💁 Study Raw
📅 05/06/2026
गैस (Gas):
गैसों में कणों के बीच आकर्षण बल बहुत कम होता है तथा वे स्वतंत्र रूप से गति करते हैं। इनका न आकार निश्चित होता है न आयतन।
तापमान (Temperature):
तापमान बढ़ने पर कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है और पदार्थ एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तित हो सकता है।
दाब (Pressure):
दाब बढ़ाने पर गैसीय कण पास आते हैं और गैस द्रव में परिवर्तित हो सकती है।
अणुओं के बीच कार्य करने वाले आकर्षण बलों को अंतराअणुक बल कहते हैं।
वान डर वाल्स बल (van der Waals Forces)
लंदन बल या विक्षेपण बल (London Dispersion Forces)
द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण (Dipole-Dipole Forces)
द्विध्रुव-प्रेरित द्विध्रुव बल (Dipole-Induced Dipole Forces)
हाइड्रोजन बंधन (Hydrogen Bonding)
जब हाइड्रोजन अत्यधिक विद्युतऋणात्मक तत्व जैसे F, O या N से जुड़ा होता है, तब विशेष प्रकार का आकर्षण उत्पन्न होता है जिसे हाइड्रोजन बंधन कहते हैं।
अंतराअणुक हाइड्रोजन बंधन (Intermolecular Hydrogen Bonding)
अंतराण्विक हाइड्रोजन बंधन (Intramolecular Hydrogen Bonding)
गलन (Melting/Fusion)
हिमीकरण (Freezing/Solidification)
वाष्पीकरण (Vaporisation)
संघनन (Condensation)
उर्ध्वपातन (Sublimation)
निक्षेपण (Deposition)
गलन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Fusion)
वाष्पन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Vaporisation)
गैसों में कण अत्यधिक दूरी पर होते हैं तथा वे निरंतर अनियमित गति करते रहते हैं। इसी कारण गैसें उपलब्ध सम्पूर्ण पात्र को भर देती हैं।
प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को दाब कहते हैं।
दाब का सूत्र:
P = F/A
पृथ्वी के वायुमंडल द्वारा लगाए गए दाब को वायुमंडलीय दाब कहते हैं।
वायुमंडलीय दाब मापने का उपकरण।
तापमान पदार्थ की औसत गतिज ऊर्जा का माप है।
सेल्सियस स्केल (°C)
केल्विन स्केल (K)
फारेनहाइट स्केल (°F)
K = °C + 273.15
गैस द्वारा घेरा गया स्थान।
मोल (Mole) में व्यक्त की जाती है।
स्थिर तापमान पर निश्चित मात्रा की गैस का आयतन दाब के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
P ∝ 1/V
PV = Constant
बॉयल नियम का ग्राफ
स्थिर दाब पर गैस का आयतन परम तापमान के समानुपाती होता है।
V ∝ T
V/T = Constant
V बनाम T → Straight Line
स्थिर आयतन पर गैस का दाब परम तापमान के समानुपाती होता है।
P ∝ T
P/T = Constant
P बनाम T → Straight Line
समान तापमान एवं दाब पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है।
V ∝ n
V/n = Constant
6.022 × 10²³ कण प्रति मोल
STP पर 1 मोल आदर्श गैस का आयतन 22.4 L माना जाता है।
P₁V₁/T₁ = P₂V₂/T₂
सभी गैस नियमों को मिलाकर प्राप्त समीकरण।
PV = nRT
जहाँ,
P = Pressure
V = Volume
n = Number of Moles
R = Gas Constant
T = Absolute Temperature
R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹
वह काल्पनिक गैस जो सभी परिस्थितियों में गैस नियमों का पूर्णतः पालन करे।
PV = nRT से
Density = PM/RT
