प्राकृतिक संसाधन वे संसाधन होते हैं जो हमें प्रकृति से प्राप्त होते हैं और जिनका उपयोग मानव अपने जीवन को चलाने के लिए करता है। जैसे — जल, वायु, वन, मिट्टी, खनिज, कोयला, पेट्रोलियम आदि। इन संसाधनों का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है, इसलिए इनका सही और संतुलित उपयोग आवश्यक है। इसी को प्राकृतिक संसाधनों का सतत प्रबंधन कहा जाता है।
प्रकृति से प्राप्त सभी उपयोगी वस्तुएँ प्राकृतिक संसाधन कहलाती हैं।
उदाहरण:
ऐसे संसाधन जो बार-बार प्राप्त किए जा सकते हैं।
उदाहरण:
ऐसे संसाधन जिनका निर्माण लाखों वर्षों में होता है और जो समाप्त हो सकते हैं।
उदाहरण:
वन ऐसे क्षेत्र होते हैं जहाँ बड़ी संख्या में पेड़-पौधे पाए जाते हैं।
पेड़ प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
वन वातावरण से CO₂ अवशोषित करते हैं।
वन जल चक्र को नियंत्रित करते हैं।
पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बाँधकर रखती हैं।
कई जीव-जंतु जंगलों में रहते हैं।
अनेक दवाइयाँ पेड़-पौधों से बनाई जाती हैं।
वन पृथ्वी का तापमान संतुलित रखते हैं।
सालभर हरे रहते हैं।
कुछ मौसम में पत्तियाँ गिर जाती हैं।
ठंडे क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
समुद्री किनारों पर पाए जाते हैं।
जंगलों में रहने वाले जीव-जंतु वन्यजीव कहलाते हैं।
उदाहरण:
हर जीव पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा होता है।
यदि कोई जीव समाप्त हो जाए तो पर्यावरण प्रभावित होता है।
वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।
जानवरों को मारना।
वनों की कटाई से जीवों का घर समाप्त हो जाता है।
जल और वायु प्रदूषण से जीव प्रभावित होते हैं।
तापमान परिवर्तन से जीवों का जीवन प्रभावित होता है।
जल पृथ्वी पर जीवन का आधार है।
प्राकृतिक जल का मुख्य स्रोत।
जल में हानिकारक पदार्थ मिल जाने से जल प्रदूषित हो जाता है।
बारिश के पानी को संग्रहित करना।
कम पानी में सिंचाई।
पानी की बर्बादी रोकना।
कपड़े धोने के पानी का उपयोग पौधों में करना।
कोयला एक ठोस जीवाश्म ईंधन है।
लाखों वर्ष पहले मृत पौधों के दबाव और ताप से कोयला बना।
सबसे निम्न गुणवत्ता।
भूरा कोयला।
उद्योगों में उपयोगी।
सबसे उत्तम गुणवत्ता।
पेट्रोलियम एक तरल जीवाश्म ईंधन है।
समुद्री जीवों के अवशेषों से लाखों वर्षों में बनता है।
वनों और जीवों को सुरक्षित रखना संरक्षण कहलाता है।
पेड़ों को बड़े पैमाने पर काटना।
खेती के लिए जंगल काटना।
कारखाने बनाने के लिए जंगल काटना।
शहरों का विस्तार।
सड़क और रेलवे निर्माण।
ऊपरी उपजाऊ मिट्टी बह जाती है।
पेड़ न होने से पानी तेजी से बहता है।
वर्षा कम हो जाती है।
CO₂ बढ़ती है।
जीव-जंतु विलुप्त होने लगते हैं।
नए क्षेत्रों में पेड़ लगाना।
कटे जंगलों को पुनः विकसित करना।
लोगों की भागीदारी से पेड़ लगाना।
खेती के साथ पेड़ उगाना।
जीवों की विभिन्नता को जैव विविधता कहते हैं।
एक ही प्रजाति में अंतर।
विभिन्न प्रजातियाँ।
विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्र।
जो जीव पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं।
उदाहरण:
जिनके समाप्त होने का खतरा है।
उदाहरण:
दुर्लभ और संकटग्रस्त जीवों की सूची।
वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र।
उदाहरण:
जहाँ जीवों की सुरक्षा की जाती है।
विशाल संरक्षण क्षेत्र।
उदाहरण:
पेड़ों को बचाने के लिए आंदोलन।
सुंदरलाल बहुगुणा
लोग पेड़ों से चिपक जाते थे ताकि उन्हें काटा न जा सके।
वनों से जुड़े लोग और संस्थाएँ हितधारक कहलाते हैं।
वनों पर जीवन निर्भर होता है।
सरकारी विभाग जो वनों की सुरक्षा करता है।
वनों से कच्चा माल प्राप्त करते हैं।
जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करते हैं।
स्थानीय लोगों और सरकार द्वारा मिलकर वन संरक्षण।
जल का योजनाबद्ध उपयोग।
नदी पर बनाया गया अवरोध।
ऐसी परियोजनाएँ जिनसे कई लाभ हों।
उदाहरण:
बारिश के पानी को जमा करना।
वर्षा जल का वैज्ञानिक प्रबंधन।
मृत जीवों से बने ईंधन।
सूर्य से प्राप्त ऊर्जा।
हवा से प्राप्त ऊर्जा।
समुद्री लहरों से ऊर्जा।
पृथ्वी की गर्मी से ऊर्जा।
गोबर और जैविक पदार्थों से गैस।
नाभिकीय अभिक्रिया से ऊर्जा।
ऐसा विकास जो भविष्य को नुकसान न पहुँचाए।
संसाधनों का सही उपयोग।
कम उपयोग करना।
उदाहरण:
दोबारा उपयोग करना।
उदाहरण:
कचरे से नई वस्तुएँ बनाना।
उदाहरण:
कचरे का सही निपटान।
जो आसानी से नष्ट हो जाए।
जो जल्दी नष्ट न हो।
जैविक कचरे से खाद बनाना।
इलेक्ट्रॉनिक कचरा।
उदाहरण:
पृथ्वी का तापमान बढ़ना।
वायुमंडल में गैसों द्वारा गर्मी रोकना।
सूर्य की हानिकारक किरणों से रक्षा करती है।
वन संरक्षण आंदोलन।
दक्षिण भारत में वन संरक्षण आंदोलन।
बाँध विरोधी आंदोलन।
प्रमुख नेता:
मेधा पाटकर
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| वनीकरण | नए पेड़ लगाना |
| पुनर्वनीकरण | कटे जंगल पुनः उगाना |
| जैव विविधता | जीवों की विविधता |
| सतत विकास | भविष्य सुरक्षित रखते हुए विकास |
| जीवाश्म ईंधन | मृत जीवों से बने ईंधन |
| जलागम | जल संग्रह क्षेत्र |
| पुनर्चक्रण | पुरानी वस्तु से नई वस्तु |
प्राकृतिक संसाधन पृथ्वी की अमूल्य संपत्ति हैं। यदि इनका अंधाधुंध उपयोग किया गया तो भविष्य में गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। इसलिए जल, वन, वन्यजीव, कोयला और पेट्रोलियम का संरक्षण आवश्यक है। सतत विकास, 3R सिद्धांत, जल संरक्षण, वृक्षारोपण तथा वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके हम पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रख सकते हैं।
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