Class 9 इतिहास Ch-2 यूरोप में समाजवाद और रूसी क्रांति

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📅 03/06/2026

अध्याय 2 : यूरोप में समाजवाद और रूसी क्रांति

1. यूरोप में समाजवाद का उदय

18वीं और 19वीं शताब्दी में यूरोप में बड़े-बड़े कारखाने स्थापित होने लगे। मशीनों के कारण उत्पादन बढ़ा, लेकिन समाज में असमानता भी बढ़ गई। औद्योगिक क्रांति ने यूरोप की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया। इसी परिवर्तन के दौरान समाजवाद जैसी नई विचारधाराओं का जन्म हुआ।

औद्योगिक क्रांति से पहले

  • अधिकांश लोग कृषि पर निर्भर थे।
  • उत्पादन घरों और छोटे कार्यशालाओं में होता था।
  • परिवार मिलकर वस्तुएँ बनाते थे।
  • गाँव आर्थिक जीवन का केंद्र थे।
  • समाज अपेक्षाकृत सरल और कृषि आधारित था।

औद्योगिक क्रांति के बाद

  • मशीनों ने हाथ के काम की जगह ले ली।
  • बड़े कारखाने स्थापित हुए।
  • लाखों लोग गाँव छोड़कर शहरों में आ गए।
  • उत्पादन में तेजी से वृद्धि हुई।
  • नए सामाजिक वर्गों का उदय हुआ।

2. औद्योगिक समाज का निर्माण

औद्योगिक क्रांति के बाद समाज में बड़े बदलाव आए। समाज मुख्य रूप से पूँजीपति वर्ग, मध्यम वर्ग और श्रमिक वर्ग में विभाजित हो गया।

पूँजीपति वर्ग

ये कारखानों, मशीनों और उद्योगों के मालिक थे।

विशेषताएँ

  • उत्पादन के साधनों पर अधिकार
  • अधिक लाभ कमाने की इच्छा
  • उद्योगों और व्यापार पर नियंत्रण
  • आर्थिक शक्ति का केंद्रीकरण

समस्याएँ

  • धन कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित हो गया।
  • सामाजिक असमानता बढ़ी।

श्रमिक वर्ग

ये लोग कारखानों, खानों और उद्योगों में काम करते थे।

प्रमुख समस्याएँ

कम मजदूरी

मजदूरों को उनके श्रम के अनुसार उचित वेतन नहीं मिलता था।

अधिक कार्य समय
  • 14 से 16 घंटे तक काम
  • साप्ताहिक अवकाश नहीं
  • विश्राम की कमी
असुरक्षित वातावरण
  • मशीनों से दुर्घटनाएँ
  • स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ
  • सुरक्षा उपायों का अभाव
बेरोजगारी

नई मशीनों के कारण कई श्रमिक बेरोजगार हो गए।

महिलाओं की स्थिति

महिलाओं को भी कारखानों में कार्य करना पड़ता था।

समस्याएँ

  • पुरुषों से कम वेतन
  • अधिक कार्य समय
  • दोहरा कार्यभार

सकारात्मक प्रभाव

  • आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ी
  • राजनीतिक जागरूकता आई
  • महिला अधिकार आंदोलनों को बल मिला

बाल श्रम

औद्योगिक समाज की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक।

बच्चों से काम क्यों कराया जाता था?

  • कम वेतन देना पड़ता था।
  • बच्चों को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता था।
  • संकरी जगहों में कार्य कर सकते थे।

परिणाम

  • शिक्षा से वंचित
  • स्वास्थ्य खराब
  • शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित

शहरीकरण

औद्योगिक क्रांति के बाद शहरों का तेजी से विकास हुआ।

प्रभाव

  • जनसंख्या में वृद्धि
  • झुग्गी-बस्तियों का विकास
  • गंदगी और प्रदूषण
  • अपराध में वृद्धि

3. उदारवाद (Liberalism)

यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विचारधारा थी जिसने यूरोप के विकास को प्रभावित किया।

उदारवाद का अर्थ

उदारवाद व्यक्ति की स्वतंत्रता और समानता पर बल देता है।

मुख्य सिद्धांत

  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
  • प्रेस की स्वतंत्रता
  • समान कानून
  • निजी संपत्ति का अधिकार
  • लोकतांत्रिक शासन

आर्थिक उदारवाद

  • मुक्त व्यापार
  • निजी उद्योगों को प्रोत्साहन
  • सरकार का सीमित हस्तक्षेप

4. समाजवाद का उदय

औद्योगिक समाज में बढ़ती असमानता के विरोध में समाजवाद का विकास हुआ।

समाजवाद क्या है?