गैसों की विसरण दर उनके घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
r₁/r₂ = √(d₂/d₁)
गैस कणों का स्वतः मिश्रित होना।
छिद्र द्वारा गैस का बाहर निकलना।
यह सिद्धांत गैसों के व्यवहार को सूक्ष्म कणों की गति के आधार पर समझाता है।
गैस कणों की पात्र की दीवारों से टक्कर के कारण दाब उत्पन्न होता है।
KE = 3/2 RT (प्रति मोल)
uᵣₘₛ = √(3RT/M)
uₚ = √(2RT/M)
uₐᵥ = √(8RT/πM)
uᵣₘₛ > uₐᵥ > uₚ
गैस के सभी अणु समान वेग से नहीं चलते बल्कि विभिन्न वेगों का वितरण होता है।
वास्तविक गैसें आदर्श गैस नियमों का पूर्णतः पालन नहीं करती हैं।
कम तापमान पर
अधिक दाब पर
इन परिस्थितियों में अणुओं का आयतन एवं आकर्षण बल महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
Z = PV/nRT
आदर्श गैस के लिए Z = 1
(P + an²/V²)(V − nb) = nRT
a = आकर्षण बल का माप
b = अणुओं के वास्तविक आयतन का माप
गैस को द्रव में बदलने की प्रक्रिया।
उच्च दाब
निम्न तापमान
वह अधिकतम तापमान जिसके ऊपर गैस को द्रव में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।
क्रांतिक ताप पर गैस को द्रवित करने हेतु आवश्यक न्यूनतम दाब।
क्रांतिक अवस्था में गैस का आयतन।
वास्तविक गैसों के व्यवहार का अध्ययन।
द्रवों का आयतन निश्चित होता है लेकिन आकार पात्र के अनुसार बदलता है।
द्रव की सतह से अणुओं का गैस में परिवर्तित होना।
संतुलन अवस्था में वाष्प द्वारा लगाया गया दाब।
जब वाष्प दाब बाहरी दाब के बराबर हो जाता है।
1 atm दाब पर क्वथनांक।
तापमान बढ़ने पर द्रव फैलते हैं।
द्रव की सतह का न्यूनतम क्षेत्रफल बनाए रखने का गुण।
असंतुलित अंतराअणुक आकर्षण बल।
संकीर्ण नलिका में द्रव का ऊपर या नीचे उठना।
भिन्न पदार्थों के बीच आकर्षण बल।
समान पदार्थ के अणुओं के बीच आकर्षण बल।
द्रव के प्रवाह का विरोध करने वाला गुण।
श्यानता की मात्रात्मक माप।
श्यानता का व्युत्क्रम।
पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊर्जा।
द्रव को वाष्प में बदलने हेतु आवश्यक ऊष्मा।
सामान्य द्रवों के वाष्पन की एन्थैल्पी और क्वथनांक के बीच संबंध बताता है।
यह अध्याय कक्षा 11 रसायन विज्ञान में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि गैस नियम, गतिज सिद्धांत, वास्तविक गैसें, वान डर वाल्स समीकरण, गैसों का द्रवीकरण, वाष्प दाब, पृष्ठ तनाव, केशिकत्व तथा श्यानता जैसे विषय आगे की भौतिक रसायन (Physical Chemistry) की नींव बनाते हैं।
पदार्थ (Matter) वह वस्तु है जिसमें द्रव्यमान (Mass) होता है और जो स्थान (Space) घेरती है। हमारे चारों ओर उपस्थित सभी वस्तुएँ पदार्थ से बनी हैं। पदार्थ मुख्यतः ठोस (Solid), द्रव (Liquid) और गैस (Gas) अवस्थाओं में पाया जाता है। इन अवस्थाओं में अंतर कणों की व्यवस्था, कणों के बीच आकर्षण बल तथा उनकी गतिज ऊर्जा के कारण होता है।
पदार्थ अत्यंत सूक्ष्म कणों से बना होता है। ये कण निरंतर गति करते रहते हैं। कणों के बीच रिक्त स्थान होता है तथा उनके बीच आकर्षण बल भी पाया जाता है। तापमान बढ़ाने पर कणों की गति बढ़ जाती है।
ठोस में कण अत्यधिक निकट होते हैं। आकर्षण बल बहुत अधिक होता है तथा कण केवल अपने स्थान पर कंपन करते हैं। इसलिए ठोस का आकार और आयतन दोनों निश्चित होते हैं।
