Class 9 भूगोल Ch-5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीवन

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📅 02/06/2026

5. प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीवन (Natural Vegetation and Wildlife)

यह अध्याय भारत में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के वनों, वनस्पतियों, वन्य जीवों तथा उनके संरक्षण से संबंधित है। भारत विश्व के उन देशों में शामिल है जहाँ जलवायु, स्थलाकृति और मिट्टी की विविधता के कारण अत्यंत समृद्ध जैव विविधता पाई जाती है।

1. प्राकृतिक वनस्पति (Natural Vegetation) का अर्थ

किसी क्षेत्र में बिना मानव हस्तक्षेप के प्राकृतिक रूप से उगने वाले पौधों, पेड़ों, झाड़ियों, घासों तथा अन्य वनस्पतियों को प्राकृतिक वनस्पति कहते हैं।

यदि किसी क्षेत्र की मूल वनस्पति को मनुष्य ने नष्ट नहीं किया है और वह अपने प्राकृतिक वातावरण में विकसित हुई है, तो उसे प्राकृतिक वनस्पति कहा जाता है।

प्राकृतिक वनस्पति की विशेषताएँ

  • प्रकृति द्वारा स्वयं विकसित होती है।
  • स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार बढ़ती है।
  • पारिस्थितिकी तंत्र का आधार होती है।
  • वन्य जीवों को आश्रय प्रदान करती है।

वनस्पति (Vegetation) और वन (Forest) में अंतर

वनस्पतिवन
सभी प्रकार के पौधों का समूहपेड़ों से ढका हुआ क्षेत्र
घास, झाड़ियाँ और पेड़ शामिलमुख्य रूप से पेड़ शामिल
व्यापक शब्दवनस्पति का एक भाग

2. भारत में वनस्पति वितरण को प्रभावित करने वाले कारक

भारत में वनस्पति का स्वरूप हर क्षेत्र में अलग दिखाई देता है। इसका कारण विभिन्न भौगोलिक कारक हैं।

(क) जलवायु (Climate)

जलवायु वनस्पति का सबसे महत्वपूर्ण निर्धारक है।

तापमान (Temperature)
  • उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में घने वन विकसित होते हैं।
  • कम तापमान वाले क्षेत्रों में शंकुधारी वन पाए जाते हैं।
वर्षा (Rainfall)

वनों के प्रकार का निर्धारण मुख्य रूप से वर्षा करती है।

वर्षावनस्पति
200 सेमी से अधिकसदाबहार वन
100–200 सेमीआर्द्र पतझड़ी वन
70–100 सेमीशुष्क पतझड़ी वन
70 सेमी से कमकाँटेदार वन
आर्द्रता (Humidity)

अधिक आर्द्रता वाले क्षेत्रों में घने और सदाबहार वन विकसित होते हैं।

(ख) स्थलाकृति (Relief)

ऊँचाई (Altitude)

जैसे-जैसे ऊँचाई बढ़ती है, तापमान कम होता जाता है और वनस्पति बदलती जाती है।

ढाल (Slope)
  • समतल क्षेत्रों में घने वन विकसित होते हैं।
  • तीव्र ढालों पर वन कम विकसित होते हैं।

(ग) मिट्टी (Soil)

मिट्टी में उपस्थित खनिज, नमी और उर्वरता वनस्पति को प्रभावित करते हैं।

(घ) सूर्य का प्रकाश

प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है। इसकी मात्रा पौधों की वृद्धि को प्रभावित करती है।

(ङ) जल उपलब्धता

भूमिगत जल और सतही जल की उपलब्धता भी वनस्पति के विकास को प्रभावित करती है।

3. भारत की प्राकृतिक वनस्पति का वर्गीकरण

भारत की प्राकृतिक वनस्पति को मुख्य रूप से पाँच भागों में बाँटा जाता है—

  1. उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
  2. उष्णकटिबंधीय पतझड़ी वन
  3. काँटेदार वन एवं झाड़ियाँ
  4. पर्वतीय वन
  5. मैंग्रोव वन

4. उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन (Tropical Evergreen Forests)

इन्हें वर्षावन (Rain Forests) भी कहा जाता है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • वर्ष भर हरे रहते हैं।
  • पेड़ एक साथ पत्तियाँ नहीं गिराते।
  • वन अत्यधिक घने होते हैं।
  • सूर्य का प्रकाश भूमि तक मुश्किल से पहुँचता है।
  • जैव विविधता अत्यधिक होती है।

आवश्यक परिस्थितियाँ

  • वर्षा : 200 सेमी से अधिक
  • तापमान : 25°C–27°C
  • आर्द्रता : 70% से अधिक

प्रमुख क्षेत्र

  • पश्चिमी घाट
  • उत्तर-पूर्वी भारत
  • अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

