Class 9 भूगोल Ch-2 भारत का भौतिक स्वरूप

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📅 02/06/2026

2. भारत का भौतिक स्वरूप (Physical Features of India)

भारत का भौतिक स्वरूप अत्यंत विविधतापूर्ण है। यहाँ ऊँचे पर्वत, विशाल मैदान, विस्तृत पठार, तटीय मैदान तथा द्वीप समूह पाए जाते हैं। भारत की वर्तमान भू-आकृति करोड़ों वर्षों तक चली भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का परिणाम है। NCERT में भारत के भौतिक स्वरूप को समझने के लिए प्लेट टेक्टोनिक सिद्धांत, पर्वत निर्माण, हिमालय, मैदान, पठार, तटीय क्षेत्र और द्वीपों का अध्ययन किया जाता है।

1. भारत की भूवैज्ञानिक संरचना एवं विकास

आज का भारत करोड़ों वर्षों की भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का परिणाम है।

पृथ्वी की आयु लगभग 4.6 अरब वर्ष मानी जाती है। इस लंबे समय में पृथ्वी की सतह पर अनेक परिवर्तन हुए। पर्वत बने, समुद्र बने और समाप्त हुए, महाद्वीप टूटे और स्थान बदलते रहे।

भारत का वर्तमान स्वरूप भी इसी भूवैज्ञानिक विकास का परिणाम है।

पैंजिया (Pangaea)

लगभग 20 करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी पर केवल एक विशाल महाद्वीप था जिसे पैंजिया कहा जाता था।

पैंजिया दो भागों में विभाजित हुआ—

लॉरेशिया (Laurasia)

उत्तरी भाग, जिसमें वर्तमान एशिया, यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका शामिल थे।

गोंडवानालैंड (Gondwanaland)

दक्षिणी भाग, जिसमें वर्तमान भारत, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका तथा अंटार्कटिका शामिल थे।

टेथिस सागर (Tethys Sea)

लॉरेशिया और गोंडवानालैंड के बीच स्थित विशाल समुद्र को टेथिस सागर कहा जाता था। आज के हिमालय का निर्माण इसी समुद्र की तलछटों से हुआ है।

2. भारत की भूवैज्ञानिक यात्रा

भारत पहले गोंडवानालैंड का हिस्सा था।

लगभग 13 से 14 करोड़ वर्ष पहले भारतीय प्लेट अलग हुई और उत्तर दिशा की ओर बढ़ने लगी। यह प्लेट लगभग 15 से 20 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की गति से आगे बढ़ी।

लगभग 5 करोड़ वर्ष पहले भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकरा गई। इस टक्कर के कारण टेथिस सागर बंद हो गया, उसकी तलछट ऊपर उठ गई और हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ।

यह प्रक्रिया आज भी जारी है। इसी कारण हिमालय धीरे-धीरे ऊँचा हो रहा है और यह क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से सक्रिय माना जाता है।

3. प्लेट टेक्टोनिक सिद्धांत

पृथ्वी की बाहरी कठोर परत कई प्लेटों में विभाजित है। इन्हें टेक्टोनिक प्लेट कहा जाता है।

भारत से संबंधित प्लेट

भारत इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट का हिस्सा है। इसे भारतीय प्लेट और ऑस्ट्रेलियाई प्लेट में भी विभाजित माना जाता है।

प्लेटों की गति के कारण

पृथ्वी के भीतर उपस्थित मैग्मा में संवहन धाराएँ (Convection Currents) उत्पन्न होती हैं। यही धाराएँ प्लेटों को गतिशील बनाती हैं।

प्लेट सीमाओं के प्रकार

अभिसारी सीमा (Convergent Boundary)

दो प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं। इससे पर्वत निर्माण, भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियाँ होती हैं।

अपसारी सीमा (Divergent Boundary)

दो प्लेटें एक-दूसरे से दूर जाती हैं। इससे नई भूपर्पटी का निर्माण होता है।

रूपांतरण सीमा (Transform Boundary)

