Class-10 Science भौतिकी Ch-4 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव

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📅 28/05/2026

4. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effects of Electric Current)

विद्युत धारा के प्रवाह से चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। जब किसी चालक में विद्युत धारा बहती है तो उसके आसपास चुंबकीय प्रभाव दिखाई देता है। इसी सिद्धांत पर मोटर, जनित्र, ट्रांसफॉर्मर, स्पीकर, विद्युत घंटी, पंखा, मिक्सर, पंप आदि कार्य करते हैं। इस अध्याय में हम चुंबक, चुंबकीय क्षेत्र, विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव, मोटर, जनित्र तथा घरेलू विद्युत सुरक्षा को विस्तार से समझेंगे।

4.1 चुंबक एवं चुंबकीय क्षेत्र

चुंबक (Magnet)

ऐसा पदार्थ जो लोहे, निकेल तथा कोबाल्ट जैसी धातुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है, चुंबक कहलाता है।

चुंबक के प्रमुख गुण

  • चुंबक लोहे को आकर्षित करता है।
  • प्रत्येक चुंबक के दो ध्रुव होते हैं — उत्तर ध्रुव एवं दक्षिण ध्रुव।
  • समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
  • असमान ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
  • चुंबकीय शक्ति ध्रुवों पर सबसे अधिक होती है।
  • स्वतंत्र रूप से लटकाने पर चुंबक उत्तर-दक्षिण दिशा में स्थिर हो जाता है।

चुंबकों के प्रकार

प्राकृतिक चुंबक

जो प्रकृति में स्वतः पाए जाते हैं उन्हें प्राकृतिक चुंबक कहते हैं।

उदाहरण:

  • मैग्नेटाइट
  • लोडस्टोन

विशेषताएँ:

  • शक्ति कम होती है।
  • आकार अनियमित होता है।

कृत्रिम चुंबक

मनुष्य द्वारा बनाए गए चुंबक कृत्रिम चुंबक कहलाते हैं।

उदाहरण:

  • बार मैग्नेट
  • हॉर्स-शू मैग्नेट
  • विद्युत चुंबक

स्थायी चुंबक

जो लंबे समय तक अपना चुंबकत्व बनाए रखते हैं।

अस्थायी चुंबक

जो कुछ समय के लिए ही चुंबकीय गुण रखते हैं।

उदाहरण:

  • विद्युत चुंबक

चुंबकीय पदार्थ

फेरोमैग्नेटिक पदार्थ

जो चुंबक से अत्यधिक आकर्षित होते हैं।

उदाहरण:

  • लोहा
  • निकेल
  • कोबाल्ट

पैरामैग्नेटिक पदार्थ

जो थोड़े आकर्षित होते हैं।

उदाहरण:

  • एल्युमिनियम
  • प्लैटिनम

डायामैग्नेटिक पदार्थ

जो चुंबक से दूर हटते हैं।

उदाहरण:

  • तांबा
  • बिस्मथ

चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field)

चुंबक के चारों ओर का वह क्षेत्र जहाँ उसका प्रभाव महसूस किया जा सके, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है।

चुंबकीय क्षेत्र की दिशा

किसी बिंदु पर कंपास की सुई जिस दिशा में संकेत करती है वही चुंबकीय क्षेत्र की दिशा होती है।

चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ

वे काल्पनिक रेखाएँ जो चुंबकीय क्षेत्र की दिशा एवं तीव्रता को दर्शाती हैं।

चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुण

  • ये बंद वक्र बनाती हैं।
  • चुंबक के बाहर उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव की ओर जाती हैं।
  • चुंबक के अंदर दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर जाती हैं।
  • दो क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
  • जहाँ रेखाएँ अधिक पास होती हैं वहाँ क्षेत्र अधिक प्रबल होता है।

चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात करने की विधियाँ

लोहे की बुरादे द्वारा

चुंबक के ऊपर कागज रखकर लोहे की बुरादे डालने पर क्षेत्र रेखाओं का पैटर्न दिखाई देता है।