समाजवाद ऐसी व्यवस्था है जिसमें उत्पादन के साधनों पर समाज या राज्य का नियंत्रण होता है।

समाजवाद के उद्देश्य

  • आर्थिक समानता
  • सामाजिक न्याय
  • शोषण का अंत
  • सभी के लिए अवसर

5. प्रारम्भिक समाजवादी विचारक

रॉबर्ट ओवेन

रॉबर्ट ओवेन इंग्लैंड के प्रसिद्ध समाज सुधारक थे।

योगदान

  • श्रमिकों के लिए बेहतर आवास
  • बच्चों की शिक्षा
  • बेहतर कार्य परिस्थितियाँ

सेंट साइमन

सेंट साइमन फ्रांस के समाजवादी विचारक थे।

विचार

  • समाज का संचालन विशेषज्ञों द्वारा होना चाहिए।
  • उद्योगों का विकास समाज के हित में होना चाहिए।

चार्ल्स फूरिए

चार्ल्स फूरिए ने सहकारी समुदायों का विचार दिया।

प्रमुख विचार

  • सामूहिक जीवन
  • सामूहिक उत्पादन
  • समान अवसर

लुई ब्लांक

विचार

  • राज्य को रोजगार उपलब्ध कराना चाहिए।
  • सरकार को श्रमिकों की सहायता करनी चाहिए।

6. कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स

कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स आधुनिक समाजवाद और साम्यवाद के प्रमुख विचारक थे।

कार्ल मार्क्स के विचार

मार्क्स ने पूँजीवादी व्यवस्था की आलोचना की।

समाज के दो वर्ग

बुर्जुआ वर्ग
  • पूँजीपति वर्ग
  • उत्पादन के साधनों के मालिक
सर्वहारा वर्ग
  • श्रमिक वर्ग
  • श्रम बेचकर जीविका चलाने वाले

अधिशेष मूल्य का सिद्धांत

मार्क्स के अनुसार मजदूर जितना उत्पादन करता है, उसे उसका पूरा मूल्य नहीं मिलता। शेष लाभ पूँजीपति अपने पास रखता है। इसे अधिशेष मूल्य कहा जाता है।

वर्ग संघर्ष का सिद्धांत

मार्क्स के अनुसार मानव इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है।

विभिन्न युगों में वर्ग संघर्ष

  • स्वामी बनाम दास
  • सामंत बनाम किसान
  • पूँजीपति बनाम मजदूर

कम्युनिस्ट घोषणापत्र (1848)

मार्क्स और एंगेल्स द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तक।

मुख्य विचार

  • पूँजीवाद का अंत
  • मजदूरों की एकता
  • वर्गविहीन समाज की स्थापना

7. रूस की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति

1917 से पहले रूस एक विशाल साम्राज्य था।

रूस की जातीय विविधता

रूस में अनेक समुदाय रहते थे।

  • रूसी
  • यूक्रेनी
  • पोलिश
  • फिनिश
  • जॉर्जियाई
  • आर्मेनियाई

इनकी भाषा, संस्कृति और परंपराएँ अलग-अलग थीं।

8. जार निकोलस द्वितीय का शासन

जार रूस के सम्राट को कहा जाता था।

शासन की विशेषताएँ

  • निरंकुश शासन
  • जनता को राजनीतिक अधिकार नहीं
  • विरोध का दमन
  • प्रेस की स्वतंत्रता का अभाव

ओखराना (गुप्त पुलिस)

  • विरोधियों पर निगरानी
  • क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी
  • राजनीतिक दमन

9. किसान और कृषि व्यवस्था

रूस की अधिकांश आबादी किसान थी।

सर्फडम (Serfdom)

