Class 11 रसायन विज्ञान Ch-4 रासायनिक बंधन एवं आणविक संरचना

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📅 05/06/2026

अध्याय 4: रासायनिक बंधन एवं आणविक संरचना (Chemical Bonding and Molecular Structure)

रासायनिक बंधन की आवश्यकता (Why Chemical Bonding Occurs)

कोई भी परमाणु प्रकृति में न्यूनतम ऊर्जा (Minimum Energy) तथा अधिकतम स्थिरता (Maximum Stability) प्राप्त करना चाहता है। निष्क्रिय गैसों (Noble Gases) की बाहरी कक्षा पूर्ण होती है, इसलिए वे अत्यधिक स्थिर होती हैं। अन्य तत्व भी इसी प्रकार की स्थिरता प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉन त्यागते, ग्रहण करते या साझा करते हैं। इसी कारण रासायनिक बंधों का निर्माण होता है।

निष्क्रिय गैस विन्यास (Noble Gas Configuration)

सबसे स्थिर इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को Noble Gas Configuration कहते हैं। जैसे Ne (2,8) तथा Ar (2,8,8)। जब कोई परमाणु ऐसा विन्यास प्राप्त कर लेता है तो उसकी स्थिरता बढ़ जाती है।

द्विक नियम (Duplet Rule)

कुछ तत्व 8 इलेक्ट्रॉन नहीं बल्कि 2 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके स्थिर हो जाते हैं। हाइड्रोजन और हीलियम इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इसे Duplet Rule कहा जाता है।

संयोजक इलेक्ट्रॉन (Valence Electrons)

परमाणु के सबसे बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉन, जो बंध निर्माण में भाग लेते हैं, संयोजक इलेक्ट्रॉन कहलाते हैं। किसी तत्व के रासायनिक गुण मुख्यतः इन्हीं इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर करते हैं।

संयोजकता (Valency)

किसी परमाणु की बंध बनाने की क्षमता को संयोजकता कहते हैं। उदाहरण के लिए हाइड्रोजन की संयोजकता 1, ऑक्सीजन की 2, नाइट्रोजन की 3 तथा कार्बन की 4 होती है।

कोसेल-लुईस दृष्टिकोण (Kossel-Lewis Approach)

कोसेल के अनुसार धातुएँ इलेक्ट्रॉन त्यागती हैं और अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती हैं, जिससे आयनिक बंध बनता है। लुईस के अनुसार परमाणु इलेक्ट्रॉनों का साझाकरण करते हैं, जिससे सहसंयोजक बंध बनता है। यही आधुनिक रासायनिक बंधन सिद्धांत का आधार है।

लुईस प्रतीक (Lewis Symbols)

किसी तत्व के संयोजक इलेक्ट्रॉनों को बिंदुओं के रूप में दर्शाने की विधि Lewis Symbol कहलाती है। यह बंध निर्माण को समझने का सरल तरीका है।

अष्टक नियम (Octet Rule)

परमाणु अपनी बाहरी कक्षा में 8 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके निष्क्रिय गैस जैसी स्थिरता प्राप्त करना चाहते हैं। यही Octet Rule कहलाता है। NaCl, CH₄, NH₃ और H₂O इसके उदाहरण हैं।

अष्टक नियम की सीमाएँ (Limitations of Octet Rule)

कुछ अणुओं में केंद्रीय परमाणु के पास 8 से कम इलेक्ट्रॉन होते हैं, जैसे BF₃ तथा BeCl₂। इन्हें अपूर्ण अष्टक (Incomplete Octet) कहते हैं।

कुछ अणुओं में 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन होते हैं, जैसे PCl₅, SF₆ तथा IF₇। इन्हें विस्तारित अष्टक (Expanded Octet) कहते हैं।

कुछ अणुओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या विषम होती है, जैसे NO तथा NO₂। इन्हें विषम इलेक्ट्रॉन अणु (Odd Electron Molecules) कहते हैं।

प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge)

नाभिक द्वारा बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर लगाए गए वास्तविक आकर्षण बल को Effective Nuclear Charge कहते हैं। इसके बढ़ने पर परमाणु त्रिज्या घटती है तथा विद्युतऋणात्मकता और आयनीकरण ऊर्जा बढ़ती है।

आयनीकरण एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy)

गैसीय अवस्था में किसी परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा को आयनीकरण एन्थैल्पी कहते हैं। यह किसी परमाणु की इलेक्ट्रॉन खोने की प्रवृत्ति को दर्शाती है।

इलेक्ट्रॉन बंधुता (Electron Affinity)

