Class 9 अर्थशास्त्र Ch-2 मानव संसाधन के रूप में लोग

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📅 04/06/2026

2. People as Resource (मानव संसाधन के रूप में लोग)

अध्याय का परिचय

किसी भी देश की वास्तविक शक्ति उसकी जनसंख्या होती है। यदि देश के लोग शिक्षित, स्वस्थ, प्रशिक्षित और कुशल हैं तो वे देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। लेकिन यदि लोग अशिक्षित, बीमार और बेरोजगार हों तो वही जनसंख्या देश पर बोझ बन सकती है। इसलिए जनसंख्या को एक मूल्यवान संसाधन में बदलने की प्रक्रिया को मानव संसाधन विकास कहा जाता है।

इस अध्याय में हम जानेंगे कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, रोजगार तथा मानव पूंजी निर्माण किस प्रकार किसी देश के आर्थिक विकास को प्रभावित करते हैं।

1. मानव संसाधन का अर्थ (Meaning of Human Resource)

मानव संसाधन से तात्पर्य उन लोगों से है जो अपनी शारीरिक एवं मानसिक क्षमता, ज्ञान, कौशल और अनुभव का उपयोग करके उत्पादन कार्यों में भाग लेते हैं तथा देश के आर्थिक विकास में योगदान देते हैं।

मानव संसाधन क्यों महत्वपूर्ण है?

  • मनुष्य ही अन्य सभी संसाधनों का उपयोग करता है।
  • मनुष्य नए संसाधनों की खोज करता है।
  • विज्ञान एवं तकनीक का विकास मनुष्य ही करता है।
  • उत्पादन, वितरण और उपभोग की सभी गतिविधियों में मनुष्य की भूमिका होती है।

जनसंख्या और मानव संसाधन में अंतर

जनसंख्यामानव संसाधन
केवल लोगों की संख्याशिक्षित, स्वस्थ और कुशल लोग
मात्र संख्या पर आधारितगुणवत्ता पर आधारित
बोझ भी बन सकती हैविकास का आधार बनती है

2. मानव को संसाधन क्यों कहा जाता है?

मनुष्य अन्य संसाधनों की तरह जन्म से संसाधन नहीं होता। शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुभव के द्वारा वह संसाधन बनता है।

उदाहरण

एक बच्चा जन्म के समय केवल जनसंख्या का हिस्सा होता है। जब वह शिक्षा प्राप्त करता है, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, किसान या वैज्ञानिक बनता है, तब वह मानव संसाधन कहलाता है।

इसीलिए कहा जाता है कि मनुष्य स्वयं में एक संसाधन है और अन्य संसाधनों का निर्माता भी है।

3. मानव पूंजी (Human Capital)

जब किसी व्यक्ति के ज्ञान, कौशल, स्वास्थ्य और अनुभव के कारण उसकी उत्पादक क्षमता बढ़ती है, तो उसे मानव पूंजी कहा जाता है।

मानव पूंजी की विशेषताएँ

  • यह दिखाई नहीं देती।
  • इसे खरीदा या बेचा नहीं जा सकता।
  • शिक्षा और प्रशिक्षण से बढ़ती है।
  • देश की आय बढ़ाने में सहायता करती है।

मानव पूंजी के घटक

  1. शिक्षा
  2. स्वास्थ्य
  3. तकनीकी ज्ञान
  4. कौशल
  5. अनुभव
  6. नवाचार क्षमता

4. मानव पूंजी निर्माण (Human Capital Formation)

जब सरकार या व्यक्ति शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशिक्षण पर खर्च करके लोगों की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं तो इसे मानव पूंजी निर्माण कहा जाता है।

मानव पूंजी निर्माण में निवेश के क्षेत्र

शिक्षा में निवेश

शिक्षा लोगों को ज्ञान और कौशल प्रदान करती है।

स्वास्थ्य में निवेश

स्वस्थ व्यक्ति अधिक समय तक और अधिक दक्षता से काम कर सकता है।

प्रशिक्षण में निवेश

विशेष कार्यों के लिए कौशल प्रदान किया जाता है।

अनुसंधान एवं विकास

नई तकनीक और नए विचार विकसित किए जाते हैं।

सूचना एवं संचार

जानकारी तक पहुँच बढ़ती है।

5. शिक्षा का महत्व (Importance of Education)