1861 तक किसान लगभग गुलामों की तरह जीवन बिताते थे।

किसानों की समस्याएँ

  • भूमि की कमी
  • भारी कर
  • गरीबी
  • ऋणग्रस्तता

मीर व्यवस्था (Mir)

गाँवों की सामुदायिक संस्था।

कार्य

  • भूमि का बँटवारा
  • कर संग्रह
  • सामुदायिक निर्णय

10. रूस में औद्योगीकरण

1890 के बाद रूस में तेजी से औद्योगिक विकास हुआ।

प्रमुख उद्योग

  • कोयला उद्योग
  • इस्पात उद्योग
  • लौह उद्योग
  • वस्त्र उद्योग

रेलवे का विकास

रेलवे निर्माण से औद्योगिक विकास को गति मिली।

ट्रांस-साइबेरियन रेलवे

  • विश्व की सबसे लंबी रेल परियोजनाओं में से एक
  • रूस के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ती थी

11. रूसी समाजवादी आंदोलन

रूसी सोशल डेमोक्रेटिक वर्कर्स पार्टी

1898 में स्थापित।

1903 का विभाजन

बोल्शेविक

  • नेता: लेनिन
  • अनुशासित क्रांतिकारी संगठन

मेंशेविक

  • नेता: जूलियस मार्टोव
  • व्यापक जनसमर्थन के पक्षधर

12. 1905 की क्रांति

रूस-जापान युद्ध

1904-05 में रूस की हार हुई।

खूनी रविवार (Bloody Sunday)

22 जनवरी 1905 को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई।

फादर गैपोन

  • प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
  • मजदूरों की समस्याएँ जार तक पहुँचाना चाहते थे।

परिणाम

  • देशव्यापी हड़तालें
  • विद्रोह
  • राजनीतिक अस्थिरता

ड्यूमा का गठन

1905 के बाद संसद जैसी संस्था बनाई गई।

सीमाएँ

  • जार के पास अंतिम शक्ति बनी रही।
  • ड्यूमा स्वतंत्र नहीं थी।

13. प्रथम विश्व युद्ध और रूस

1914 में रूस प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हुआ।

युद्ध के प्रभाव

  • लाखों सैनिकों की मृत्यु
  • आर्थिक संकट
  • खाद्यान्न संकट
  • महँगाई
  • जनता में असंतोष

14. फरवरी क्रांति 1917

कारण

  • भोजन की कमी
  • बेरोजगारी
  • महँगाई
  • युद्ध की विफलता

महिलाओं की भूमिका

8 मार्च 1917 को महिलाओं ने रोटी और शांति की माँग करते हुए प्रदर्शन किया।

पेट्रोग्राद में हड़तालें

  • हजारों मजदूर हड़ताल पर चले गए।
  • आंदोलन पूरे शहर में फैल गया।

सेना का विद्रोह

सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया।

जार का पतन

जार निकोलस द्वितीय को सिंहासन छोड़ना पड़ा।

15. दोहरी सत्ता (Dual Power)

फरवरी क्रांति के बाद रूस में दो सत्ता केंद्र बन गए।

अस्थायी सरकार

  • उदारवादी नेताओं द्वारा संचालित

सोवियत

  • मजदूरों और सैनिकों की परिषद

दोनों संस्थाएँ समानांतर रूप से कार्य कर रही थीं।

16. अप्रैल थीसिस

लेनिन ने अप्रैल 1917 में अपने विचार प्रस्तुत किए।

मुख्य नारे

  • शांति
  • भूमि
  • रोटी
  • सारी सत्ता सोवियतों को

17. जुलाई दिवस

जुलाई 1917 में सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन हुए।

परिणाम

  • बोल्शेविकों पर कार्रवाई
  • लेनिन को छिपना पड़ा

18. कोर्निलोव विद्रोह

जनरल कोर्निलोव ने सरकार के विरुद्ध विद्रोह करने का प्रयास किया।

परिणाम

  • विद्रोह विफल हुआ
  • बोल्शेविकों की लोकप्रियता बढ़ी

19. अक्टूबर क्रांति 1917

कारण

  • अस्थायी सरकार की विफलता
  • युद्ध जारी रहना
  • भूमि समस्या का समाधान न होना

प्रमुख घटनाएँ

  • रेलवे स्टेशन पर कब्जा
  • डाकघर पर नियंत्रण
  • टेलीफोन केंद्र पर कब्जा
  • विंटर पैलेस पर हमला