जब कोई गैसीय परमाणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है और ऊर्जा मुक्त होती है, तो उसे इलेक्ट्रॉन बंधुता कहते हैं। इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति जितनी अधिक होगी, इलेक्ट्रॉन बंधुता उतनी अधिक होगी।

विद्युतऋणात्मकता (Electronegativity)

किसी बंध में साझा इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करने की परमाणु की क्षमता को विद्युतऋणात्मकता कहते हैं। फ्लोरीन सबसे अधिक विद्युतऋणात्मक तत्व है।

रासायनिक बंधों के प्रकार (Types of Chemical Bonds)

इलेक्ट्रॉन के पूर्ण स्थानांतरण से आयनिक बंध बनता है।

इलेक्ट्रॉनों के साझाकरण से सहसंयोजक बंध बनता है।

बंध निर्माण के लिए आवश्यक दोनों इलेक्ट्रॉन एक ही परमाणु द्वारा दिए जाएँ तो समन्वय बंध बनता है।

आयनिक बंध (Ionic Bond)

जब एक परमाणु पूर्ण रूप से इलेक्ट्रॉन त्याग देता है और दूसरा उसे ग्रहण कर लेता है, तब आयनिक बंध बनता है। उदाहरण के लिए NaCl, MgO तथा CaCl₂।

आयनिक यौगिक सामान्यतः कठोर, भंगुर, उच्च गलनांक तथा उच्च क्वथनांक वाले होते हैं। ये पिघली अवस्था में विद्युत के सुचालक होते हैं।

लैटिस ऊर्जा (Lattice Enthalpy)

गैसीय आयनों से एक मोल आयनिक ठोस बनने पर जो ऊर्जा मुक्त होती है, उसे लैटिस ऊर्जा कहते हैं। यह आयनिक यौगिक की स्थिरता का माप है।

बॉर्न-हैबर चक्र (Born-Haber Cycle)

आयनिक यौगिकों की निर्माण एन्थैल्पी ज्ञात करने की ऊष्मागतिकीय विधि को Born-Haber Cycle कहते हैं। इसमें आयनीकरण ऊर्जा, इलेक्ट्रॉन बंधुता, बंध विच्छेदन ऊर्जा तथा लैटिस ऊर्जा का उपयोग किया जाता है।

फाजान का नियम (Fajan’s Rule)

यह नियम बताता है कि किसी आयनिक यौगिक में सहसंयोजक गुण कितना होगा। छोटा और अधिक आवेश वाला धनायन तथा बड़ा ऋणायन सहसंयोजक गुण को बढ़ाते हैं।

ध्रुवण (Polarization)

धनायन द्वारा ऋणायन के इलेक्ट्रॉन बादल को विकृत करने की प्रक्रिया को ध्रुवण कहते हैं।

ध्रुवण शक्ति (Polarizing Power)

धनायन की विकृति उत्पन्न करने की क्षमता को Polarizing Power कहते हैं।

ध्रुवणशीलता (Polarizability)

ऋणायन की विकृत होने की क्षमता को Polarizability कहते हैं।

सहसंयोजक बंध (Covalent Bond)

जब दो परमाणु इलेक्ट्रॉनों को साझा करते हैं तब सहसंयोजक बंध बनता है। उदाहरण के रूप में H₂, O₂, N₂ तथा CH₄ को लिया जा सकता है।

एकल, द्विबंध और त्रिबंध

एक इलेक्ट्रॉन युग्म साझा होने पर एकल बंध बनता है।

दो इलेक्ट्रॉन युग्म साझा होने पर द्विबंध बनता है।

तीन इलेक्ट्रॉन युग्म साझा होने पर त्रिबंध बनता है।

समन्वय बंध (Coordinate Bond)

जब बंध निर्माण में भाग लेने वाले दोनों इलेक्ट्रॉन एक ही परमाणु द्वारा प्रदान किए जाते हैं, तब Coordinate Bond बनता है। NH₄⁺, H₃O⁺ तथा CO इसके उदाहरण हैं।

लुईस संरचना (Lewis Structure)

अणुओं में इलेक्ट्रॉनों तथा बंधों को प्रदर्शित करने की विधि Lewis Structure कहलाती है। इससे अणु की संरचना तथा स्थिरता का अध्ययन किया जाता है।

इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना (Electron Dot Structure)

संयोजक इलेक्ट्रॉनों को बिंदुओं के रूप में प्रदर्शित करने की विधि Electron Dot Structure कहलाती है।

लुईस सूत्र (Lewis Formula)