शिक्षा मानव विकास का सबसे महत्वपूर्ण साधन है।

शिक्षा के आर्थिक लाभ

  • रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
  • आय में वृद्धि होती है।
  • उत्पादन क्षमता बढ़ती है।
  • गरीबी कम होती है।

शिक्षा के सामाजिक लाभ

  • सामाजिक जागरूकता बढ़ती है।
  • अपराध कम होते हैं।
  • लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलता है।
  • लोकतंत्र मजबूत होता है।

शिक्षा के राजनीतिक लाभ

  • नागरिक अपने अधिकारों को समझते हैं।
  • मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
  • भ्रष्टाचार कम करने में सहायता मिलती है।

6. शिक्षा के स्तर (Levels of Education)

प्राथमिक शिक्षा

बुनियादी शिक्षा प्रदान करती है।

माध्यमिक शिक्षा

व्यक्तित्व और विषयगत ज्ञान विकसित करती है।

उच्च शिक्षा

विशेषज्ञता प्रदान करती है।

तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा

रोजगार से जुड़ी कौशल शिक्षा प्रदान करती है।

7. शिक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाएँ

साक्षरता (Literacy)

पढ़ने और लिखने की क्षमता।

साक्षरता दर

कुल जनसंख्या में साक्षर लोगों का प्रतिशत।

ड्रॉपआउट दर

बीच में पढ़ाई छोड़ देने वाले छात्रों का प्रतिशत।

नामांकन दर

विद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्रों का प्रतिशत।

8. स्वास्थ्य का महत्व (Importance of Health)

स्वास्थ्य मानव पूंजी का एक महत्वपूर्ण घटक है।

स्वास्थ्य क्यों आवश्यक है?

  • स्वस्थ व्यक्ति अधिक कार्य करता है।
  • कार्यक्षमता बढ़ती है।
  • उत्पादन में वृद्धि होती है।
  • आय बढ़ती है।

स्वास्थ्य और उत्पादकता का संबंध

स्वस्थ व्यक्ति कम बीमार पड़ता है, इसलिए उसका कार्य समय कम नष्ट होता है और उत्पादन बढ़ता है।

9. स्वास्थ्य सेवाएँ (Health Services)

निवारक स्वास्थ्य सेवाएँ

रोगों को रोकने के लिए।

उदाहरण:

  • टीकाकरण
  • स्वच्छता अभियान

उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवाएँ

बीमारी का इलाज करने के लिए।

उदाहरण:

  • अस्पताल
  • दवाइयाँ

पुनर्वास सेवाएँ

रोग के बाद सामान्य जीवन में लौटने में सहायता।

10. पोषण (Nutrition)

पोषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होते हैं।

प्रमुख पोषक तत्व

  • कार्बोहाइड्रेट
  • प्रोटीन
  • वसा
  • विटामिन
  • खनिज लवण
  • जल

कुपोषण

जब शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता।

कुपोषण के प्रभाव

  • शारीरिक कमजोरी
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी
  • मानसिक विकास में बाधा

11. स्वास्थ्य संकेतक (Health Indicators)

जन्म दर

एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या पर जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या।

मृत्यु दर

एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या पर मृत्यु की संख्या।

शिशु मृत्यु दर

एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर।

जीवन प्रत्याशा

किसी व्यक्ति के औसत जीवनकाल की अपेक्षित अवधि।

12. प्रशिक्षण और कौशल विकास (Skill Development)

आज केवल डिग्री होना पर्याप्त नहीं है। रोजगार प्राप्त करने के लिए कौशल भी आवश्यक है।

कौशल विकास के उद्देश्य

  • रोजगार क्षमता बढ़ाना
  • उत्पादन बढ़ाना
  • तकनीकी दक्षता बढ़ाना
  • स्वरोजगार को बढ़ावा देना

कौशल के प्रकार

हार्ड स्किल
  • कंप्यूटर
  • मशीन संचालन
  • प्रोग्रामिंग
सॉफ्ट स्किल
  • संचार कौशल
  • नेतृत्व क्षमता
  • समय प्रबंधन
  • टीमवर्क

