Class-10 Science रसायन शास्त्र Ch-5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

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📅 28/05/2026

Class-10 Science रसायन शास्त्र Ch-5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

5.1 तत्वों के वर्गीकरण की आवश्यकता

प्रारंभ में केवल कुछ ही तत्व ज्ञात थे, लेकिन जैसे-जैसे नए तत्वों की खोज हुई, उन्हें याद रखना और उनके गुणों का अध्ययन करना कठिन हो गया। इसलिए वैज्ञानिकों ने समान गुण वाले तत्वों को एक साथ रखने की आवश्यकता महसूस की।

वर्गीकरण के मुख्य उद्देश्य:

  • तत्वों का व्यवस्थित अध्ययन
  • समान गुण वाले तत्वों को एक समूह में रखना
  • नए तत्वों के गुणों की भविष्यवाणी करना
  • अध्ययन को सरल और वैज्ञानिक बनाना

5.2 तत्वों के वर्गीकरण के प्रारंभिक प्रयास

डॉबेरेनर का त्रिक नियम

डॉबेरेनर ने तीन-तीन तत्वों के समूह बनाए जिन्हें त्रिक (Triads) कहा गया।

नियम:

  • तीन तत्वों के समूह में बीच वाले तत्व का परमाणु द्रव्यमान अन्य दो का औसत होता है
  • तीनों तत्वों के रासायनिक गुण समान होते हैं

उदाहरण:

  • Li, Na, K
  • Ca, Sr, Ba
  • Cl, Br, I

सीमाएँ:

  • केवल कुछ ही तत्वों पर लागू हुआ
  • सभी तत्वों का वर्गीकरण संभव नहीं हुआ

न्यूलैंड का अष्टक नियम

न्यूलैंड ने तत्वों को बढ़ते परमाणु द्रव्यमान के क्रम में रखा।

नियम:

  • हर 8वाँ तत्व पहले तत्व जैसा गुण दिखाता है
  • इसे संगीत के सप्तक (Octave) से तुलना की गई

उदाहरण:

  • Li → Na → K

सीमाएँ:

  • केवल हल्के तत्वों तक सही
  • कैल्शियम के बाद नियम टूट गया
  • खाली स्थान नहीं छोड़े गए
  • नए तत्वों के लिए स्थान नहीं था

लोथर मेयर का योगदान

  • परमाणु आयतन और परमाणु द्रव्यमान के बीच संबंध बताया
  • ग्राफ द्वारा आवर्तता (periodicity) को सिद्ध किया

5.3 मेंडलीफ की आवर्त सारणी

मेंडलीफ ने तत्वों को परमाणु द्रव्यमान के आधार पर व्यवस्थित किया।

नियम:
तत्वों के गुण उनके परमाणु द्रव्यमान के आवर्ती फलन होते हैं।

मुख्य विशेषताएँ:

  • समान गुण वाले तत्व एक ही समूह में रखे गए
  • कुल 8 समूह और कई आवर्त
  • खाली स्थान छोड़े गए ताकि नए तत्व रखे जा सकें

उपलब्धियाँ:

  • Gallium, Germanium और Scandium की भविष्यवाणी की
  • तत्वों का व्यवस्थित वर्गीकरण संभव हुआ
  • रासायनिक गुणों के आधार पर तालिका बनाई गई

सीमाएँ:

  • हाइड्रोजन की स्थिति स्पष्ट नहीं
  • समस्थानिकों (Isotopes) के लिए कोई स्थान नहीं
  • कुछ तत्वों का क्रम गलत (Ar-K, Co-Ni)
  • सभी तत्वों को सही स्थान नहीं मिल पाया

5.4 आधुनिक आवर्त नियम (Moseley का योगदान)

Moseley ने X-ray प्रयोगों के आधार पर बताया कि तत्वों का आधार परमाणु क्रमांक है, न कि परमाणु द्रव्यमान।

नियम:
तत्वों के गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन होते हैं।

महत्व:

  • परमाणु क्रमांक = प्रोटॉन संख्या
  • यही इलेक्ट्रॉनिक विन्यास तय करता है
  • आधुनिक आवर्त सारणी का आधार यही है

5.5 आधुनिक आवर्त सारणी की संरचना

आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को बढ़ते परमाणु क्रमांक के अनुसार रखा गया है।

आवर्त (Periods)

  • कुल 7 आवर्त होते हैं
  • ये क्षैतिज पंक्तियाँ होती हैं
  • आवर्त संख्या = इलेक्ट्रॉन कोशों की संख्या