दो प्लेटें समानांतर दिशा में खिसकती हैं। इससे भूकंप उत्पन्न होते हैं।

4. पर्वत निर्माण प्रक्रिया

जब पृथ्वी की प्लेटें आपस में टकराती हैं तो चट्टानों की परतों में मोड़ पड़ जाते हैं। इस प्रक्रिया से वलित पर्वतों का निर्माण होता है।

वलित पर्वत (Fold Mountains)

हिमालय, आल्प्स तथा एंडीज वलित पर्वतों के प्रमुख उदाहरण हैं।

ब्लॉक पर्वत (Block Mountains)

भ्रंश (Faulting) के कारण निर्मित पर्वतों को ब्लॉक पर्वत कहते हैं।

अवशिष्ट पर्वत (Residual Mountains)

अपरदन और अपक्षय के बाद बची हुई पर्वतीय संरचनाओं को अवशिष्ट पर्वत कहते हैं।

5. हिमालय पर्वत प्रणाली

हिमालय विश्व की सबसे युवा और सबसे ऊँची पर्वत श्रृंखला है।

हिमालय शब्द का अर्थ है—हिम का घर।

यह पश्चिम में सिंधु नदी से पूर्व में ब्रह्मपुत्र नदी तक लगभग 2400 किलोमीटर लंबा है। इसकी चौड़ाई 150 से 400 किलोमीटर तक है।

हिमालय की प्रमुख विशेषताएँ

हिमालय विश्व की नवीनतम वलित पर्वत श्रृंखला है। यहाँ अनेक हिमनद पाए जाते हैं। यह एशिया की प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल है तथा भारतीय उपमहाद्वीप की जलवायु को प्रभावित करता है।

6. हिमालय का निर्माण

लगभग 5 करोड़ वर्ष पूर्व भारतीय प्लेट उत्तर दिशा में बढ़ते हुए यूरेशियन प्लेट से टकराई। दोनों प्लेटों के बीच स्थित टेथिस सागर की तलछटें दबाव के कारण ऊपर उठ गईं और हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ।

यह प्रक्रिया आज भी जारी है और हिमालय प्रतिवर्ष कुछ मिलीमीटर ऊँचा हो रहा है।

7. हिमालय के प्रमुख भाग

महान हिमालय (Himadri)

यह हिमालय की सबसे उत्तरी और सबसे ऊँची श्रेणी है।

इसकी औसत ऊँचाई लगभग 6000 मीटर है। यह वर्षभर बर्फ से ढकी रहती है और अधिकांश हिमनद यहीं पाए जाते हैं।

प्रमुख चोटियाँ:

माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा, मकालू, धौलागिरि, नंगा पर्वत

लघु हिमालय (Himachal)

यह हिमाद्रि के दक्षिण में स्थित है।

इसकी औसत ऊँचाई 3700 से 4500 मीटर के बीच है। अनेक प्रसिद्ध पर्वतीय नगर इसी क्षेत्र में स्थित हैं।

प्रमुख नगर:

शिमला, मसूरी, नैनीताल, दार्जिलिंग

प्रमुख घाटियाँ:

कश्मीर घाटी, कांगड़ा घाटी, कुल्लू घाटी

शिवालिक

यह हिमालय की सबसे दक्षिणी और नवीनतम श्रेणी है।

यह कंकड़, बालू तथा मिट्टी से निर्मित है। इसकी चौड़ाई 10 से 50 किलोमीटर तक होती है।

दून घाटियाँ

शिवालिक और हिमाचल के बीच स्थित घाटियों को दून कहा जाता है।

प्रमुख उदाहरण:

देहरादून, कोटलीदून

8. ट्रांस हिमालय

हिमालय के उत्तर में स्थित पर्वतीय क्षेत्र को ट्रांस हिमालय कहा जाता है।

प्रमुख श्रेणियाँ:

काराकोरम, लद्दाख, जास्कर

सियाचिन हिमनद

यह विश्व का सबसे ऊँचा युद्ध क्षेत्र है और सामरिक दृष्टि से भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

9. हिमालयी दर्रे

पर्वतों के बीच प्राकृतिक मार्ग को दर्रा कहा जाता है।

प्रमुख दर्रे:

जोजिला, नाथूला, शिपकी ला, बोमडिला, रोहतांग, लिपुलेख

ये दर्रे व्यापार, पर्यटन और परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

10. हिमालय की नदी प्रणालियाँ

सिंधु नदी प्रणाली

सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलज

गंगा नदी प्रणाली

गंगा, यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी और सोन

ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली

ब्रह्मपुत्र तिब्बत में त्सांगपो नाम से बहती है और अरुणाचल प्रदेश से भारत में प्रवेश करती है।

11. उत्तरी मैदान

उत्तरी मैदान हिमालयी नदियों द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी से निर्मित विशाल समतल क्षेत्र है।

यह लगभग 2400 किलोमीटर लंबा और 240 से 320 किलोमीटर चौड़ा है।

विशेषताएँ

उपजाऊ मिट्टी, घनी जनसंख्या, विकसित कृषि तथा परिवहन की सुविधा इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं।

12. उत्तरी मैदान के उपविभाग

पंजाब मैदान

सिंधु और उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित।

गंगा मैदान

भारत का सबसे बड़ा और सर्वाधिक उपजाऊ मैदान।

ब्रह्मपुत्र मैदान

असम में स्थित विस्तृत और उपजाऊ मैदान।

13. उत्तरी मैदान की भू-आकृतियाँ

भाबर

हिमालय की तलहटी में कंकड़-पत्थरों का क्षेत्र।

तराई

भाबर के दक्षिण में स्थित दलदली क्षेत्र।

भांगर

पुरानी जलोढ़ मिट्टी से बना क्षेत्र।

खादर

नई जलोढ़ मिट्टी से बना अत्यंत उपजाऊ क्षेत्र।

14. प्रायद्वीपीय पठार

यह भारत का सबसे प्राचीन भूभाग है।

यह कठोर आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों से बना है और खनिज संपदा से समृद्ध है।

प्रमुख विशेषताएँ

त्रिकोणीय आकार, स्थिर भूभाग, खनिजों की प्रचुरता तथा अनेक नदियों का उद्गम।

15. मध्य उच्च भूमि (Central Highlands)

नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित क्षेत्र को मध्य उच्च भूमि कहा जाता है।

इसके प्रमुख भाग हैं—

मालवा पठार, बुंदेलखंड पठार, बघेलखंड पठार तथा छोटानागपुर पठार।

छोटानागपुर पठार

इसे भारत का खनिज भंडार कहा जाता है।

यहाँ कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, अभ्रक तथा मैंगनीज के विशाल भंडार पाए जाते हैं।

16. दक्कन का पठार

नर्मदा नदी के दक्षिण का पठारी भाग दक्कन का पठार कहलाता है।

यह भारत का सबसे बड़ा पठार है।

दक्कन ट्रैप

लाखों वर्ष पूर्व हुए ज्वालामुखीय विस्फोटों से निकले लावा के जमाव से दक्कन ट्रैप का निर्माण हुआ।

काली मिट्टी

यह मिट्टी कपास उत्पादन के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

17. प्रायद्वीपीय पठार की पर्वत श्रेणियाँ

अरावली पर्वतमाला

भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला।

विंध्य पर्वतमाला

उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्राकृतिक विभाजन का कार्य करती है।

सतपुड़ा पर्वतमाला

विंध्य के दक्षिण में स्थित है।

पश्चिमी घाट (सह्याद्रि)

यह अधिक ऊँची और निरंतर पर्वतमाला है।

प्रमुख चोटियाँ:

अनामुडी, डोडाबेट्टा

पूर्वी घाट

यह अपेक्षाकृत कम ऊँची और खंडित पर्वतमाला है।

18. भारतीय मरुस्थल

भारतीय मरुस्थल पश्चिमी राजस्थान में स्थित है।

यहाँ वर्षा बहुत कम होती है और रेतीले टीले पाए जाते हैं।

बर्खान

हवा द्वारा निर्मित अर्धचंद्राकार बालू के टीलों को बर्खान कहा जाता है।

लूनी नदी

मरुस्थल की प्रमुख नदी है।

19. तटीय मैदान

प्रायद्वीपीय पठार और समुद्र के बीच स्थित मैदानों को तटीय मैदान कहा जाता है।

20. पश्चिमी तटीय मैदान

यह अरब सागर और पश्चिमी घाट के बीच स्थित है।

इसके प्रमुख भाग हैं—

कच्छ, काठियावाड़, कोंकण, कन्नड़ और मालाबार तट।

विशेषताएँ

संकीर्ण मैदान, प्राकृतिक बंदरगाह तथा नारियल की खेती।

21. पूर्वी तटीय मैदान

यह बंगाल की खाड़ी और पूर्वी घाट के बीच स्थित है।

इसके प्रमुख भाग हैं—

उत्तरी सरकार तट तथा कोरोमंडल तट।

विशेषताएँ

चौड़ा मैदान, विशाल डेल्टा तथा कृषि के लिए उपयुक्त भूमि।

22. डेल्टा निर्माण

जब नदियाँ समुद्र में मिलने से पहले तलछट जमा करती हैं, तब डेल्टा का निर्माण होता है।

प्रमुख डेल्टा:

गंगा-ब्रह्मपुत्र, महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी डेल्टा।

सुंदरवन डेल्टा

यह विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है।

23. द्वीप समूह

भारत में दो प्रमुख द्वीप समूह पाए जाते हैं।

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

बंगाल की खाड़ी में स्थित।

प्रमुख विशेषताएँ:

572 द्वीप, ज्वालामुखीय उत्पत्ति, घने वन, बैरन द्वीप (सक्रिय ज्वालामुखी)

लक्षद्वीप द्वीप समूह

अरब सागर में स्थित।

प्रमुख विशेषताएँ:

प्रवाल निर्मित द्वीप, लैगून की उपस्थिति, समुद्री जैव विविधता।

24. प्रवाल भित्तियाँ (Coral Reefs)

प्रवाल छोटे समुद्री जीवों द्वारा निर्मित चूना-पत्थर की संरचनाएँ होती हैं।

लक्षद्वीप के अधिकांश द्वीप प्रवाल भित्तियों से बने हैं।

25. भारत के भौतिक स्वरूपों का महत्व

जलवायु पर प्रभाव

हिमालय ठंडी हवाओं को रोकता है तथा मानसूनी वर्षा में सहायता करता है।

कृषि में योगदान

उत्तरी मैदान देश के सबसे उपजाऊ कृषि क्षेत्र हैं।

खनिज संसाधन

प्रायद्वीपीय पठार भारत के प्रमुख खनिज संसाधनों का स्रोत है।

जल संसाधन

हिमालयी नदियाँ वर्षभर जल उपलब्ध कराती हैं।

जैव विविधता

हिमालय, पश्चिमी घाट और द्वीप समूह जैव विविधता के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।

पर्यटन

पर्वत, घाटियाँ, समुद्र तट और द्वीप पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा

हिमालय भारत की प्राकृतिक सीमा बनाकर सुरक्षा प्रदान करता है।

आर्थिक विकास

मैदान कृषि को, पठार उद्योगों को तथा तटीय क्षेत्र व्यापार और बंदरगाहों को बढ़ावा देते हैं।

मानव जीवन पर प्रभाव

भारत के विभिन्न भौतिक स्वरूप लोगों के रहन-सहन, भोजन, कृषि, परिवहन, व्यवसाय तथा संस्कृति को प्रभावित करते हैं।

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