पदार्थ के स्थूल गुण वे गुण होते हैं जो किसी पदार्थ के बड़े भाग (Bulk) के व्यवहार को दर्शाते हैं। इन गुणों का अध्ययन करके हम यह समझते हैं कि ठोस, द्रव और गैस बाहरी बल, ताप तथा दाब के प्रभाव में कैसे व्यवहार करते हैं।
ठोस पदार्थ में अणु और परमाणु एक-दूसरे के बहुत निकट होते हैं। इनके बीच आकर्षण बल अधिक होता है, इसलिए इनका आकार और आयतन निश्चित रहता है।
उदाहरण: लोहे की छड़, लकड़ी, पत्थर आदि।
जब किसी वस्तु पर बाहरी बल लगाया जाता है तो उसके आकार या आयाम में परिवर्तन हो सकता है। इस परिवर्तन को विरूपण कहते हैं।
किसी पदार्थ का वह गुण जिसके कारण बाहरी बल हटाने पर वह अपनी मूल अवस्था में वापस आ जाता है, प्रत्यास्थता कहलाता है।
उदाहरण: स्प्रिंग, रबर बैंड।
यदि बल हटाने के बाद वस्तु अपनी मूल अवस्था में वापस न आए तो इस गुण को प्लास्टिकता कहते हैं।
उदाहरण: मिट्टी, मोम।
वह अधिकतम सीमा तक लगाया गया बल जिसके बाद वस्तु अपनी मूल अवस्था में लौट आती है। यदि यह सीमा पार हो जाए तो स्थायी विकृति उत्पन्न हो जाती है।
जब किसी वस्तु पर बल लगाया जाता है तो प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाला आंतरिक प्रतिरोधी बल तनाव कहलाता है।
Stress=FA\text{Stress}=\frac{F}{A}
SI मात्रक: पास्कल (Pa)
वस्तु की लंबाई में परिवर्तन करता है।
आयतन में परिवर्तन करता है।
आकार में परिवर्तन करता है।
तनाव के कारण उत्पन्न सापेक्ष परिवर्तन को विकृति कहते हैं।
Strain=Change in DimensionOriginal Dimension\text{Strain}=\frac{\text{Change in Dimension}}{\text{Original Dimension}}
विकृति विमाहीन राशि (Dimensionless Quantity) है।
प्रत्यास्थ सीमा के भीतर तनाव विकृति के समानुपाती होता है।
Stress∝Strain\text{Stress}\propto\text{Strain}
या
Stress=E×Strain\text{Stress}=E\times\text{Strain}
जहाँ E प्रत्यास्थता गुणांक है।
इस ग्राफ से पदार्थ की प्रत्यास्थता, प्रत्यास्थ सीमा, यील्ड बिंदु और टूटने की सीमा ज्ञात की जाती है।
अनुदैर्ध्य तनाव और अनुदैर्ध्य विकृति के अनुपात को यंग गुणांक कहते हैं।
Y=Longitudinal StressLongitudinal StrainY=\frac{\text{Longitudinal Stress}}{\text{Longitudinal Strain}}
आयतन तनाव और आयतन विकृति के अनुपात को बल्क गुणांक कहते हैं।
K=Volumetric StressVolumetric StrainK=\frac{\text{Volumetric Stress}}{\text{Volumetric Strain}}
कतरनी तनाव और कतरनी विकृति के अनुपात को कतरनी गुणांक कहते हैं।
G=Shearing StressShearing StrainG=\frac{\text{Shearing Stress}}{\text{Shearing Strain}}
लंबाई में परिवर्तन के कारण चौड़ाई में उत्पन्न परिवर्तन का अनुपात।
विरूपित वस्तु में संचित ऊर्जा।
ऐसा पदार्थ जो बह सकता है और निश्चित आकार नहीं रखता, द्रव कहलाता है।
किसी पदार्थ का प्रति इकाई आयतन द्रव्यमान।
ρ=mV\rho=\frac{m}{V}
किसी पदार्थ के घनत्व और जल के घनत्व का अनुपात।