परिणाम

  • अस्थायी सरकार का अंत
  • बोल्शेविक सत्ता की स्थापना

20. क्रांति के बाद के आदेश

भूमि आदेश

जमींदारों की भूमि किसानों में बाँट दी गई।

शांति आदेश

युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए गए।

श्रमिक नियंत्रण आदेश

कारखानों में श्रमिक समितियों का नियंत्रण बढ़ा।

21. गृहयुद्ध (1918-1920)

लाल सेना

  • बोल्शेविक समर्थक

श्वेत सेना

  • जार समर्थक
  • बोल्शेविक विरोधी

विदेशी हस्तक्षेप

  • ब्रिटेन
  • फ्रांस
  • अमेरिका
  • जापान

इन देशों ने श्वेत सेना की सहायता की।

22. ब्रेस्ट-लिटोव्स्क संधि

1918 में रूस और जर्मनी के बीच शांति समझौता हुआ।

परिणाम

  • रूस प्रथम विश्व युद्ध से बाहर हो गया।
  • रूस को कई क्षेत्र छोड़ने पड़े।

23. युद्ध साम्यवाद

गृहयुद्ध के दौरान अपनाई गई नीति।

विशेषताएँ

  • अनाज की जब्ती
  • उद्योगों का राष्ट्रीयकरण
  • राशन व्यवस्था

24. नई आर्थिक नीति (NEP)

1921 में लेनिन द्वारा लागू।

उद्देश्य

अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना।

विशेषताएँ

  • सीमित निजी व्यापार
  • कृषि उत्पादन को बढ़ावा
  • बाजार व्यवस्था में आंशिक वापसी

25. सोवियत संघ (USSR) का गठन

1922 में सोवियत संघ की स्थापना हुई।

प्रमुख गणराज्य

  • रूस
  • यूक्रेन
  • बेलारूस
  • ट्रांसकाकेशिया

26. रूसी क्रांति का वैश्विक प्रभाव

साम्यवाद का प्रसार

रूसी क्रांति ने विश्वभर में समाजवादी आंदोलनों को प्रेरित किया।

उपनिवेशों पर प्रभाव

एशिया और अफ्रीका के स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरणा मिली।

कमिंटर्न (Comintern)

1919 में स्थापित संगठन।

उद्देश्य

विश्वभर में साम्यवादी विचारधारा का प्रसार करना।

27. परीक्षा में अक्सर छूट जाने वाले महत्वपूर्ण छोटे टॉपिक्स

राजनीतिक अवधारणाएँ

  • उदारवाद (Liberalism)
  • रूढ़िवाद (Conservatism)
  • राष्ट्रवाद (Nationalism)

रूसी प्रशासन

  • ओखराना
  • ड्यूमा
  • मीर व्यवस्था
  • ज़ेम्स्त्वो

क्रांति से जुड़े टॉपिक्स

  • फादर गैपोन
  • पेट्रोग्राद सोवियत
  • अप्रैल थीसिस
  • जुलाई दिवस
  • कोर्निलोव विद्रोह
  • ब्रेस्ट-लिटोव्स्क संधि

क्रांति के बाद

  • चेका
  • लाल आतंक
  • युद्ध साम्यवाद
  • नई आर्थिक नीति (NEP)
  • कमिंटर्न

मार्क्सवाद से जुड़े टॉपिक्स

  • बुर्जुआ वर्ग
  • सर्वहारा वर्ग
  • अधिशेष मूल्य
  • वर्ग संघर्ष
  • कम्युनिस्ट घोषणापत्र

सामाजिक विषय

  • महिलाओं की भूमिका
  • बाल श्रम
  • सहकारी आंदोलन
  • ट्रेड यूनियन
  • शहरीकरण
  • औद्योगिक समाज

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