समूह (Groups)

  • कुल 18 समूह होते हैं
  • ये ऊर्ध्वाधर स्तंभ होते हैं
  • एक समूह के तत्वों में समान संयोजक इलेक्ट्रॉन होते हैं

5.6 आवर्त सारणी के खंड (Blocks)

s-खंड

  • समूह 1 और 2
  • अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ

p-खंड

  • समूह 13 से 18
  • धातु, अधातु और उपधातु शामिल हैं

d-खंड

  • संक्रमण तत्व (Transition elements)
  • परिवर्ती संयोजकता दिखाते हैं
  • रंगीन यौगिक बनाते हैं

f-खंड

  • लैंथेनाइड और एक्टिनाइड
  • भारी और रेडियोधर्मी तत्व
  • आंतरिक संक्रमण तत्व कहलाते हैं

5.7 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास

इलेक्ट्रॉन विभिन्न कोशों में इस प्रकार भरे जाते हैं:

K = 2
L = 8
M = 18
N = 32

उदाहरण:
Na = 2,8,1
Cl = 2,8,7

निष्कर्ष:
बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन ही तत्वों के रासायनिक गुण निर्धारित करते हैं।

5.8 आवर्त गुण (Periodic Properties)

परमाणु आकार (Atomic Size)

आवर्त में बाएँ से दाएँ घटता है और समूह में ऊपर से नीचे बढ़ता है। कारण: नाभिकीय आवेश बढ़ता है

आयनन ऊर्जा (Ionization Energy)

परमाणु से इलेक्ट्रॉन निकालने की ऊर्जा। आवर्त में बढ़ती है और समूह में घटती है

इलेक्ट्रॉन ग्रहण एन्थैल्पी

इलेक्ट्रॉन जोड़ने पर ऊर्जा परिवर्तन। हैलोजन में अधिकतम

विद्युत ऋणात्मकता

बंध के इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने की क्षमता। फ्लोरीन सबसे अधिक

धात्विक गुण

इलेक्ट्रॉन देने की प्रवृत्ति। आवर्त में घटता है और समूह में बढ़ता है

अधात्विक गुण

इलेक्ट्रॉन लेने की प्रवृत्ति। आवर्त में बढ़ता है

परिरक्षण प्रभाव (Shielding Effect)

भीतरी इलेक्ट्रॉन बाहरी इलेक्ट्रॉन को नाभिक से बचाते हैं। समूह में नीचे जाने पर बढ़ता है

प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge)

इलेक्ट्रॉन पर वास्तविक नाभिकीय आकर्षण बल

5.9 महत्वपूर्ण अवधारणाएँ

विकर्ण संबंध (Diagonal Relationship)

Li ↔ Mg
Be ↔ Al
कारण: समान आकार और charge ratio

निष्क्रिय युग्म प्रभाव (Inert Pair Effect)

भारी तत्वों में ns² इलेक्ट्रॉन रासायनिक क्रिया में भाग नहीं लेते

असामान्य व्यवहार

Li, Be, B सामान्य आवर्त प्रवृत्तियों से अलग व्यवहार करते हैं

5.10 समूहों का अध्ययन

समूह 1 (क्षारीय धातु)

अत्यधिक क्रियाशील और पानी से तीव्र प्रतिक्रिया

समूह 2 (क्षारीय पृथ्वी धातु)

अपेक्षाकृत कम क्रियाशील

समूह 17 (हैलोजन)

अत्यधिक क्रियाशील अधातु और इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं

समूह 18 (निष्क्रिय गैसें)

बाहरी कोश पूर्ण होने के कारण अत्यंत स्थिर

5.11 आवर्तों का अध्ययन

पहला आवर्त सबसे छोटा होता है। दूसरा और तीसरा छोटा आवर्त होते हैं। चौथा से सातवाँ लंबा आवर्त होता है जिसमें d और f ब्लॉक शामिल होते हैं

5.12 आवर्त प्रवृत्तियों का सारांश

परमाणु आकार: आवर्त में घटता है, समूह में बढ़ता है
आयनन ऊर्जा: आवर्त में बढ़ती है, समूह में घटती है
धात्विक गुण: आवर्त में घटता है, समूह में बढ़ता है
अधात्विक गुण: आवर्त में बढ़ता है, समूह में घटता है

5.13 निष्कर्ष

आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु क्रमांक पर आधारित है। सभी तत्वों के गुण उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर निर्भर करते हैं। आवर्तता का मुख्य कारण इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की पुनरावृत्ति है

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