बंधों को रेखाओं के माध्यम से दर्शाने वाली संरचना Lewis Formula कहलाती है।

स्थानीयकृत तथा विस्थानीयकृत बंध (Localized and Delocalized Bond)

Localized Bond में इलेक्ट्रॉन केवल दो परमाणुओं के बीच सीमित रहते हैं।

Delocalized Bond में इलेक्ट्रॉन पूरे अणु में फैले रहते हैं, जैसे Benzene तथा Carbonate Ion।

अनुनाद (Resonance)

जब किसी अणु को एक से अधिक Lewis Structures द्वारा दर्शाया जा सकता है तो उस घटना को Resonance कहते हैं। NO₃⁻, CO₃²⁻, O₃ तथा Benzene इसके उदाहरण हैं।

अनुनाद संकर (Resonance Hybrid)

वास्तविक संरचना जो सभी अनुनादी संरचनाओं का मिश्रण होती है, Resonance Hybrid कहलाती है।

अनुनाद ऊर्जा (Resonance Energy)

अनुनाद संकर की अतिरिक्त स्थिरता को Resonance Energy कहते हैं।

औपचारिक आवेश (Formal Charge)

Lewis Structure में किसी परमाणु पर उपस्थित काल्पनिक आवेश को Formal Charge कहते हैं। न्यूनतम Formal Charge वाली संरचना अधिक स्थिर होती है।

बंध प्राचल (Bond Parameters)

बंध लंबाई, बंध कोण, बंध ऊर्जा तथा बंध क्रम को सामूहिक रूप से Bond Parameters कहा जाता है।

बंध लंबाई (Bond Length)

दो नाभिकों के बीच की औसत दूरी को Bond Length कहते हैं।

सहसंयोजक त्रिज्या (Covalent Radius)

बंध लंबाई का आधा भाग Covalent Radius कहलाता है।

वान डर वाल्स त्रिज्या (Van der Waals Radius)

दो असंबद्ध परमाणुओं के बीच न्यूनतम दूरी का आधा भाग Van der Waals Radius कहलाता है।

बंध कोण (Bond Angle)

दो बंधों के बीच बने कोण को Bond Angle कहते हैं।

बंध ऊर्जा (Bond Energy)

बंध को तोड़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा को Bond Energy कहते हैं।

बंध वियोजन ऊर्जा (Bond Dissociation Energy)

विशिष्ट बंध को पूर्ण रूप से तोड़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा को Bond Dissociation Energy कहते हैं।

बंध क्रम (Bond Order)

दो परमाणुओं के बीच बंधों की संख्या को Bond Order कहते हैं। Bond Order बढ़ने पर बंध अधिक मजबूत और स्थिर हो जाता है।

ध्रुवीय तथा अध्रुवीय बंध (Polar and Non-Polar Bond)

यदि इलेक्ट्रॉनों का वितरण असमान हो तो Polar Bond बनता है।

यदि वितरण समान हो तो Non-Polar Bond बनता है।

ध्रुवीय तथा अध्रुवीय अणु (Polar and Non-Polar Molecules)

H₂O, NH₃ तथा HCl ध्रुवीय अणु हैं।

N₂, O₂ तथा CO₂ अध्रुवीय अणु हैं।

द्विध्रुव आघूर्ण (Dipole Moment)

अणु की ध्रुवीयता का माप Dipole Moment कहलाता है। इसका उपयोग अणु का आकार और ध्रुवीयता ज्ञात करने में किया जाता है।

VSEPR सिद्धांत (Valence Shell Electron Pair Repulsion Theory)

संयोजक कोश के इलेक्ट्रॉन युग्म एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं और अधिकतम दूरी पर व्यवस्थित होते हैं। यही अणु की ज्यामिति निर्धारित करता है।

Lone Pair और Bond Pair

बंधन में भाग लेने वाले इलेक्ट्रॉन Bond Pair कहलाते हैं।

बंधन में भाग न लेने वाले इलेक्ट्रॉन Lone Pair कहलाते हैं।

Lone Pair की उपस्थिति Bond Angle को कम कर देती है।

अणुओं की ज्यामिति (Molecular Geometry)

Linear, Trigonal Planar, Bent, Trigonal Pyramidal, Tetrahedral, Trigonal Bipyramidal, See-Saw, T-Shaped, Octahedral, Square Pyramidal तथा Square Planar सभी महत्वपूर्ण आणविक आकार हैं।

संकरण (Hybridization)