प्रमुख वृक्ष

  • महोगनी
  • आबनूस
  • रोजवुड
  • रबर
  • सिंकोना

महत्व

  • बहुमूल्य लकड़ी
  • औषधीय पौधे
  • जैव विविधता का संरक्षण

समस्याएँ

  • कटाई के कारण तेजी से नष्ट हो रहे हैं।
  • विकास परियोजनाओं से खतरा बढ़ रहा है।

5. उष्णकटिबंधीय पतझड़ी वन (Tropical Deciduous Forests)

भारत के लगभग 70% वन इसी श्रेणी में आते हैं।

प्रमुख विशेषताएँ

  • शुष्क मौसम में पत्तियाँ गिरा देते हैं।
  • मानसूनी वनों के नाम से भी जाने जाते हैं।

(क) आर्द्र पतझड़ी वन (Moist Deciduous Forests)

वर्षा

100–200 सेमी

क्षेत्र
  • झारखंड
  • छत्तीसगढ़
  • ओडिशा
  • पश्चिम बंगाल
  • पश्चिमी घाट के कुछ भाग
वृक्ष
  • साल
  • सागौन
  • शीशम
  • चंदन
  • अर्जुन

(ख) शुष्क पतझड़ी वन (Dry Deciduous Forests)

वर्षा

70–100 सेमी

क्षेत्र
  • मध्य प्रदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार के कुछ भाग
  • दक्कन का पठार
वृक्ष
  • बबूल
  • पलाश
  • नीम
  • खैर

आर्थिक महत्व

  • भवन निर्माण
  • रेलवे स्लीपर
  • फर्नीचर
  • कागज उद्योग

6. काँटेदार वन एवं झाड़ियाँ (Thorn Forests and Scrubs)

प्रमुख विशेषताएँ

  • कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
  • पौधों की पत्तियाँ काँटों में बदल जाती हैं।
  • जड़ें लंबी होती हैं।

अनुकूलन (Adaptations)

लंबी जड़ें

भूमिगत जल प्राप्त करने हेतु।

छोटी पत्तियाँ

जल की हानि कम करने हेतु।

मोटा तना

जल संग्रहण के लिए।

प्रमुख क्षेत्र

  • राजस्थान
  • गुजरात
  • पंजाब
  • हरियाणा

प्रमुख पौधे

  • बबूल
  • कैक्टस
  • खेजड़ी
  • बेर

7. पर्वतीय वन (Montane Forests)

हिमालयी क्षेत्रों में ऊँचाई के अनुसार वनस्पति बदलती रहती है।

1000–2000 मीटर

  • चौड़ी पत्ती वाले वन
  • ओक
  • चेस्टनट

1500–3000 मीटर

शंकुधारी वन
  • देवदार
  • चीड़
  • फर
  • स्प्रूस

3000–4000 मीटर

अल्पाइन वनस्पति
  • छोटी झाड़ियाँ
  • घास

4000 मीटर से ऊपर

  • काई (Moss)
  • लाइकेन (Lichen)

महत्व

  • जल स्रोतों का संरक्षण
  • मिट्टी संरक्षण
  • पर्यटन

8. मैंग्रोव वन (Mangrove Forests)

इन्हें ज्वारीय वन (Tidal Forests) भी कहा जाता है।

विशेषताएँ

  • खारे एवं दलदली क्षेत्रों में विकसित होते हैं।
  • विशेष श्वसन जड़ें होती हैं जिन्हें Pneumatophores कहते हैं।

प्रमुख क्षेत्र

  • सुंदरवन डेल्टा
  • महानदी डेल्टा
  • गोदावरी डेल्टा
  • कृष्णा डेल्टा

प्रमुख वृक्ष

  • सुंदरी
  • गरान
  • केंडल

महत्व

  • समुद्री तूफानों से सुरक्षा
  • तटीय कटाव रोकना
  • मछलियों का प्रजनन क्षेत्र

9. भारत का वन क्षेत्र (Forest Cover in India)

वन सर्वेक्षण के आधार पर वन क्षेत्र को निम्न भागों में बाँटा जाता है—

अत्यधिक घने वन (Very Dense Forest)

70% से अधिक वनावरण।

मध्यम घने वन (Moderately Dense Forest)

40–70% वनावरण।

खुले वन (Open Forest)

10–40% वनावरण।

झाड़ी क्षेत्र (Scrub)

10% से कम वनावरण।

10. वन्य जीवन (Wildlife)

वनों में रहने वाले सभी जीव-जंतु, पक्षी, सरीसृप, उभयचर तथा कीट वन्य जीवन कहलाते हैं।

भारत की विशेषता

भारत विश्व की लगभग 8% जैव विविधता का प्रतिनिधित्व करता है।

प्रमुख वन्य जीव

स्तनधारी
  • बाघ
  • शेर
  • हाथी
  • गैंडा
  • तेंदुआ
  • भालू
पक्षी
  • मोर
  • हॉर्नबिल
  • सारस
  • गिद्ध
सरीसृप
  • मगरमच्छ
  • घड़ियाल
  • अजगर
  • कछुआ

11. जैव विविधता (Biodiversity)

किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले सभी जीवों और वनस्पतियों की विविधता को जैव विविधता कहते हैं।

जैव विविधता के प्रकार

आनुवंशिक विविधता

एक ही प्रजाति के जीवों में अंतर।

प्रजातीय विविधता

विभिन्न प्रजातियों की संख्या।

पारिस्थितिक विविधता

विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों की विविधता।

12. वन और वन्य जीवन का महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
  • कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं।
  • जलवायु संतुलित रखते हैं।
  • वर्षा में सहायता करते हैं।
  • मिट्टी संरक्षण करते हैं।

आर्थिक महत्व

  • लकड़ी
  • कागज
  • औषधियाँ
  • रबर
  • गोंद

सामाजिक महत्व

  • आदिवासी समुदायों का जीवन आधार।
  • सांस्कृतिक महत्व।

13. पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem)

जीवों और उनके पर्यावरण के बीच पारस्परिक संबंधों को पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं।

घटक

जैविक घटक
  • पौधे
  • जानवर
  • सूक्ष्मजीव
अजैविक घटक
  • मिट्टी
  • जल
  • वायु
  • तापमान

14. खाद्य श्रृंखला (Food Chain)

एक जीव से दूसरे जीव तक ऊर्जा के प्रवाह को खाद्य श्रृंखला कहते हैं।

उदाहरण: घास → हिरण → बाघ

15. खाद्य जाल (Food Web)

जब कई खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में जुड़ती हैं तो खाद्य जाल बनता है।

16. वनों का विनाश (Deforestation)

कारण

  • कृषि विस्तार
  • उद्योग
  • शहरीकरण
  • सड़क निर्माण
  • खनन
  • बाँध परियोजनाएँ

परिणाम

  • मृदा अपरदन
  • बाढ़
  • सूखा
  • ग्लोबल वार्मिंग
  • जैव विविधता में कमी

17. वन एवं वन्य जीवन संरक्षण

संरक्षण की आवश्यकता

  • विलुप्त होती प्रजातियों को बचाने के लिए।
  • पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए।
  • भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधन बचाने के लिए।

संरक्षण के प्रकार

In-Situ Conservation

प्राकृतिक आवास में संरक्षण।

  • राष्ट्रीय उद्यान
  • अभयारण्य
  • जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र
Ex-Situ Conservation

प्राकृतिक आवास के बाहर संरक्षण।

  • चिड़ियाघर
  • वनस्पति उद्यान
  • बीज बैंक
  • जीन बैंक

18. राष्ट्रीय उद्यान (National Parks)

राष्ट्रीय उद्यान ऐसे संरक्षित क्षेत्र हैं जहाँ वनस्पति और वन्य जीव दोनों की सुरक्षा की जाती है।

विशेषताएँ

  • शिकार पूर्णतः प्रतिबंधित।
  • वन कटाई प्रतिबंधित।
  • मानव हस्तक्षेप बहुत सीमित।

19. वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuary)

ऐसे क्षेत्र जहाँ मुख्य रूप से वन्य जीवों का संरक्षण किया जाता है।

20. जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserves)

उद्देश्य

  • जैव विविधता संरक्षण
  • अनुसंधान
  • सतत विकास

क्षेत्र

  • Core Zone
  • Buffer Zone
  • Transition Zone

21. संरक्षण परियोजनाएँ

Project Tiger (1973)

बाघों की सुरक्षा के लिए।

Project Elephant

हाथियों के संरक्षण के लिए।

Project Rhino

गैंडों के संरक्षण के लिए।

Crocodile Project

मगरमच्छ संरक्षण के लिए।

Project Snow Leopard

हिम तेंदुए के संरक्षण के लिए।

22. चिपको आंदोलन

1973 में उत्तराखंड में शुरू हुआ।

उद्देश्य

  • पेड़ों को कटने से बचाना।
  • पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना।

23. सामाजिक वानिकी (Social Forestry)

समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए गाँवों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर वृक्षारोपण करना।

24. संयुक्त वन प्रबंधन (Joint Forest Management – JFM)

वन विभाग और स्थानीय लोगों की भागीदारी से वन संरक्षण की योजना।

उद्देश्य

  • वन संरक्षण
  • स्थानीय लोगों की भागीदारी
  • वन संसाधनों का सतत उपयोग

25. परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अंतर

राष्ट्रीय उद्यान बनाम अभयारण्य

राष्ट्रीय उद्यानअभयारण्य
अधिक सुरक्षाअपेक्षाकृत कम सुरक्षा
मानव गतिविधियाँ लगभग निषिद्धसीमित गतिविधियाँ संभव
वनस्पति और जीव दोनों संरक्षितमुख्यतः जीव संरक्षित

अभयारण्य बनाम जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

अभयारण्यजैवमंडल आरक्षित क्षेत्र
छोटा क्षेत्रबड़ा क्षेत्र
वन्य जीव संरक्षणसंपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण
सीमित उद्देश्यसंरक्षण + अनुसंधान + विकास

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