं, वे कभी केवल कुछ विशेष क्षेत्रों तक सीमित थे।
कोलंबियन एक्सचेंज (Columbian Exchange)
अमेरिका की खोज के बाद पुरानी दुनिया (एशिया, यूरोप, अफ्रीका) और नई दुनिया (अमेरिका) के बीच फसलों, जानवरों और बीमारियों का आदान-प्रदान हुआ।
नई फसलें
अमेरिका से दुनिया में फैली फसलें
आलू
टमाटर
मक्का
मिर्च
कोको
मूंगफली
तंबाकू
अनानास
आलू का महत्व
यूरोप के गरीब लोगों का मुख्य भोजन बना।
कम भूमि में अधिक उत्पादन।
जनसंख्या वृद्धि में सहायता।
आयरलैंड का आलू अकाल
कारण
आलू की फसल में बीमारी।
परिणाम
लाखों लोग भूख से मरे।
बड़े पैमाने पर अमेरिका प्रवास।
स्पेगेटी और नूडल्स
माना जाता है कि नूडल्स चीन से यूरोप पहुँचे।
बाद में इटली में स्पेगेटी विकसित हुई।
चीनी, चाय और कॉफी
उपनिवेशों में बड़े पैमाने पर खेती।
यूरोप में लोकप्रिय पेय बने।
दास श्रम और बागान
चीनी और कपास की खेती में अफ्रीकी दासों का उपयोग।
कृषि का व्यवसायीकरण
खाद्य उत्पादन व्यापार का हिस्सा बना।
नकदी फसलें उगाई जाने लगीं।
3. उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद (Colonialism and Imperialism)
उपनिवेशवाद का अर्थ
जब कोई शक्तिशाली देश दूसरे देश की भूमि, संसाधनों और लोगों पर नियंत्रण स्थापित करता है।
साम्राज्यवाद (Imperialism)
दूसरे देशों पर राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य प्रभुत्व स्थापित करना।
यूरोपीय शक्तियाँ
ब्रिटेन
फ्रांस
स्पेन
पुर्तगाल
नीदरलैंड
बेल्जियम
उपनिवेशवाद के कारण
आर्थिक कारण
कच्चे माल की आवश्यकता
नए बाजारों की खोज
राजनीतिक कारण
शक्ति और प्रतिष्ठा बढ़ाना
धार्मिक कारण
ईसाई धर्म का प्रसार
उपनिवेश बनाने की प्रक्रिया
सैन्य हमला
व्यापारिक कंपनियों का उपयोग
स्थानीय शासकों से संधि
ईस्ट इंडिया कंपनी
ब्रिटिश व्यापारिक कंपनी।
धीरे-धीरे भारत पर राजनीतिक नियंत्रण।
दास व्यापार (Slave Trade)
ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार
अफ्रीकियों को पकड़कर अमेरिका भेजा गया।
बागानों में कठोर श्रम कराया गया।
त्रिकोणीय व्यापार प्रणाली
पहला चरण
यूरोप से वस्तुएँ अफ्रीका भेजी गईं।
दूसरा चरण
अफ्रीकी दास अमेरिका भेजे गए।
तीसरा चरण
अमेरिका से चीनी और कपास यूरोप भेजे गए।
भारत पर प्रभाव
उद्योगों का विनाश
भारतीय हस्तकरघा उद्योग नष्ट हुआ।
किसानों का शोषण
नील और अफीम की खेती के लिए मजबूर।
अकाल
खाद्यान्न उत्पादन कम हुआ।
4. 19वीं सदी की विश्व अर्थव्यवस्था
19वीं सदी में दुनिया की अर्थव्यवस्था तेजी से जुड़ने लगी।
औद्योगिक क्रांति
शुरुआत
इंग्लैंड में 18वीं सदी में।
प्रभाव
मशीनों का उपयोग बढ़ा।
उत्पादन तेजी से बढ़ा।
कारखाना प्रणाली
बड़े कारखानों की स्थापना।
श्रमिक वर्ग का विकास।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार
यूरोप औद्योगिक वस्तुएँ बेचता था।
उपनिवेश कच्चा माल उपलब्ध कराते थे।
मुक्त व्यापार (Free Trade)
व्यापार पर कम प्रतिबंध।
ब्रिटेन मुक्त व्यापार का समर्थक।
कॉर्न लॉ
अनाज आयात पर प्रतिबंध।
बाद में समाप्त किया गया।
पूंजी प्रवाह
अमीर देशों का निवेश गरीब देशों में।
श्रम प्रवास
यूरोप से अमेरिका प्रवास
रोजगार और बेहतर जीवन की तलाश।
एशियाई प्रवास
अनुबंधित मजदूरों का प्रवास।
वैश्विक कृषि अर्थव्यवस्था
गेहूँ और मांस का अंतरराष्ट्रीय व्यापार।
शीत भंडारण तकनीक
मांस को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव हुआ।
5. भारतीय अनुबंधित श्रमिक (Indentured Labour Migration)
अनुबंधित श्रम क्या था?