विशेषताएँ
द्रव में कण ठोस की तुलना में कुछ दूरी पर होते हैं। आकर्षण बल मध्यम होता है। कण एक-दूसरे पर फिसल सकते हैं इसलिए द्रव बहते हैं।
विशेषताएँ
गैसों में कणों के बीच बहुत अधिक दूरी होती है। आकर्षण बल लगभग नगण्य होता है। कण स्वतंत्र रूप से सभी दिशाओं में गति करते हैं।
विशेषताएँ
यह पदार्थ की अत्यधिक ऊर्जायुक्त अवस्था है जिसमें आयन और इलेक्ट्रॉन स्वतंत्र रूप से उपस्थित रहते हैं।
उदाहरण
अत्यंत निम्न तापमान पर बनने वाली पदार्थ की विशेष अवस्था।
अणुओं के बीच कार्य करने वाले आकर्षण बलों को अंतराअणुक बल कहते हैं। यही बल पदार्थ की भौतिक अवस्था निर्धारित करते हैं।
अध्रुवीय अणुओं के बीच पाया जाने वाला कमजोर आकर्षण बल।
ध्रुवीय अणुओं के बीच उत्पन्न आकर्षण बल।
जब ध्रुवीय अणु किसी अध्रुवीय अणु में अस्थायी ध्रुवता उत्पन्न करता है।
जब हाइड्रोजन परमाणु F, O या N जैसे अत्यधिक विद्युतऋणात्मक परमाणु से जुड़ा होता है तो विशेष प्रकार का आकर्षण उत्पन्न होता है।
महत्त्व
तापमान किसी पदार्थ के कणों की औसत गतिज ऊर्जा का माप है।
ऊर्जा का वह रूप जो तापांतर के कारण एक वस्तु से दूसरी वस्तु में प्रवाहित होती है।
ठोस का द्रव में परिवर्तित होना।
वह तापमान जिस पर ठोस और द्रव संतुलन में रहते हैं।
द्रव का ठोस में बदलना।
द्रव की सतह से किसी भी तापमान पर वाष्प बनना।
द्रव के पूरे आयतन से वाष्प बनने की प्रक्रिया।
वह तापमान जिस पर द्रव का वाष्प दाब बाहरी दाब के बराबर हो जाता है।
गैस का द्रव में बदलना।
ठोस का सीधे गैस में बदलना।
उदाहरण
गैस का सीधे ठोस में परिवर्तित होना।
अवस्था परिवर्तन के समय अवशोषित या उत्सर्जित ऊष्मा।
गैसें पात्र को पूर्णतः भर देती हैं क्योंकि उनके कण स्वतंत्र रूप से गति करते हैं।
गैसों को आसानी से दबाया जा सकता है क्योंकि कणों के बीच बहुत अधिक रिक्त स्थान होता है।
दो गैसों का स्वतः मिश्रित होना।
छोटे छिद्र से गैस का बाहर निकलना।
गैस के कणों की पात्र की दीवारों से टक्कर के कारण उत्पन्न बल को दाब कहते हैं।
सूत्र
P = F/A
पृथ्वी के वायुमंडल द्वारा लगाया गया दाब।
वायुमंडलीय दाब मापने का उपकरण।
बंद पात्र में गैस का दाब मापने का उपकरण।
स्थिर तापमान पर गैस का आयतन दाब के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
P₁V₁ = P₂V₂
स्थिर दाब पर गैस का आयतन परम तापमान के समानुपाती होता है।
V₁/T₁ = V₂/T₂
-273.15°C वह तापमान जहाँ सैद्धांतिक रूप से गैस का आयतन शून्य हो जाता है।
स्थिर आयतन पर दाब तापमान के समानुपाती होता है।
P₁/T₁ = P₂/T₂
समान तापमान और दाब पर समान आयतन वाली सभी गैसों में अणुओं की संख्या समान होती है।
6.022 × 10²³ mol⁻¹
P₁V₁/T₁ = P₂V₂/T₂
PV = nRT
R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹
काल्पनिक गैस जो सभी गैस नियमों का पूर्ण पालन करती है।
कुल दाब = सभी आंशिक दाबों का योग
Ptotal = P1 + P2 + P3
मिश्रण में किसी गैस द्वारा लगाया गया दाब।
किसी गैस के मोलों का कुल मोलों से अनुपात।
गैसों की विसरण दर घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
यह सिद्धांत गैसों के व्यवहार को सूक्ष्म स्तर पर समझाता है।
KE = 3/2 RT
uᵣₘₛ = √3RT/M