Atomic Orbitals के मिश्रण से समान ऊर्जा वाले नए Hybrid Orbitals का निर्माण Hybridization कहलाता है।

sp संकरण में Linear Geometry प्राप्त होती है।

sp² संकरण में Trigonal Planar Geometry प्राप्त होती है।

sp³ संकरण में Tetrahedral Geometry प्राप्त होती है।

sp³d संकरण में Trigonal Bipyramidal Geometry प्राप्त होती है।

sp³d² संकरण में Octahedral Geometry प्राप्त होती है।

sp³d³ संकरण में Pentagonal Bipyramidal Geometry प्राप्त होती है।

परमाण्विक कक्षकों का अतिव्यापन (Overlapping of Atomic Orbitals)

बंध निर्माण के लिए परमाण्विक कक्षक आपस में Overlap करते हैं। Overlap जितना अधिक होगा, बंध उतना ही मजबूत होगा।

अतिव्यापन के प्रकार (Types of Overlap)

s-s Overlap

s-p Overlap

p-p Overlap

सिग्मा बंध (Sigma Bond)

Head-on Overlap से बनने वाला मजबूत बंध Sigma Bond कहलाता है। यह स्वतंत्र घूर्णन की अनुमति देता है।

पाई बंध (Pi Bond)

Sidewise Overlap से बनने वाला बंध Pi Bond कहलाता है। यह Sigma Bond से कमजोर होता है तथा घूर्णन की अनुमति नहीं देता।

आणविक कक्षक सिद्धांत (Molecular Orbital Theory)

यह आधुनिक सिद्धांत बताता है कि इलेक्ट्रॉन पूरे अणु में फैले हुए Molecular Orbitals में उपस्थित रहते हैं। यह सिद्धांत Valence Bond Theory की कई कमियों को दूर करता है।

बंधनकारी कक्षक (Bonding Orbital)

इनकी ऊर्जा कम होती है तथा ये अणु की स्थिरता बढ़ाते हैं।

प्रतिबंधनकारी कक्षक (Antibonding Orbital)

इनकी ऊर्जा अधिक होती है तथा ये अणु की स्थिरता कम करते हैं।

अभंधनकारी कक्षक (Non-Bonding Orbital)

ये बंध निर्माण में भाग नहीं लेते तथा इनकी ऊर्जा लगभग अपरिवर्तित रहती है।

चुंबकीय गुण (Magnetic Properties)

जिन अणुओं में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं वे Paramagnetic कहलाते हैं।

जिन अणुओं में सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं वे Diamagnetic कहलाते हैं।

O₂ Paramagnetic अणु का प्रसिद्ध उदाहरण है।

हाइड्रोजन बंधन (Hydrogen Bonding)

जब हाइड्रोजन सीधे F, O या N से जुड़ा हो और किसी अन्य विद्युतऋणात्मक परमाणु के Lone Pair से आकर्षित हो, तब Hydrogen Bond बनता है।

अंतराअणुक हाइड्रोजन बंधन (Intermolecular Hydrogen Bonding)

दो अलग-अलग अणुओं के बीच बनने वाला Hydrogen Bond Intermolecular Hydrogen Bonding कहलाता है। H₂O तथा HF इसके उदाहरण हैं।

अंतःअणुक हाइड्रोजन बंधन (Intramolecular Hydrogen Bonding)

एक ही अणु के भीतर बनने वाला Hydrogen Bond Intramolecular Hydrogen Bonding कहलाता है। o-Nitrophenol तथा Salicylic Acid इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

हाइड्रोजन बंधन के प्रभाव

Hydrogen Bonding के कारण पदार्थों का गलनांक, क्वथनांक, श्यानता तथा पृष्ठ तनाव बढ़ जाता है। यह जल की असामान्य विशेषताओं का भी मुख्य कारण है।

इस अध्याय के अक्सर छूट जाने वाले महत्वपूर्ण सूक्ष्म टॉपिक्स

Valence Shell, Noble Gas Configuration, Duplet Rule, Effective Nuclear Charge, Lewis Symbol, Lewis Dot Structure, Covalent Radius, Van der Waals Radius, Bond Dissociation Energy, Polarization, Polarizing Power, Polarizability, Localized Bond, Delocalized Bond, Resonance Hybrid, Resonance Energy, Lone Pair Effect, Bond Pair Effect, Applications of Dipole Moment, Conditions of Hydrogen Bonding, Types of Orbital Overlap, Magnetic Behaviour of Molecules, Paramagnetism, Diamagnetism, Non-Bonding Orbitals, Expanded Octet, Incomplete Octet, Odd Electron Molecules, Born-Haber Cycle, Fajan’s Rule, Limitations of Octet Rule, Limitations of VSEPR Theory, Valence Bond Theory, Molecular Orbital Theory तथा Hybridization की Geometry Prediction।

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