रसायन विज्ञान का यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि अम्ल, क्षारक और लवण हमारे दैनिक जीवन, उद्योग, कृषि, चिकित्सा तथा पर्यावरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अध्याय में हम अम्लों और क्षारकों के गुण, उनकी अभिक्रियाएँ, pH मान, सूचक, लवणों का निर्माण तथा उनके उपयोगों का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
2.1 अम्ल (Acids)
अम्ल की परिभाषा
वे पदार्थ जो जल में घुलकर H⁺ आयन या H₃O⁺ आयन देते हैं, अम्ल कहलाते हैं।
उदाहरण:
HCl (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल)
H₂SO₄ (सल्फ्यूरिक अम्ल)
HNO₃ (नाइट्रिक अम्ल)
CH₃COOH (एसीटिक अम्ल)
अम्ल शब्द की उत्पत्ति
Acid शब्द लैटिन भाषा के “Acere” शब्द से बना है जिसका अर्थ खट्टा होता है।
अम्लों के भौतिक गुण
स्वाद खट्टा होता है
नीले लिटमस को लाल करते हैं
जल में घुलनशील होते हैं
विद्युत का संचालन करते हैं
संक्षारक प्रकृति के हो सकते हैं
त्वचा को नुकसान पहुँचा सकते हैं
अम्लों के रासायनिक गुण
धातुओं से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस देते हैं
कार्बोनेट से अभिक्रिया करके CO₂ गैस देते हैं
क्षारकों को उदासीन करते हैं
धातु ऑक्साइड से अभिक्रिया करते हैं
Arrhenius सिद्धांत
जो पदार्थ जल में H⁺ आयन देते हैं, वे अम्ल कहलाते हैं।
उदाहरण:
HCl → H⁺ + Cl⁻
Bronsted-Lowry सिद्धांत
जो पदार्थ प्रोटॉन (H⁺) दान करता है, वह अम्ल कहलाता है।
Lewis अम्ल
जो पदार्थ इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करता है, वह Lewis अम्ल कहलाता है।
प्रबल अम्ल
जो जल में पूर्णतः आयनित हो जाते हैं।
उदाहरण:
HCl
H₂SO₄
HNO₃
दुर्बल अम्ल
जो जल में आंशिक रूप से आयनित होते हैं।
उदाहरण:
CH₃COOH
H₂CO₃
कार्बनिक अम्ल
कार्बन युक्त अम्ल कार्बनिक अम्ल कहलाते हैं।
उदाहरण:
साइट्रिक अम्ल
एसीटिक अम्ल
लैक्टिक अम्ल
खनिज अम्ल
खनिजों से प्राप्त अम्ल।
उदाहरण:
सल्फ्यूरिक अम्ल
नाइट्रिक अम्ल
ऑक्सी-अम्ल
जिन अम्लों में ऑक्सीजन उपस्थित होती है।
उदाहरण:
H₂SO₄
HNO₃
हाइड्रासिड
जिन अम्लों में ऑक्सीजन नहीं होती।
उदाहरण:
HCl
HBr
एकक्षारीय, द्विक्षारीय एवं त्रिक्षारीय अम्ल
एकक्षारीय अम्ल
एक H⁺ आयन देते हैं। उदाहरण: HCl
द्विक्षारीय अम्ल
दो H⁺ आयन देते हैं। उदाहरण: H₂SO₄
त्रिक्षारीय अम्ल
तीन H⁺ आयन देते हैं। उदाहरण: H₃PO₄
सांद्र एवं तनु अम्ल
सांद्र अम्ल
जिसमें अम्ल की मात्रा अधिक होती है।
तनु अम्ल
जिसमें जल की मात्रा अधिक होती है।
अम्ल को जल में मिलाने का नियम
हमेशा अम्ल को जल में मिलाते हैं, क्योंकि यह प्रक्रिया ऊष्माक्षेपी होती है और अधिक ऊष्मा उत्पन्न करती है।