कंपास सुई द्वारा

कंपास सुई चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाती है।

पृथ्वी का चुंबकत्व

पृथ्वी स्वयं एक विशाल चुंबक की तरह व्यवहार करती है।

पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुव

  • भौगोलिक उत्तर के पास चुंबकीय दक्षिण ध्रुव होता है।
  • भौगोलिक दक्षिण के पास चुंबकीय उत्तर ध्रुव होता है।

चुंबकीय विक्षेपण

भौगोलिक दिशा एवं चुंबकीय दिशा के बीच का कोण चुंबकीय विक्षेपण कहलाता है।

नति कोण

चुंबकीय क्षेत्र रेखा एवं क्षैतिज दिशा के बीच का कोण।

पृथ्वी के चुंबकत्व के उपयोग

  • कंपास
  • दिशा ज्ञात करना
  • जहाज एवं विमान संचालन

4.2 विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव

जब किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो उसके आसपास चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इसे विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहते हैं।

ओर्स्टेड का प्रयोग

1820 में वैज्ञानिक ओर्स्टेड ने यह सिद्ध किया कि विद्युत धारा चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करती है।

प्रयोग

  • एक चालक को कंपास के ऊपर रखा गया।
  • चालक में धारा प्रवाहित की गई।
  • कंपास की सुई विचलित हो गई।

निष्कर्ष

विद्युत धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है।

सीधे चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र

जब सीधे चालक में धारा बहती है तो उसके चारों ओर संकेंद्रित वृत्ताकार चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बनती हैं।

चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता किन बातों पर निर्भर करती है?

  • धारा की मात्रा
  • चालक से दूरी
  • माध्यम की प्रकृति

दाएँ हाथ का अंगूठा नियम

यदि चालक को दाएँ हाथ से इस प्रकार पकड़ें कि अंगूठा धारा की दिशा में हो, तो मुड़ी हुई उंगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाती हैं।

मैक्सवेल का कॉर्क स्क्रू नियम

यदि कॉर्क स्क्रू धारा की दिशा में आगे बढ़ता है तो उसका घूमना चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताता है।

वृत्ताकार चालक (Circular Loop)

जब वृत्ताकार चालक में धारा बहती है तो उसके केंद्र पर शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।

चुंबकीय क्षेत्र बढ़ाने के उपाय

  • धारा बढ़ाकर
  • कुंडलियों की संख्या बढ़ाकर
  • लोहे का कोर लगाकर

परिनालिका (Solenoid)

बेलनाकार रूप में लिपटी लंबी तार की कुंडली को परिनालिका कहते हैं।

परिनालिका के गुण

  • यह शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है।
  • इसके अंदर लगभग समान चुंबकीय क्षेत्र प्राप्त होता है।
  • यह छड़ चुंबक की तरह व्यवहार करती है।

परिनालिका के उपयोग

  • विद्युत चुंबक
  • मोटर
  • जनित्र
  • रिले

विद्युत चुंबक (Electromagnet)

ऐसा चुंबक जो विद्युत धारा के कारण बनता है।

निर्माण

  • नरम लोहे पर तार की कुंडली लपेटी जाती है।
  • कुंडली में धारा प्रवाहित की जाती है।

विद्युत चुंबक की विशेषताएँ

  • धारा बंद करने पर चुंबकत्व समाप्त हो जाता है।
  • इसकी शक्ति को नियंत्रित किया जा सकता है।

शक्ति बढ़ाने के उपाय

  • अधिक धारा प्रवाहित करके
  • कुंडलियों की संख्या बढ़ाकर
  • अच्छा लोहे का कोर उपयोग करके

उपयोग

  • विद्युत घंटी
  • क्रेन
  • स्पीकर
  • MRI मशीन
  • मोटर

फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम

यदि बाएँ हाथ के अंगूठा, तर्जनी एवं मध्यमा को परस्पर लंबवत रखें:

  • तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाती है।
  • मध्यमा धारा की दिशा दर्शाती है।
  • अंगूठा बल या गति की दिशा दर्शाता है।

विद्युत घंटी (Electric Bell)

मुख्य भाग

  • विद्युत चुंबक
  • आर्मेचर
  • हथौड़ी
  • घंटी
  • स्प्रिंग

कार्यविधि

जब धारा प्रवाहित होती है तो विद्युत चुंबक आर्मेचर को आकर्षित करता है और घंटी बजती है। संपर्क टूटने पर प्रक्रिया पुनः दोहराई जाती है।

4.3 विद्युत मोटर

विद्युत मोटर क्या है?