13. श्रम शक्ति (Labour Force)

काम करने वाले और काम खोजने वाले लोगों का समूह श्रम शक्ति कहलाता है।

श्रम शक्ति में शामिल

  • नौकरी करने वाले लोग
  • रोजगार खोजने वाले लोग

शामिल नहीं

  • छोटे बच्चे
  • पूर्णकालिक विद्यार्थी
  • वृद्ध व्यक्ति
  • गृहिणियाँ (यदि आर्थिक गतिविधि में भाग नहीं लेतीं)

14. कार्यशील जनसंख्या (Working Population)

वे लोग जो वास्तव में उत्पादन या सेवाओं से जुड़े कार्य कर रहे हैं।

कार्यशील आयु वर्ग

सामान्यतः 15–59 वर्ष या 15–64 वर्ष।

15. श्रम भागीदारी दर (Labour Force Participation Rate)

कार्य करने योग्य आयु वर्ग में श्रम शक्ति का प्रतिशत।

महत्व

  • रोजगार की स्थिति बताता है।
  • आर्थिक गतिविधियों का स्तर दर्शाता है।

16. रोजगार (Employment)

जब कोई व्यक्ति आय प्राप्त करने के उद्देश्य से कार्य करता है तो उसे रोजगार कहते हैं।

रोजगार के प्रकार

स्वरोजगार

व्यक्ति स्वयं का व्यवसाय करता है।

उदाहरण:

  • किसान
  • दुकानदार
नियमित वेतनभोगी रोजगार

मासिक वेतन प्राप्त करना।

अस्थायी रोजगार

दैनिक मजदूरी पर आधारित कार्य।

17. रोजगार के क्षेत्र (Sectors of Employment)

प्राथमिक क्षेत्र

  • कृषि
  • पशुपालन
  • मत्स्य पालन

द्वितीयक क्षेत्र

  • उद्योग
  • निर्माण कार्य

तृतीयक क्षेत्र

  • बैंकिंग
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • परिवहन

चतुर्थक क्षेत्र (Quaternary Sector)

  • अनुसंधान
  • सूचना प्रौद्योगिकी
  • डेटा विश्लेषण

18. बेरोजगारी (Unemployment)

जब कोई व्यक्ति काम करने के लिए तैयार और योग्य हो लेकिन उसे काम न मिले तो उसे बेरोजगार कहा जाता है।

19. बेरोजगारी के प्रकार (Types of Unemployment)

खुली बेरोजगारी

काम बिल्कुल न मिलना।

मौसमी बेरोजगारी

साल के कुछ महीनों में ही रोजगार मिलना।

प्रच्छन्न बेरोजगारी

जरूरत से अधिक लोगों का एक ही कार्य में लगे होना।

शिक्षित बेरोजगारी

शिक्षित लोगों को नौकरी न मिलना।

संरचनात्मक बेरोजगारी

अर्थव्यवस्था में बदलाव के कारण रोजगार समाप्त होना।

तकनीकी बेरोजगारी

मशीनों के कारण रोजगार कम होना।

घर्षणात्मक बेरोजगारी

नौकरी बदलने के दौरान अस्थायी बेरोजगारी।

चक्रीय बेरोजगारी

आर्थिक मंदी के कारण बेरोजगारी।

20. बेरोजगारी के कारण

  • तीव्र जनसंख्या वृद्धि
  • रोजगार के अवसरों की कमी
  • कृषि पर अत्यधिक निर्भरता
  • तकनीकी परिवर्तन
  • शिक्षा और उद्योग में असंतुलन
  • पूंजी की कमी
  • कौशल की कमी
  • क्षेत्रीय असमानताएँ