2.2 क्षारक (Bases)
क्षारक की परिभाषा
जो पदार्थ जल में OH⁻ आयन देते हैं, वे क्षारक कहलाते हैं।
उदाहरण:
NaOH
KOH
Ca(OH)₂
क्षारकों के गुण
स्वाद कड़वा होता है
स्पर्श में साबुन जैसे लगते हैं
लाल लिटमस को नीला करते हैं
विद्युत चालक होते हैं
अम्लों को उदासीन करते हैं
क्षार (Alkali)
वे क्षारक जो जल में घुल जाते हैं, क्षार कहलाते हैं।
उदाहरण:
NaOH
KOH
अघुलनशील क्षारक
Cu(OH)₂
Fe(OH)₃
प्रबल क्षारक
जो पूर्ण आयनीकरण करते हैं।
उदाहरण:
NaOH
KOH
दुर्बल क्षारक
जो आंशिक आयनीकरण करते हैं।
उदाहरण:
NH₄OH
Lewis क्षार
जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान करते हैं।
2.3 अम्ल एवं क्षारक की पहचान
स्वाद द्वारा पहचान
अम्ल → खट्टा
क्षारक → कड़वा
स्पर्श द्वारा पहचान
क्षारक साबुन जैसे लगते हैं।
सूचक द्वारा पहचान
Indicators के द्वारा अम्ल और क्षारक की पहचान की जाती है।
2.4 सूचक (Indicators)
सूचक की परिभाषा
वे पदार्थ जो रंग परिवर्तन द्वारा अम्ल एवं क्षारक की पहचान करते हैं।
प्राकृतिक सूचक
लिटमस
लाइकेन से प्राप्त होता है।
अम्ल में → लाल
क्षार में → नीला
हल्दी
अम्ल में → पीली
क्षार में → लाल-भूरी
गुड़हल सूचक
अम्ल में → गुलाबी
क्षार में → हरा
लाल पत्ता गोभी
यह प्राकृतिक pH सूचक है।
कृत्रिम सूचक
फिनॉल्फ्थेलीन
अम्ल में → रंगहीन
क्षार में → गुलाबी
मिथाइल ऑरेंज
अम्ल में → लाल
क्षार में → पीला
सार्वत्रिक सूचक
यह पूरे pH स्केल के अनुसार अलग-अलग रंग देता है।
घ्राण सूचक
प्याज
क्षार में इसकी गंध समाप्त हो जाती है।
वेनिला
क्षार में इसकी गंध कम हो जाती है।
लौंग तेल
क्षार में इसकी गंध बदल जाती है।
2.5 आयनों की भूमिका
H⁺ आयन की भूमिका
अम्लीय गुण H⁺ आयन के कारण होते हैं।
OH⁻ आयन की भूमिका
क्षारीय गुण OH⁻ आयन के कारण होते हैं।
हाइड्रोनियम आयन
H⁺ अकेला नहीं रहता, यह जल से मिलकर H₃O⁺ बनाता है।
HCl + H₂O → H₃O⁺ + Cl⁻
जल की भूमिका
जल अम्ल एवं क्षार को आयनित करने में सहायता करता है।
शुष्क HCl गैस
सूखे लिटमस पत्र पर कोई प्रभाव नहीं डालती क्योंकि जल अनुपस्थित होता है।
विद्युत चालकता
अम्ल और क्षार के विलयन आयनों की उपस्थिति के कारण विद्युत का संचालन करते हैं।
2.6 अम्लों की रासायनिक अभिक्रियाएँ
धातु के साथ अभिक्रिया
अम्ल + धातु → लवण + हाइड्रोजन गैस
Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑
धातु कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया
अम्ल + धातु कार्बोनेट → लवण + CO₂ + जल
CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + CO₂ + H₂O
धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया
NaHCO₃ + HCl → NaCl + CO₂ + H₂O
धातु ऑक्साइड के साथ अभिक्रिया
अम्ल + धातु ऑक्साइड → लवण + जल
CuO + H₂SO₄ → CuSO₄ + H₂O
क्षारक के साथ अभिक्रिया
NaOH + HCl → NaCl + H₂O
2.7 क्षारकों की रासायनिक अभिक्रियाएँ
अम्ल के साथ अभिक्रिया
लवण एवं जल बनता है।
अधातु ऑक्साइड के साथ अभिक्रिया
2NaOH + CO₂ → Na₂CO₃ + H₂O
साबुनीकरण अभिक्रिया
क्षारक वसा के साथ अभिक्रिया करके साबुन बनाते हैं।
2.8 उदासीनीकरण (Neutralization)
परिभाषा
अम्ल और क्षारक की अभिक्रिया से लवण और जल बनते हैं।
अम्ल + क्षार → लवण + जल
ऊष्माक्षेपी प्रकृति
इस अभिक्रिया में ऊष्मा निकलती है।
दैनिक जीवन में उपयोग
पेट की अम्लता दूर करने में
मिट्टी सुधार में
कीट काटने पर उपचार में
2.9 pH स्केल
pH का अर्थ
Potential of Hydrogen
pH सीमा
0 से 14
pH के आधार पर वर्गीकरण
0–6 → अम्लीय
7 → उदासीन
8–14 → क्षारीय
pH और H⁺ संबंध
H⁺ आयन अधिक होने पर pH कम होता है।
pH मीटर
pH मापने का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।
pH पेपर
रंग परिवर्तन द्वारा pH ज्ञात किया जाता है।
2.10 दैनिक जीवन में pH का महत्व
पेट में HCl
भोजन पचाने में सहायता करता है।
अम्लता (Acidity)
अधिक HCl बनने पर जलन होती है।
एंटासिड
Mg(OH)₂
NaHCO₃
दाँतों का क्षय
pH 5.5 से कम होने पर दाँत खराब होने लगते हैं।
रक्त का pH
लगभग 7.4
मिट्टी का pH
फसल उत्पादन को प्रभावित करता है।
अम्लीय वर्षा
जब वर्षा जल का pH 5.6 से कम हो।
अम्लीय वर्षा के कारण
SO₂
NO₂
जलजीवों पर प्रभाव
अम्लीय वर्षा से जलजीव प्रभावित होते हैं।
मधुमक्खी का डंक
अम्लीय प्रकृति का होता है।
चींटी का डंक
फॉर्मिक अम्ल उपस्थित होता है।
2.11 लवण (Salts)
लवण की परिभाषा
अम्ल के H⁺ के स्थान पर धातु या अमोनियम आयन आने से लवण बनते हैं।
लवणों के प्रकार
उदासीन लवण
NaCl
अम्लीय लवण
NaHSO₄
क्षारीय लवण
Na₂CO₃
द्विगुणित लवण
उदाहरण: फिटकरी
मिश्रित लवण
उदाहरण: विरंजक चूर्ण
2.12 सामान्य नमक (Common Salt)
सूत्र
NaCl
स्रोत
समुद्री जल
प्राप्ति
वाष्पीकरण द्वारा
उपयोग
भोजन में
खाद्य संरक्षण में
रसायन उद्योग में
2.13 क्लोर-क्षार प्रक्रिया
परिभाषा
NaCl विलयन का विद्युत अपघटन।
समीकरण
2NaCl + 2H₂O → 2NaOH + Cl₂ + H₂
एनोड पर
Cl₂ गैस निकलती है।
कैथोड पर
H₂ गैस निकलती है।
विलयन में
NaOH बनता है।
उपयोग
साबुन निर्माण
कागज उद्योग
PVC निर्माण
जल शुद्धिकरण
2.14 विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder)
सूत्र
CaOCl₂
निर्माण
Ca(OH)₂ + Cl₂ → CaOCl₂ + H₂O
गुण
तीव्र गंध
विरंजक गुण
ऑक्सीकारक प्रकृति
उपयोग
जल शुद्धिकरण
कपड़ा उद्योग
कीटाणुनाशक
2.15 बेकिंग सोडा
सूत्र
