किसी भी देश की वास्तविक शक्ति उसकी जनसंख्या होती है। यदि देश के लोग शिक्षित, स्वस्थ, प्रशिक्षित और कुशल हैं तो वे देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। लेकिन यदि लोग अशिक्षित, बीमार और बेरोजगार हों तो वही जनसंख्या देश पर बोझ बन सकती है। इसलिए जनसंख्या को एक मूल्यवान संसाधन में बदलने की प्रक्रिया को मानव संसाधन विकास कहा जाता है।
इस अध्याय में हम जानेंगे कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, रोजगार तथा मानव पूंजी निर्माण किस प्रकार किसी देश के आर्थिक विकास को प्रभावित करते हैं।
मानव संसाधन से तात्पर्य उन लोगों से है जो अपनी शारीरिक एवं मानसिक क्षमता, ज्ञान, कौशल और अनुभव का उपयोग करके उत्पादन कार्यों में भाग लेते हैं तथा देश के आर्थिक विकास में योगदान देते हैं।
| जनसंख्या | मानव संसाधन |
|---|---|
| केवल लोगों की संख्या | शिक्षित, स्वस्थ और कुशल लोग |
| मात्र संख्या पर आधारित | गुणवत्ता पर आधारित |
| बोझ भी बन सकती है | विकास का आधार बनती है |
मनुष्य अन्य संसाधनों की तरह जन्म से संसाधन नहीं होता। शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुभव के द्वारा वह संसाधन बनता है।
एक बच्चा जन्म के समय केवल जनसंख्या का हिस्सा होता है। जब वह शिक्षा प्राप्त करता है, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, किसान या वैज्ञानिक बनता है, तब वह मानव संसाधन कहलाता है।
इसीलिए कहा जाता है कि मनुष्य स्वयं में एक संसाधन है और अन्य संसाधनों का निर्माता भी है।
जब किसी व्यक्ति के ज्ञान, कौशल, स्वास्थ्य और अनुभव के कारण उसकी उत्पादक क्षमता बढ़ती है, तो उसे मानव पूंजी कहा जाता है।
जब सरकार या व्यक्ति शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशिक्षण पर खर्च करके लोगों की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं तो इसे मानव पूंजी निर्माण कहा जाता है।
शिक्षा लोगों को ज्ञान और कौशल प्रदान करती है।
स्वस्थ व्यक्ति अधिक समय तक और अधिक दक्षता से काम कर सकता है।
विशेष कार्यों के लिए कौशल प्रदान किया जाता है।
नई तकनीक और नए विचार विकसित किए जाते हैं।
जानकारी तक पहुँच बढ़ती है।
शिक्षा मानव विकास का सबसे महत्वपूर्ण साधन है।
बुनियादी शिक्षा प्रदान करती है।
व्यक्तित्व और विषयगत ज्ञान विकसित करती है।
विशेषज्ञता प्रदान करती है।
रोजगार से जुड़ी कौशल शिक्षा प्रदान करती है।
पढ़ने और लिखने की क्षमता।
कुल जनसंख्या में साक्षर लोगों का प्रतिशत।
बीच में पढ़ाई छोड़ देने वाले छात्रों का प्रतिशत।
विद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्रों का प्रतिशत।
स्वास्थ्य मानव पूंजी का एक महत्वपूर्ण घटक है।
स्वस्थ व्यक्ति कम बीमार पड़ता है, इसलिए उसका कार्य समय कम नष्ट होता है और उत्पादन बढ़ता है।
रोगों को रोकने के लिए।
उदाहरण:
बीमारी का इलाज करने के लिए।
उदाहरण:
रोग के बाद सामान्य जीवन में लौटने में सहायता।
पोषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होते हैं।
जब शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता।
एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या पर जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या।
एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या पर मृत्यु की संख्या।
एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर।
किसी व्यक्ति के औसत जीवनकाल की अपेक्षित अवधि।
आज केवल डिग्री होना पर्याप्त नहीं है। रोजगार प्राप्त करने के लिए कौशल भी आवश्यक है।
काम करने वाले और काम खोजने वाले लोगों का समूह श्रम शक्ति कहलाता है।
वे लोग जो वास्तव में उत्पादन या सेवाओं से जुड़े कार्य कर रहे हैं।
सामान्यतः 15–59 वर्ष या 15–64 वर्ष।
कार्य करने योग्य आयु वर्ग में श्रम शक्ति का प्रतिशत।
जब कोई व्यक्ति आय प्राप्त करने के उद्देश्य से कार्य करता है तो उसे रोजगार कहते हैं।
व्यक्ति स्वयं का व्यवसाय करता है।
उदाहरण:
मासिक वेतन प्राप्त करना।
दैनिक मजदूरी पर आधारित कार्य।
जब कोई व्यक्ति काम करने के लिए तैयार और योग्य हो लेकिन उसे काम न मिले तो उसे बेरोजगार कहा जाता है।
काम बिल्कुल न मिलना।
साल के कुछ महीनों में ही रोजगार मिलना।
जरूरत से अधिक लोगों का एक ही कार्य में लगे होना।
शिक्षित लोगों को नौकरी न मिलना।
अर्थव्यवस्था में बदलाव के कारण रोजगार समाप्त होना।
मशीनों के कारण रोजगार कम होना।
नौकरी बदलने के दौरान अस्थायी बेरोजगारी।
आर्थिक मंदी के कारण बेरोजगारी।
महिलाओं का आय अर्जित करने वाली गतिविधियों में भाग लेना आर्थिक भागीदारी कहलाता है।
यह वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से लोगों की क्षमता, ज्ञान, स्वास्थ्य और कौशल का विकास किया जाता है।
किसी देश के विकास को मापने वाला सूचकांक।
यह केवल आर्थिक विकास नहीं बल्कि मानव विकास को भी दर्शाता है।
जब उच्च शिक्षित और कुशल लोग अपने देश को छोड़कर दूसरे देशों में काम करने चले जाते हैं, तो इसे ब्रेन ड्रेन कहते हैं।
जब किसी देश की बड़ी जनसंख्या कार्यशील आयु वर्ग में होती है, तो वह आर्थिक विकास का अवसर बन जाती है।
भारत को वर्तमान में विश्व के सबसे बड़े जनसांख्यिकीय लाभांश वाले देशों में माना जाता है।
भारत सरकार द्वारा युवाओं को रोजगार योग्य बनाने के लिए शुरू किया गया कार्यक्रम।
मानव संसाधन किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, प्रशिक्षण, कौशल विकास, रोजगार और महिलाओं की भागीदारी मानव संसाधन विकास के प्रमुख आधार हैं। यदि किसी देश की जनसंख्या को उचित अवसर और संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ, तो वही जनसंख्या देश के आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और राष्ट्रीय समृद्धि का आधार बन जाती है। इसलिए कहा जाता है कि “लोग केवल जनसंख्या नहीं, बल्कि राष्ट्र की सबसे मूल्यवान संपत्ति हैं।”
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