21. बेरोजगारी के प्रभाव

आर्थिक प्रभाव

  • आय में कमी
  • गरीबी में वृद्धि
  • उत्पादन में कमी

सामाजिक प्रभाव

  • अपराध में वृद्धि
  • सामाजिक तनाव
  • असंतोष

राष्ट्रीय प्रभाव

  • आर्थिक विकास धीमा होना
  • मानव संसाधनों का दुरुपयोग

22. ग्रामीण रोजगार की स्थिति

मुख्य रोजगार

  • कृषि
  • डेयरी
  • पशुपालन
  • मधुमक्खी पालन
  • मत्स्य पालन
  • कुटीर उद्योग

समस्याएँ

  • मौसमी बेरोजगारी
  • प्रच्छन्न बेरोजगारी
  • कम आय

23. शहरी रोजगार की स्थिति

मुख्य रोजगार

  • उद्योग
  • व्यापार
  • आईटी क्षेत्र
  • बैंकिंग
  • परिवहन

समस्याएँ

  • शिक्षित बेरोजगारी
  • अस्थायी रोजगार
  • प्रतिस्पर्धा

24. महिलाओं की आर्थिक भागीदारी

महिलाओं का आय अर्जित करने वाली गतिविधियों में भाग लेना आर्थिक भागीदारी कहलाता है।

महिलाओं का योगदान

  • कृषि
  • उद्योग
  • सेवा क्षेत्र
  • उद्यमिता

चुनौतियाँ

  • वेतन असमानता
  • शिक्षा की कमी
  • सामाजिक बाधाएँ
  • घरेलू जिम्मेदारियाँ

महत्व

  • परिवार की आय बढ़ती है।
  • गरीबी घटती है।
  • देश की GDP बढ़ती है।

25. मानव संसाधन विकास (Human Resource Development)

यह वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से लोगों की क्षमता, ज्ञान, स्वास्थ्य और कौशल का विकास किया जाता है।

HRD के प्रमुख घटक

  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • प्रशिक्षण
  • अनुसंधान
  • तकनीकी विकास
  • नवाचार

26. मानव संसाधन विकास के लाभ

व्यक्ति के लिए

  • बेहतर नौकरी
  • अधिक आय
  • बेहतर जीवन स्तर

समाज के लिए

  • गरीबी में कमी
  • सामाजिक विकास
  • जागरूकता में वृद्धि

राष्ट्र के लिए

  • आर्थिक विकास
  • उत्पादकता में वृद्धि
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार

27. मानव विकास सूचकांक (HDI)

HDI क्या है?

किसी देश के विकास को मापने वाला सूचकांक।

HDI के आधार

  1. शिक्षा
  2. स्वास्थ्य
  3. आय

महत्व

यह केवल आर्थिक विकास नहीं बल्कि मानव विकास को भी दर्शाता है।

28. Brain Drain (प्रतिभा पलायन)

जब उच्च शिक्षित और कुशल लोग अपने देश को छोड़कर दूसरे देशों में काम करने चले जाते हैं, तो इसे ब्रेन ड्रेन कहते हैं।

कारण

  • अधिक वेतन
  • बेहतर सुविधाएँ
  • शोध के अवसर

प्रभाव

  • देश में प्रतिभाओं की कमी

29. Demographic Dividend (जनसांख्यिकीय लाभांश)

जब किसी देश की बड़ी जनसंख्या कार्यशील आयु वर्ग में होती है, तो वह आर्थिक विकास का अवसर बन जाती है।

भारत को वर्तमान में विश्व के सबसे बड़े जनसांख्यिकीय लाभांश वाले देशों में माना जाता है।

30. Skill India Mission और कौशल भारत

भारत सरकार द्वारा युवाओं को रोजगार योग्य बनाने के लिए शुरू किया गया कार्यक्रम।

उद्देश्य

  • कौशल प्रशिक्षण
  • रोजगार सृजन
  • स्वरोजगार को बढ़ावा

31. अध्याय का निष्कर्ष

मानव संसाधन किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, प्रशिक्षण, कौशल विकास, रोजगार और महिलाओं की भागीदारी मानव संसाधन विकास के प्रमुख आधार हैं। यदि किसी देश की जनसंख्या को उचित अवसर और संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ, तो वही जनसंख्या देश के आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और राष्ट्रीय समृद्धि का आधार बन जाती है। इसलिए कहा जाता है कि “लोग केवल जनसंख्या नहीं, बल्कि राष्ट्र की सबसे मूल्यवान संपत्ति हैं।”

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