uₚ = √2RT/M
uₐᵥ = √8RT/πM
गैस अणुओं की विभिन्न वेगों की सांख्यिकीय वितरण वक्र।
वास्तविक गैसें आदर्श गैस नियमों का पूर्ण पालन नहीं करतीं।
Z = PV/nRT
(P + an²/V²)(V − nb) = nRT
a = आकर्षण बल सुधार
b = आयतन सुधार
उच्च दाब से निम्न दाब पर गैस के प्रसार के दौरान तापमान परिवर्तन।
जिस तापमान पर जूल-थॉमसन प्रभाव की दिशा बदल जाती है।
गैसों के औद्योगिक द्रवीकरण की विधि।
द्रव में कण गैसों की तुलना में पास-पास होते हैं लेकिन स्थिर नहीं रहते।
संतुलन पर वाष्प द्वारा लगाया गया दाब।
वाष्प दाब और तापमान के बीच संबंध बताती है।
जब वाष्प दाब बाहरी दाब के बराबर हो जाता है।
1 atm दाब पर क्वथनांक।
द्रव की सतह का क्षेत्रफल न्यूनतम रखने की प्रवृत्ति।
नई सतह बनाने हेतु आवश्यक ऊर्जा।
संकीर्ण नलिका में द्रव का ऊपर या नीचे उठना।
समान अणुओं के बीच आकर्षण।
भिन्न अणुओं के बीच आकर्षण।
द्रव और ठोस सतह के बीच बना कोण।
द्रव की वक्र सतह।
द्रव के प्रवाह का विरोध करने वाला गुण।
श्यानता की मात्रात्मक माप।
श्यानता का व्युत्क्रम।
द्रव की परतों के बीच घर्षण बल और वेग प्रवणता का संबंध बताता है।
द्रव को गैस में बदलने हेतु आवश्यक ऊर्जा।
सामान्य द्रवों के लिए वाष्पन एन्थैल्पी और क्वथनांक के बीच संबंध।
Boyle’s Law: P₁V₁ = P₂V₂
Charles’ Law: V₁/T₁ = V₂/T₂
Gay-Lussac’s Law: P₁/T₁ = P₂/T₂
Combined Law: P₁V₁/T₁ = P₂V₂/T₂
Ideal Gas Equation: PV = nRT
Density Equation: d = PM/RT
Dalton Law: Ptotal = P1 + P2 + P3
Compressibility Factor: Z = PV/nRT
van der Waals Equation: (P + an²/V²)(V − nb) = nRT
Graham Law: r₁/r₂ = √(d₂/d₁)
RMS Velocity: uᵣₘₛ = √3RT/M
यह लगभग पूरा अध्याय कवर करता है, जिसमें NCERT के सभी मुख्य एवं सूक्ष्म (minor) टॉपिक्स जैसे Intermolecular Forces, Hydrogen Bonding, Thermal Energy, Dalton’s Law, Mole Fraction, Maxwell Distribution, Joule-Thomson Effect, Inversion Temperature, Linde Process, Clausius-Clapeyron Equation, Contact Angle, Meniscus, Surface Energy आदि भी शामिल हैं, जो अक्सर छात्रों द्वारा छूट जाते हैं।
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| University Name | Syllabus |
|---|---|
| BRABU Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| LNMU Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| TMBU Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| VKSU Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| BNMU Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Jai Prakash Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Patliputra University BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Purnea University BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Magadh University BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Munger University BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Patna University BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
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