ऐसी मशीन जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है।

मोटर का सिद्धांत

जब किसी धारा-वाहक चालक को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो उस पर बल लगता है और वह घूमने लगता है।

विद्युत मोटर की संरचना

आर्मेचर

ताँबे की आयताकार कुंडली।

स्थायी चुंबक

शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र प्रदान करता है।

विभक्त वलय (Split Ring)

धारा की दिशा बदलता है।

ब्रश

धारा को कुंडली तक पहुँचाते हैं।

धुरी

घूर्णन में सहायता करती है।

बैटरी

विद्युत धारा का स्रोत।

मोटर की कार्यप्रणाली

  • कुंडली में धारा प्रवाहित होती है।
  • चुंबकीय क्षेत्र के कारण बल उत्पन्न होता है।
  • कुंडली घूमती है।
  • विभक्त वलय धारा की दिशा बदलता है।
  • घूर्णन लगातार चलता रहता है।

मोटर में ऊर्जा परिवर्तन

विद्युत ऊर्जा → यांत्रिक ऊर्जा

मोटर के प्रकार

DC मोटर

दिष्ट धारा से चलती है।

AC मोटर

प्रत्यावर्ती धारा से चलती है।

मोटर के उपयोग

  • पंखा
  • मिक्सर
  • पानी का पंप
  • वाशिंग मशीन
  • ड्रिल मशीन
  • इलेक्ट्रिक वाहन

4.4 विद्युत जनित्र

विद्युत जनित्र क्या है?

ऐसी मशीन जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलती है।

विद्युत चुंबकीय प्रेरण

जब किसी चालक एवं चुंबकीय क्षेत्र के बीच सापेक्ष गति होती है तो चालक में विद्युत धारा उत्पन्न होती है।

इस घटना की खोज माइकल फैराडे ने की।

फैराडे के प्रयोग

चुंबक को कुंडली के अंदर-बाहर करने पर गैल्वेनोमीटर में विचलन प्राप्त हुआ।

लेन्ज का नियम

प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिससे वह उत्पन्न हुई है।

जनित्र का सिद्धांत

विद्युत चुंबकीय प्रेरण पर आधारित।

जनित्र की संरचना

कुंडली

ताँबे की तार की कुंडली।

चुंबक

शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।

स्लिप रिंग

AC जनित्र में उपयोग होती है।

विभक्त वलय

DC जनित्र में उपयोग होता है।

ब्रश

धारा को बाहरी परिपथ तक पहुँचाते हैं।

धुरी

कुंडली को घुमाती है।

जनित्र की कार्यप्रणाली

  • कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है।
  • चुंबकीय फ्लक्स बदलता है।
  • प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
  • धारा बाहरी परिपथ में प्रवाहित होती है।

प्रत्यावर्ती धारा (AC)

जिस धारा की दिशा समय-समय पर बदलती रहती है।

विशेषताएँ

  • लंबी दूरी तक भेजना आसान
  • घरेलू उपयोग में प्रयुक्त

दिष्ट धारा (DC)

जिस धारा की दिशा स्थिर रहती है।

विशेषताएँ

  • बैटरी से प्राप्त
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग

AC एवं DC में अंतर

ACDC
दिशा बदलती रहती हैदिशा स्थिर रहती है
घरों में उपयोगबैटरी में उपयोग
ट्रांसफॉर्मर उपयोग संभवट्रांसफॉर्मर उपयोग नहीं

ट्रांसफॉर्मर

ऐसा उपकरण जो AC वोल्टेज को बढ़ाता या घटाता है।

सिद्धांत

विद्युत चुंबकीय प्रेरण

मुख्य भाग

  • प्राथमिक कुंडली
  • द्वितीयक कुंडली
  • लोहे का कोर

प्रकार

स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर

वोल्टेज बढ़ाता है।

स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर

वोल्टेज घटाता है।

उपयोग

  • बिजली वितरण
  • मोबाइल चार्जर
  • पावर स्टेशन

4.5 घरेलू विद्युत परिपथ

घरेलू वायरिंग

घर में विद्युत वितरण की व्यवस्था।

भारत में सामान्य घरेलू आपूर्ति:

  • 220 वोल्ट
  • 50 हर्ट्ज AC

विद्युत मीटर

घरों में उपयोग की गई विद्युत ऊर्जा मापता है।

विद्युत ऊर्जा की व्यावसायिक इकाई

किलोवाट घंटा (kWh)

1 kWh = 1 यूनिट

घरेलू तार

लाइव तार

धारा उपकरण तक पहुँचाता है।

न्यूट्रल तार

धारा वापस ले जाता है।

अर्थ तार

सुरक्षा प्रदान करता है।

अर्थिंग (Earthing)

विद्युत उपकरण को पृथ्वी से जोड़ना।

अर्थिंग का महत्व

  • करंट से सुरक्षा
  • लीकेज धारा को पृथ्वी में भेजना

प्लग एवं सॉकेट

तीन-पिन प्लग में:

  • लाइव
  • न्यूट्रल
  • अर्थ पिन

ऊपरी मोटा पिन अर्थिंग के लिए होता है।

फ्यूज (Fuse)

अधिक धारा होने पर पिघलकर परिपथ तोड़ देता है।

फ्यूज तार के गुण

  • कम गलनांक
  • अधिक प्रतिरोध

MCB (Miniature Circuit Breaker)

अधिक धारा होने पर स्वतः परिपथ बंद कर देता है।

MCB के लाभ

  • जल्दी कार्य करता है
  • बार-बार उपयोग किया जा सकता है

शॉर्ट सर्किट

जब लाइव एवं न्यूट्रल तार सीधे संपर्क में आ जाते हैं तो अत्यधिक धारा बहती है।

कारण

  • इन्सुलेशन खराब होना
  • तारों का क्षतिग्रस्त होना

हानियाँ

  • आग लगना
  • उपकरण खराब होना

अतिभारण (Overloading)

एक ही परिपथ में आवश्यकता से अधिक उपकरण जोड़ देना।

बचाव

  • अच्छे तार उपयोग करें
  • MCB लगाएँ
  • अधिक उपकरण एक साथ न चलाएँ

विद्युत सुरक्षा नियम

  • गीले हाथों से स्विच न छुएँ।
  • खुले तारों से दूर रहें।
  • खराब तारों का उपयोग न करें।
  • अर्थिंग अवश्य करें।
  • बच्चों को बिजली से दूर रखें।
  • फ्यूज एवं MCB का उपयोग करें।

विद्युत शक्ति (Electric Power)

कार्य करने की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं।

सूत्र

P = VI

जहाँ:

  • P = शक्ति
  • V = वोल्टेज
  • I = धारा

विद्युत ऊर्जा

सूत्र

E = Pt

जूल का नियम

उत्पन्न ऊष्मा:

H = I²Rt

विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव के अनुप्रयोग

  • विद्युत मोटर
  • जनित्र
  • ट्रांसफॉर्मर
  • स्पीकर
  • माइक्रोफोन
  • MRI मशीन
  • मैग्लेव ट्रेन
  • इंडक्शन चूल्हा
  • विद्युत घंटी

महत्वपूर्ण वैज्ञानिक

ओर्स्टेड

विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव की खोज।

फैराडे

विद्युत चुंबकीय प्रेरण की खोज।

फ्लेमिंग

हाथ के नियम दिए।

लेन्ज

प्रेरित धारा की दिशा का नियम दिया।

मैक्सवेल

विद्युत चुंबकीय सिद्धांत दिया।

परीक्षा के महत्वपूर्ण प्रश्न

  1. दाएँ हाथ का अंगूठा नियम लिखिए।
  2. फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम समझाइए।
  3. विद्युत चुंबक क्या है?
  4. परिनालिका क्या है?
  5. मोटर एवं जनित्र में अंतर लिखिए।
  6. AC एवं DC में अंतर बताइए।
  7. ट्रांसफॉर्मर का सिद्धांत लिखिए।
  8. फ्यूज एवं MCB में अंतर लिखिए।
  9. शॉर्ट सर्किट क्या है?
  10. अर्थिंग क्यों आवश्यक है?

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