प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाला बल।
P=FAP=\frac{F}{A}
स्थिर द्रवों के अध्ययन को द्रव स्थैतिकी कहते हैं।
जैसे-जैसे गहराई बढ़ती है, दाब बढ़ता है।
P=hρgP=h\rho g
बंद द्रव पर लगाया गया दाब सभी दिशाओं में समान रूप से संचरित होता है।
पास्कल नियम पर आधारित मशीनें।
द्रव में डुबोई गई वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल लगता है जो विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है।
द्रव द्वारा ऊपर की ओर लगाया गया बल।
जब उत्प्लावन बल और वस्तु का भार बराबर हो जाता है तो वस्तु तैरती है।
द्रव की सतह पर कार्य करने वाला संकुचन बल।
सतह क्षेत्रफल बढ़ाने में आवश्यक ऊर्जा।
समान अणुओं के बीच आकर्षण बल।
भिन्न पदार्थों के अणुओं के बीच आकर्षण।
द्रव सतह और ठोस सतह के बीच बना कोण।
पतली नली में द्रव का ऊपर या नीचे उठना।
उदाहरण:
द्रव की परतों के बीच उत्पन्न आंतरिक घर्षण।
प्रवाह का विरोध करने वाला बल।
परतों में व्यवस्थित प्रवाह।
अनियमित प्रवाह।
लामिनार प्रवाह बनाए रखने की अधिकतम वेग सीमा।
प्रवाह की प्रकृति निर्धारित करने वाली विमाहीन राशि।
श्यान माध्यम में गतिमान गोलाकार वस्तु पर लगने वाले प्रतिरोधी बल का नियम।
वह स्थिर वेग जिस पर गिरती वस्तु का त्वरण शून्य हो जाता है।
द्रव प्रवाह की दिशा दर्शाने वाली रेखाएँ।
वेग बढ़ने पर दाब घटता है।
P+12ρv2+ρgh=constantP+\frac{1}{2}\rho v^2+\rho gh=\text{constant}
किसी वस्तु की गर्म या ठंडी अवस्था का माप।
जब दो वस्तुओं का ताप समान हो जाए।
तापांतर के कारण स्थानांतरित ऊर्जा।
ताप मापने की विज्ञान शाखा।
ताप मापने का उपकरण।
0 K या –273.15°C
ताप बढ़ने पर पदार्थ के आयामों में वृद्धि।
लंबाई में वृद्धि।
α=ΔLLΔT\alpha=\frac{\Delta L}{L\Delta T}
क्षेत्रफल में वृद्धि।
क्षेत्रफल में प्रति इकाई ताप वृद्धि पर होने वाले परिवर्तन का माप।
आयतन में वृद्धि।
आयतन में प्रति इकाई ताप वृद्धि पर होने वाले परिवर्तन का माप।
4°C से 0°C तक ठंडा करने पर जल का आयतन बढ़ता है।
1 kg पदार्थ का ताप 1°C बढ़ाने हेतु आवश्यक ऊष्मा।
Q=mcΔTQ=mc\Delta T
किसी वस्तु के बराबर ऊष्मा ग्रहण करने वाले जल का द्रव्यमान।
वस्तु का ताप 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा।
अवस्था परिवर्तन के दौरान अवशोषित या उत्सर्जित ऊष्मा।
ठोस के पिघलने का ताप।
द्रव के उबलने का ताप।
ऊष्मा के एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने की प्रक्रिया।
कणों के प्रत्यक्ष संपर्क द्वारा ऊष्मा का संचरण।
चालन की क्षमता।
द्रव या गैस के वास्तविक प्रवाह द्वारा ऊष्मा का संचरण।
संवहन के कारण बनने वाली धाराएँ।
विद्युतचुंबकीय तरंगों द्वारा ऊष्मा का संचरण।
आदर्श ऊष्मा अवशोषक एवं उत्सर्जक।
कृष्णिका द्वारा उत्सर्जित विकिरण।
पृथ्वी का ताप बढ़ाने वाली प्रक्रिया।
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