मजदूरों को एक निश्चित समय के लिए अनुबंध पर विदेश भेजा जाता था।
गिरमिटिया शब्द
Agreement शब्द से “Girmit” बना।
मजदूरों को विदेश क्यों भेजा गया?
दास प्रथा समाप्त हो चुकी थी।
बागानों में श्रमिकों की आवश्यकता।
भर्ती के कारण
गरीबी
अकाल
बेरोजगारी
ऊँचे कर
प्रमुख स्थान
मॉरीशस
फिजी
सूरीनाम
त्रिनिदाद
गुयाना
यात्रा की कठिनाइयाँ
लंबी समुद्री यात्रा
खराब भोजन
बीमारियाँ
बागानों में जीवन
कम मजदूरी
कठोर श्रम
अमानवीय व्यवहार
सांस्कृतिक योगदान
भारतीय त्योहारों का प्रसार
भोजपुरी संस्कृति का विकास
भारतीय भोजन और संगीत का प्रभाव
प्रतिरोध आंदोलन
मजदूरों ने शोषण के खिलाफ आवाज उठाई।
6. तकनीकी परिवर्तन और वैश्वीकरण
तकनीकी प्रगति ने दुनिया को पहले से अधिक जोड़ दिया।
रेलवे
प्रभाव
यात्रा आसान हुई।
व्यापार बढ़ा।
बाजार जुड़े।
स्टीम इंजन
परिवहन और उद्योगों में क्रांति।
स्टीमशिप
समुद्री यात्रा सस्ती और तेज।
टेलीग्राफ
संदेश तुरंत भेजना संभव।
स्वेज नहर
महत्व
यूरोप से भारत की दूरी कम।
व्यापारिक लागत घटी।
बंदरगाह विकास
आधुनिक पोर्ट बने।
निर्यात-आयात में वृद्धि।
बिजली का उपयोग
उद्योगों का विस्तार।
संचार क्रांति
टेलीफोन
रेडियो
डाक प्रणाली
वैज्ञानिक प्रगति
चिकित्सा क्षेत्र में सुधार
मृत्यु दर कम हुई।
7. अफ्रीका और उपनिवेशवाद
अफ्रीका के लिए होड़ (Scramble for Africa)
यूरोपीय देशों ने अफ्रीका के क्षेत्रों पर कब्जा करने की होड़ शुरू की।
बर्लिन सम्मेलन (1884-85)
अफ्रीका का विभाजन यूरोपीय शक्तियों के बीच।
रिंडरपेस्ट बीमारी
क्या थी?
