जनसंख्या भूगोल का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इसके अंतर्गत किसी क्षेत्र में रहने वाले लोगों की संख्या, उनका वितरण, घनत्व, आयु, लिंग, शिक्षा, व्यवसाय, जन्म दर, मृत्यु दर, प्रवासन आदि का अध्ययन किया जाता है। जनसंख्या किसी देश के विकास की आधारशिला होती है क्योंकि मानव ही संसाधनों का निर्माण और उपयोग करता है।
किसी निश्चित क्षेत्र में एक निश्चित समय पर रहने वाले लोगों की कुल संख्या को जनसंख्या कहते हैं।
उदाहरण के लिए, भारत में रहने वाले सभी लोगों की कुल संख्या भारत की जनसंख्या कहलाती है।
जनसंख्या भूगोल भूगोल की वह शाखा है जिसमें मानव जनसंख्या के वितरण, संरचना, वृद्धि और विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है।
जनांकिकी वह विज्ञान है जो जनसंख्या के सांख्यिकीय अध्ययन से संबंधित है।
किसी देश की जनसंख्या से संबंधित सभी जानकारियों को व्यवस्थित रूप से एकत्रित करने की प्रक्रिया को जनगणना कहते हैं।
भारत विश्व के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों में शामिल है।
किसी क्षेत्र में जनसंख्या के फैलाव की स्थिति को जनसंख्या वितरण कहते हैं।
जब लोग लगभग समान रूप से फैले हों।
जब कुछ क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक और कुछ में कम हो।
प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में रहने वाले लोगों की संख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं।
जनसंख्या घनत्व = कुल जनसंख्या ÷ कुल क्षेत्रफल
कुल जनसंख्या ÷ कुल क्षेत्रफल
कृषकों की संख्या ÷ कृषि योग्य भूमि
कुल जनसंख्या ÷ कृषि योग्य भूमि
एक निश्चित अवधि में जनसंख्या में होने वाली वृद्धि को जनसंख्या वृद्धि कहते हैं।
जन्म दर मृत्यु दर से अधिक हो।
मृत्यु दर जन्म दर से अधिक हो।
जन्म दर और मृत्यु दर लगभग समान हों।
जनसंख्या की संख्या में समय के साथ होने वाले बदलाव को जनसंख्या परिवर्तन कहते हैं।
प्रति 1000 व्यक्तियों पर एक वर्ष में होने वाले जन्मों की संख्या।
प्रति 1000 व्यक्तियों पर एक वर्ष में होने वाली मृत्यु की संख्या।
एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु की दर।
गर्भावस्था या प्रसव के दौरान महिलाओं की मृत्यु की दर।
किसी व्यक्ति के औसतन कितने वर्ष जीवित रहने की संभावना है, इसे जीवन प्रत्याशा कहते हैं।
जन्म दर और मृत्यु दर के अंतर को प्राकृतिक वृद्धि दर कहते हैं।
प्राकृतिक वृद्धि दर = जन्म दर – मृत्यु दर
जब जनसंख्या अत्यधिक तेजी से बढ़ती है और संसाधन पर्याप्त नहीं रहते, तो उसे जनसंख्या विस्फोट कहते हैं।
जनसंख्या में पुरुषों और महिलाओं की संख्या का अध्ययन लिंग संरचना कहलाता है।
प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या।
0-6 वर्ष आयु वर्ग में प्रति 1000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या।
जनसंख्या को आयु के आधार पर विभिन्न वर्गों में बाँटना।
बाल जनसंख्या
कार्यशील जनसंख्या
वृद्ध जनसंख्या
वे लोग जो आर्थिक रूप से कार्य नहीं करते और दूसरों पर निर्भर रहते हैं।
जो लोग उत्पादन और सेवाओं में योगदान देते हैं।
आश्रित जनसंख्या और कार्यशील जनसंख्या का अनुपात।
आयु और लिंग संरचना को चित्रात्मक रूप में दर्शाने वाला आरेख।
उच्च जन्म दर वाले देश
संतुलित जनसंख्या
कम जन्म दर वाले देश
पढ़ने और लिखने की क्षमता को साक्षरता कहते हैं।
7 वर्ष या उससे अधिक आयु के पढ़ने-लिखने में सक्षम लोगों का प्रतिशत।
जनसंख्या के शैक्षणिक स्तर का अध्ययन।
गाँवों में रहने वाली जनसंख्या।
शहरों में रहने वाली जनसंख्या।
गाँवों से शहरों की ओर जनसंख्या और आर्थिक गतिविधियों का स्थानांतरण।
लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना।
जनसंख्या का विभिन्न व्यवसायों में विभाजन।
कार्यशील जनसंख्या का कुल जनसंख्या में प्रतिशत।
काम करने की इच्छा और क्षमता होने के बावजूद रोजगार न मिलना।
शिक्षित, स्वस्थ और कुशल जनसंख्या को मानव संसाधन कहा जाता है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल पर किया गया निवेश मानव पूंजी कहलाता है।
जनसंख्या तथा संसाधनों के बीच संतुलन किसी देश के विकास के लिए आवश्यक है।
वह स्थिति जहाँ जनसंख्या और संसाधनों के बीच सर्वोत्तम संतुलन हो।
जब संसाधनों की तुलना में जनसंख्या कम हो।
जब जनसंख्या उपलब्ध संसाधनों से अधिक हो जाए।
आर्थिक विकास के साथ जन्म दर और मृत्यु दर में होने वाले परिवर्तन का अध्ययन।
जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने तथा जनसंख्या की गुणवत्ता सुधारने हेतु बनाई गई सरकारी नीति।
परिवार के आकार को नियंत्रित करने और बच्चों के बीच उचित अंतर बनाए रखने की प्रक्रिया।
वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के संसाधनों की रक्षा करना सतत विकास कहलाता है।
विभिन्न धर्मों के लोगों का अनुपात।
विभिन्न भाषाएँ बोलने वाले लोगों का वितरण।
ग्रामीण एवं शहरी जनसंख्या के बीच संबंध।
किसी देश की जनसंख्या को दोगुना होने में लगने वाला समय।
जब कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या अधिक होती है तो आर्थिक विकास की संभावना बढ़ जाती है।
60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की बढ़ती संख्या।
जब जन्म दर और मृत्यु दर लगभग समान हो जाती है तथा जनसंख्या वृद्धि नियंत्रित हो जाती है।
शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और जीवन स्तर के आधार पर जनसंख्या की गुणवत्ता का आकलन किया जाता है।
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