NaHCO₃
अन्य नाम
सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट
ऊष्मीय अपघटन
2NaHCO₃ → Na₂CO₃ + CO₂ + H₂O
उपयोग
केक फुलाने में
अग्निशामक यंत्र में
एंटासिड में
बेकिंग पाउडर
संरचना
बेकिंग सोडा + टार्टरिक अम्ल
टार्टरिक अम्ल का कार्य
कड़वाहट रोकता है।
2.16 अग्निशामक यंत्र
CO₂ गैस ऑक्सीजन की आपूर्ति रोककर आग बुझाती है।
2.17 धुलाई सोडा
सूत्र
Na₂CO₃·10H₂O
अन्य नाम
सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट
उपयोग
कठोर जल को मृदु बनाने में
सफाई में
काँच उद्योग में
2.18 जल की कठोरता
अस्थायी कठोरता
बाइकार्बोनेट के कारण।
स्थायी कठोरता
सल्फेट एवं क्लोराइड के कारण।
जल को मृदु बनाने की विधियाँ
उबालना
धुलाई सोडा मिलाना
आयन विनिमय विधि
2.19 प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP)
सूत्र
CaSO₄·½H₂O
निर्माण
CaSO₄·2H₂O → CaSO₄·½H₂O + 1½H₂O
गुण
सफेद पाउडर
जल से कठोर हो जाता है
उपयोग
टूटी हड्डी जोड़ने में
मूर्ति निर्माण में
सजावट में
पुनः जिप्सम बनना
CaSO₄·½H₂O + H₂O → CaSO₄·2H₂O
2.20 क्रिस्टलीकरण का जल
परिभाषा
लवणों में उपस्थित निश्चित जल अणु।
उदाहरण
CuSO₄·5H₂O
Na₂CO₃·10H₂O
2.21 निर्जलित लवण
जल हटने पर निर्जलित लवण बनते हैं।
उदाहरण:
CuSO₄·5H₂O → CuSO₄
2.22 महत्वपूर्ण गैसें
हाइड्रोजन गैस
धातु एवं अम्ल की अभिक्रिया से।
कार्बन डाइऑक्साइड
कार्बोनेट एवं अम्ल की अभिक्रिया से।
क्लोरीन गैस
क्लोर-क्षार प्रक्रिया से।
2.23 प्रयोगशाला सावधानियाँ
अम्ल को जल में मिलाएँ
सुरक्षा चश्मा पहनें
दस्ताने पहनें
रसायनों को न चखें
प्रयोग के बाद हाथ धोएँ
2.24 महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र
पदार्थ
सूत्र
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
HCl
सल्फ्यूरिक अम्ल
H₂SO₄
नाइट्रिक अम्ल
HNO₃
सोडियम हाइड्रॉक्साइड
NaOH
बेकिंग सोडा
NaHCO₃
धुलाई सोडा
Na₂CO₃·10H₂O
प्लास्टर ऑफ पेरिस
CaSO₄·½H₂O
विरंजक चूर्ण
CaOCl₂
2.25 महत्वपूर्ण रासायनिक अभिक्रियाएँ
Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂
NaOH + HCl → NaCl + H₂O
CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + CO₂ + H₂O
2NaCl + 2H₂O → 2NaOH + Cl₂ + H₂
2NaHCO₃ → Na₂CO₃ + CO₂ + H₂O
Ca(OH)₂ + Cl₂ → CaOCl₂ + H₂O
अध्याय का निष्कर्ष
अम्ल, क्षारक एवं लवण रसायन विज्ञान के अत्यंत महत्वपूर्ण भाग हैं। इनके गुण, अभिक्रियाएँ, pH मान तथा दैनिक जीवन में उपयोग को समझना विज्ञान की आधारभूत समझ विकसित करता है। यह अध्याय आगे की रसायन विज्ञान की पढ़ाई के लिए मजबूत आधार तैयार करता है।
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