यह अध्याय कक्षा 11 भौतिकी का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें हम यह समझते हैं कि जब कई कण (Particles) मिलकर एक निकाय (System) बनाते हैं, तो उनकी गति का अध्ययन कैसे किया जाता है। साथ ही, जब कोई वस्तु अपने अक्ष (Axis) के चारों ओर घूमती है, तो उसकी घूर्णन गति (Rotational Motion) का विश्लेषण कैसे किया जाता है।
भौतिकी में ऐसा पिंड जिसका आकार और आकृति नगण्य मानी जाए तथा जिसका केवल द्रव्यमान महत्वपूर्ण हो, कण कहलाता है।
उदाहरण:
जब दो या दो से अधिक कण एक साथ विचार किए जाते हैं, तो उन्हें कणों का निकाय कहते हैं।
उदाहरण:
किसी वस्तु या कणों के समूह का वह काल्पनिक बिंदु जहाँ उसका सम्पूर्ण द्रव्यमान केंद्रित माना जा सकता है, द्रव्यमान केंद्र कहलाता है।
जटिल वस्तुओं की गति को सरल बनाने के लिए द्रव्यमान केंद्र का उपयोग किया जाता है।
Xcm=m1x1+m2x2m1+m2X_{cm}=\frac{m_1x_1+m_2x_2}{m_1+m_2}
जहाँ,
किसी निकाय पर लगने वाले कुल बाह्य बल के कारण उसका द्रव्यमान केंद्र गति करता है।
Fext=MacmF_{ext}=M a_{cm}
जहाँ,
रॉकेट में गैसों का बाहर निकलना एक आंतरिक प्रक्रिया है, लेकिन बाह्य परिस्थितियों के अनुसार द्रव्यमान केंद्र गति करता है।
द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं।
p=mvp=mv
kg m/s
यदि किसी निकाय पर कोई बाह्य बल कार्य नहीं कर रहा हो, तो निकाय का कुल रैखिक संवेग स्थिर रहता है।
Pinitial=PfinalP_{initial}=P_{final}
बंदूक का प्रतिक्षेप (Recoil)
गोली आगे जाती है और बंदूक पीछे हटती है।
रॉकेट प्रक्षेपण
रॉकेट ऊपर जाता है और गैस नीचे निकलती है।
विस्फोट
विस्फोट में कुल संवेग संरक्षित रहता है।
टक्कर (Collision)
दो वस्तुओं की टक्कर में कुल संवेग संरक्षित रहता है।
दो वस्तुओं के बीच अल्प समय के लिए होने वाली परस्पर क्रिया टक्कर कहलाती है।
प्रत्यास्थ टक्कर (Elastic Collision)
अप्रत्यास्थ टक्कर (Inelastic Collision)
पूर्णतः अप्रत्यास्थ टक्कर
टक्कर के बाद दोनों वस्तुएँ साथ चलती हैं।
ऐसा पिंड जिसकी आकृति और आकार बाह्य बल के प्रभाव में नहीं बदलते, कठोर पिंड कहलाता है।
पूर्णतः कठोर पिंड वास्तविकता में नहीं होते, यह एक आदर्श अवधारणा है।
जब कोई वस्तु किसी निश्चित अक्ष के चारों ओर घूमती है, तो वह घूर्णन गति कहलाती है।
वह काल्पनिक रेखा जिसके चारों ओर वस्तु घूमती है।
घूमने के दौरान कोण में हुए परिवर्तन को कोणीय विस्थापन कहते हैं।
θ\theta
रेडियन (Radian)
θ=sr\theta=\frac{s}{r}
जहाँ,
जब चाप की लंबाई त्रिज्या के बराबर हो, तब बना कोण 1 रेडियन कहलाता है।
180∘=π radian180^\circ=\pi \, \text{radian}
एकांक समय में कोणीय विस्थापन की दर।
ω=dθdt\omega=\frac{d\theta}{dt}
rad/s
v=rωv=r\omega
कोणीय वेग में परिवर्तन की दर।
α=dωdt\alpha=\frac{d\omega}{dt}
rad/s²
ω=ω0+αt\omega=\omega_0+\alpha t
θ=ω0t+12αt2\theta=\omega_0 t+\frac12\alpha t^2 ω2=ω02+2αθ\omega^2=\omega_0^2+2\alpha\theta
| रैखिक राशि | कोणीय राशि |
|---|---|
| विस्थापन (s) | कोणीय विस्थापन (θ) |
| वेग (v) | कोणीय वेग (ω) |
| त्वरण (a) | कोणीय त्वरण (α) |
| द्रव्यमान (m) | जड़त्व आघूर्ण (I) |
| बल (F) | बलाघूर्ण (τ) |
| संवेग (p) | कोणीय संवेग (L) |
घूर्णन उत्पन्न करने की क्षमता को बलाघूर्ण कहते हैं।
τ=rFsinθ\tau=rF\sin\theta
N·m
बराबर और विपरीत दिशा के दो समानांतर बल जो घूर्णन उत्पन्न करें।
घूर्णन गति में वस्तु का संवेग कोणीय संवेग कहलाता है।
L=r×pL=r\times p
कठोर पिंड के लिए
L=IωL=I\omega
kg m²/s
यदि किसी निकाय पर कुल बाह्य बलाघूर्ण शून्य हो तो उसका कोणीय संवेग स्थिर रहता है।
वस्तु का अपनी अवस्था परिवर्तन का विरोध करना जड़त्व कहलाता है।
घूर्णन गति में जड़त्व का माप जड़त्व आघूर्ण कहलाता है।
I=∑miri2I=\sum m_ir_i^2
kg m²
वलय (Ring)
I=MR2I=MR^2
ठोस डिस्क
I=12MR2I=\frac12MR^2
ठोस गोला
I=25MR2I=\frac25MR^2
खोखला गोला
I=23MR2I=\frac23MR^2
छड़ (केंद्र से)
I=112ML2I=\frac1{12}ML^2
छड़ (सिरे से)
I=13ML2I=\frac13ML^2
वह दूरी जहाँ पूरा द्रव्यमान केंद्रित मानने पर जड़त्व आघूर्ण समान रहे।
I=Mk2I=Mk^2
I=Icm+Md2I=I_{cm}+Md^2
Iz=Ix+IyI_z=I_x+I_y
K=12Iω2K=\frac12 I\omega^2
τ=Iα\tau=I\alpha
यह रैखिक गति के F=maF=ma का घूर्णन रूप है।
τΔt=ΔL\tau \Delta t=\Delta L
जब वस्तु पर लगने वाले सभी बल और बलाघूर्ण संतुलित हों तो वस्तु संतुलन में होती है।
∑F=0\sum F=0
∑τ=0\sum \tau=0
वस्तु को थोड़ा विस्थापित करने पर वह पुनः अपनी मूल स्थिति में लौट आती है।
उदाहरण: कटोरे में रखी गेंद
वस्तु को थोड़ा विस्थापित करने पर वह अपनी मूल स्थिति से और दूर चली जाती है।
उदाहरण: पहाड़ी के शीर्ष पर गेंद
विस्थापित करने पर वस्तु नई स्थिति में ही बनी रहती है।
उदाहरण: समतल सतह पर गेंद
वह बिंदु जहाँ वस्तु का सम्पूर्ण भार कार्य करता हुआ माना जाता है।
समान गुरुत्वीय क्षेत्र में गुरुत्व केंद्र और द्रव्यमान केंद्र एक ही होते हैं।
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