विद्युत धारा के प्रवाह से चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। जब किसी चालक में विद्युत धारा बहती है तो उसके आसपास चुंबकीय प्रभाव दिखाई देता है। इसी सिद्धांत पर मोटर, जनित्र, ट्रांसफॉर्मर, स्पीकर, विद्युत घंटी, पंखा, मिक्सर, पंप आदि कार्य करते हैं। इस अध्याय में हम चुंबक, चुंबकीय क्षेत्र, विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव, मोटर, जनित्र तथा घरेलू विद्युत सुरक्षा को विस्तार से समझेंगे।
ऐसा पदार्थ जो लोहे, निकेल तथा कोबाल्ट जैसी धातुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है, चुंबक कहलाता है।
जो प्रकृति में स्वतः पाए जाते हैं उन्हें प्राकृतिक चुंबक कहते हैं।
उदाहरण:
विशेषताएँ:
मनुष्य द्वारा बनाए गए चुंबक कृत्रिम चुंबक कहलाते हैं।
उदाहरण:
जो लंबे समय तक अपना चुंबकत्व बनाए रखते हैं।
जो कुछ समय के लिए ही चुंबकीय गुण रखते हैं।
उदाहरण:
जो चुंबक से अत्यधिक आकर्षित होते हैं।
उदाहरण:
जो थोड़े आकर्षित होते हैं।
उदाहरण:
जो चुंबक से दूर हटते हैं।
उदाहरण:
चुंबक के चारों ओर का वह क्षेत्र जहाँ उसका प्रभाव महसूस किया जा सके, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है।
किसी बिंदु पर कंपास की सुई जिस दिशा में संकेत करती है वही चुंबकीय क्षेत्र की दिशा होती है।
वे काल्पनिक रेखाएँ जो चुंबकीय क्षेत्र की दिशा एवं तीव्रता को दर्शाती हैं।
चुंबक के ऊपर कागज रखकर लोहे की बुरादे डालने पर क्षेत्र रेखाओं का पैटर्न दिखाई देता है।
कंपास सुई चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाती है।
पृथ्वी स्वयं एक विशाल चुंबक की तरह व्यवहार करती है।
भौगोलिक दिशा एवं चुंबकीय दिशा के बीच का कोण चुंबकीय विक्षेपण कहलाता है।
चुंबकीय क्षेत्र रेखा एवं क्षैतिज दिशा के बीच का कोण।
जब किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो उसके आसपास चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इसे विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहते हैं।
1820 में वैज्ञानिक ओर्स्टेड ने यह सिद्ध किया कि विद्युत धारा चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करती है।
विद्युत धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है।
जब सीधे चालक में धारा बहती है तो उसके चारों ओर संकेंद्रित वृत्ताकार चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बनती हैं।
यदि चालक को दाएँ हाथ से इस प्रकार पकड़ें कि अंगूठा धारा की दिशा में हो, तो मुड़ी हुई उंगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाती हैं।
यदि कॉर्क स्क्रू धारा की दिशा में आगे बढ़ता है तो उसका घूमना चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताता है।
जब वृत्ताकार चालक में धारा बहती है तो उसके केंद्र पर शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
बेलनाकार रूप में लिपटी लंबी तार की कुंडली को परिनालिका कहते हैं।
ऐसा चुंबक जो विद्युत धारा के कारण बनता है।
यदि बाएँ हाथ के अंगूठा, तर्जनी एवं मध्यमा को परस्पर लंबवत रखें:
जब धारा प्रवाहित होती है तो विद्युत चुंबक आर्मेचर को आकर्षित करता है और घंटी बजती है। संपर्क टूटने पर प्रक्रिया पुनः दोहराई जाती है।
ऐसी मशीन जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है।
जब किसी धारा-वाहक चालक को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो उस पर बल लगता है और वह घूमने लगता है।
ताँबे की आयताकार कुंडली।
शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र प्रदान करता है।
धारा की दिशा बदलता है।
धारा को कुंडली तक पहुँचाते हैं।
घूर्णन में सहायता करती है।
विद्युत धारा का स्रोत।
विद्युत ऊर्जा → यांत्रिक ऊर्जा
दिष्ट धारा से चलती है।
प्रत्यावर्ती धारा से चलती है।
ऐसी मशीन जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलती है।
जब किसी चालक एवं चुंबकीय क्षेत्र के बीच सापेक्ष गति होती है तो चालक में विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
इस घटना की खोज माइकल फैराडे ने की।
चुंबक को कुंडली के अंदर-बाहर करने पर गैल्वेनोमीटर में विचलन प्राप्त हुआ।
प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिससे वह उत्पन्न हुई है।
विद्युत चुंबकीय प्रेरण पर आधारित।
ताँबे की तार की कुंडली।
शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।
AC जनित्र में उपयोग होती है।
DC जनित्र में उपयोग होता है।
धारा को बाहरी परिपथ तक पहुँचाते हैं।
कुंडली को घुमाती है।
जिस धारा की दिशा समय-समय पर बदलती रहती है।
जिस धारा की दिशा स्थिर रहती है।
| AC | DC |
|---|---|
| दिशा बदलती रहती है | दिशा स्थिर रहती है |
| घरों में उपयोग | बैटरी में उपयोग |
| ट्रांसफॉर्मर उपयोग संभव | ट्रांसफॉर्मर उपयोग नहीं |
ऐसा उपकरण जो AC वोल्टेज को बढ़ाता या घटाता है।
विद्युत चुंबकीय प्रेरण
वोल्टेज बढ़ाता है।
वोल्टेज घटाता है।
घर में विद्युत वितरण की व्यवस्था।
भारत में सामान्य घरेलू आपूर्ति:
घरों में उपयोग की गई विद्युत ऊर्जा मापता है।
किलोवाट घंटा (kWh)
1 kWh = 1 यूनिट
धारा उपकरण तक पहुँचाता है।
धारा वापस ले जाता है।
सुरक्षा प्रदान करता है।
विद्युत उपकरण को पृथ्वी से जोड़ना।
तीन-पिन प्लग में:
ऊपरी मोटा पिन अर्थिंग के लिए होता है।
अधिक धारा होने पर पिघलकर परिपथ तोड़ देता है।
अधिक धारा होने पर स्वतः परिपथ बंद कर देता है।
जब लाइव एवं न्यूट्रल तार सीधे संपर्क में आ जाते हैं तो अत्यधिक धारा बहती है।
एक ही परिपथ में आवश्यकता से अधिक उपकरण जोड़ देना।
कार्य करने की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं।
P = VI
जहाँ:
E = Pt
उत्पन्न ऊष्मा:
H = I²Rt
विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव की खोज।
विद्युत चुंबकीय प्रेरण की खोज।
हाथ के नियम दिए।
प्रेरित धारा की दिशा का नियम दिया।
विद्युत चुंबकीय सिद्धांत दिया।
Study Raw: Education World of India आप सभी Students के सहूलियत के लिए Social Media पर भी सारे Students को Bihar के सारे News से Updated रखते है। आपलोग नीचे दिए किसी भी Social Media से जुर सकते हैं। Follow us with following link mentioned below.
| University Name | Syllabus |
|---|---|
| BRABU Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| LNMU Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| TMBU Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| VKSU Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| BNMU Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Jai Prakash Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Patliputra University BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Purnea University BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Magadh University BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Munger University BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Patna University BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
Leave a Reply