पशुओं में फैलने वाली बीमारी।
प्रभाव
लाखों पशु मरे।
किसानों की आजीविका खत्म।
अफ्रीकी किसानों की स्थिति
जमीन छीन ली गई।
मजदूरी करने को मजबूर।
खनिज संपदा का दोहन
सोना
हीरा
तांबा
नस्लीय भेदभाव
गोरे लोगों को विशेष अधिकार।
स्थानीय लोगों का शोषण।
8. प्रथम विश्व युद्ध और वैश्विक अर्थव्यवस्था
युद्ध के कारण
राष्ट्रवाद
सैन्यवाद
साम्राज्यवाद
गुटबंदी
युद्ध की प्रकृति
मशीनगन
टैंक
जहरीली गैस
युद्ध अर्थव्यवस्था
सरकार ने उद्योगों को नियंत्रित किया।
हथियार उत्पादन बढ़ा।
महिलाओं की भूमिका
कारखानों में कार्य।
नर्स के रूप में सेवा।
व्यापार पर प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाधित।
जहाजों की कमी।
भारत पर प्रभाव
सैनिक भर्ती
महँगाई
करों में वृद्धि
युद्ध के बाद
अमेरिका आर्थिक शक्ति बना।
यूरोप कमजोर हुआ।
9. महान मंदी (The Great Depression)
महान मंदी क्या थी?
1929 में शुरू हुआ वैश्विक आर्थिक संकट।
कारण
अत्यधिक उत्पादन
कम मांग
शेयर बाजार में सट्टेबाजी
वॉल स्ट्रीट क्रैश
शेयर बाजार अचानक गिर गया।
बैंकों की विफलता
लोग अपना पैसा खो बैठे।
बेरोजगारी
लाखों लोग नौकरी खो बैठे।
किसानों की समस्या
कीमतें गिर गईं।
कर्ज बढ़ गया।
वैश्विक व्यापार में गिरावट
देशों ने आयात कम किया।
भारत पर प्रभाव
कृषि संकट
ग्रामीण गरीबी
किसानों पर कर्ज
10. युद्धोत्तर विश्व और ब्रेटन वुड्स व्यवस्था
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की स्थिति
विश्व अर्थव्यवस्था बर्बाद।
पुनर्निर्माण की आवश्यकता।
ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (1944)
उद्देश्य
आर्थिक स्थिरता स्थापित करना।
IMF
देशों को आर्थिक सहायता।
विश्व बैंक
विकास परियोजनाओं के लिए ऋण।
GATT
मुक्त व्यापार को बढ़ावा।
कल्याणकारी राज्य
सरकारों ने रोजगार और सामाजिक सुरक्षा बढ़ाई।
उपनिवेशवाद का अंत
एशिया और अफ्रीका स्वतंत्र हुए।
11. आधुनिक वैश्वीकरण
आधुनिक वैश्वीकरण की शुरुआत
1970 के बाद वैश्विक संपर्क तेजी से बढ़ा।
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs)
कई देशों में उत्पादन और व्यापार।
सूचना तकनीक क्रांति
इंटरनेट
कंप्यूटर
मोबाइल
आउटसोर्सिंग
कंपनियाँ सस्ता काम दूसरे देशों से करवाती हैं।
उदारीकरण
व्यापारिक प्रतिबंध हटाना।
निजीकरण
सरकारी कंपनियों का निजीकरण।
WTO
वैश्विक व्यापार नियमों का संचालन।
भारत में आर्थिक सुधार 1991
कारण
आर्थिक संकट
सुधार
विदेशी निवेश
निजीकरण
उदारीकरण
सेवा क्षेत्र का विकास
IT कंपनियाँ
कॉल सेंटर
सॉफ्टवेयर उद्योग
डिजिटल वैश्वीकरण
ऑनलाइन शिक्षा
ई-कॉमर्स
डिजिटल भुगतान
वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभाव
रोजगार के अवसर
तकनीकी विकास
वैश्विक संपर्क
नकारात्मक प्रभाव
स्थानीय उद्योगों पर खतरा
पर्यावरण प्रदूषण
आर्थिक असमानता
कोविड-19 और वैश्वीकरण
वैश्विक व्यापार प्रभावित।
आपूर्ति श्रृंखला बाधित।
निष्कर्ष
वैश्विक विश्व का निर्माण हजारों वर्षों की प्रक्रिया का परिणाम है। व्यापार, तकनीक, यात्राएँ, उपनिवेशवाद, युद्ध और आर्थिक नीतियों ने दुनिया को एक-दूसरे से जोड़ा। आधुनिक वैश्वीकरण ने दुनिया को “वैश्विक गाँव” बना दिया है, जहाँ एक देश की घटना पूरे विश्व को प्रभावित करती है।
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