18वीं और 19वीं शताब्दी में यूरोप में बड़े-बड़े कारखाने स्थापित होने लगे। मशीनों के कारण उत्पादन बढ़ा, लेकिन समाज में असमानता भी बढ़ गई। औद्योगिक क्रांति ने यूरोप की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया। इसी परिवर्तन के दौरान समाजवाद जैसी नई विचारधाराओं का जन्म हुआ।
औद्योगिक क्रांति के बाद समाज में बड़े बदलाव आए। समाज मुख्य रूप से पूँजीपति वर्ग, मध्यम वर्ग और श्रमिक वर्ग में विभाजित हो गया।
ये कारखानों, मशीनों और उद्योगों के मालिक थे।
ये लोग कारखानों, खानों और उद्योगों में काम करते थे।
मजदूरों को उनके श्रम के अनुसार उचित वेतन नहीं मिलता था।
नई मशीनों के कारण कई श्रमिक बेरोजगार हो गए।
महिलाओं को भी कारखानों में कार्य करना पड़ता था।
औद्योगिक समाज की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक।
औद्योगिक क्रांति के बाद शहरों का तेजी से विकास हुआ।
यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विचारधारा थी जिसने यूरोप के विकास को प्रभावित किया।
उदारवाद व्यक्ति की स्वतंत्रता और समानता पर बल देता है।
औद्योगिक समाज में बढ़ती असमानता के विरोध में समाजवाद का विकास हुआ।
समाजवाद ऐसी व्यवस्था है जिसमें उत्पादन के साधनों पर समाज या राज्य का नियंत्रण होता है।
रॉबर्ट ओवेन इंग्लैंड के प्रसिद्ध समाज सुधारक थे।
सेंट साइमन फ्रांस के समाजवादी विचारक थे।
चार्ल्स फूरिए ने सहकारी समुदायों का विचार दिया।
कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स आधुनिक समाजवाद और साम्यवाद के प्रमुख विचारक थे।
मार्क्स ने पूँजीवादी व्यवस्था की आलोचना की।
मार्क्स के अनुसार मजदूर जितना उत्पादन करता है, उसे उसका पूरा मूल्य नहीं मिलता। शेष लाभ पूँजीपति अपने पास रखता है। इसे अधिशेष मूल्य कहा जाता है।
मार्क्स के अनुसार मानव इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है।
मार्क्स और एंगेल्स द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तक।
1917 से पहले रूस एक विशाल साम्राज्य था।
रूस में अनेक समुदाय रहते थे।
इनकी भाषा, संस्कृति और परंपराएँ अलग-अलग थीं।
जार रूस के सम्राट को कहा जाता था।
रूस की अधिकांश आबादी किसान थी।
1861 तक किसान लगभग गुलामों की तरह जीवन बिताते थे।
गाँवों की सामुदायिक संस्था।
1890 के बाद रूस में तेजी से औद्योगिक विकास हुआ।
रेलवे निर्माण से औद्योगिक विकास को गति मिली।
1898 में स्थापित।
1904-05 में रूस की हार हुई।
22 जनवरी 1905 को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई।
1905 के बाद संसद जैसी संस्था बनाई गई।
1914 में रूस प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हुआ।
8 मार्च 1917 को महिलाओं ने रोटी और शांति की माँग करते हुए प्रदर्शन किया।
सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया।
जार निकोलस द्वितीय को सिंहासन छोड़ना पड़ा।
फरवरी क्रांति के बाद रूस में दो सत्ता केंद्र बन गए।
दोनों संस्थाएँ समानांतर रूप से कार्य कर रही थीं।
लेनिन ने अप्रैल 1917 में अपने विचार प्रस्तुत किए।
जुलाई 1917 में सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन हुए।
जनरल कोर्निलोव ने सरकार के विरुद्ध विद्रोह करने का प्रयास किया।
जमींदारों की भूमि किसानों में बाँट दी गई।
युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए गए।
कारखानों में श्रमिक समितियों का नियंत्रण बढ़ा।
इन देशों ने श्वेत सेना की सहायता की।
1918 में रूस और जर्मनी के बीच शांति समझौता हुआ।
गृहयुद्ध के दौरान अपनाई गई नीति।
1921 में लेनिन द्वारा लागू।
अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना।
1922 में सोवियत संघ की स्थापना हुई।
रूसी क्रांति ने विश्वभर में समाजवादी आंदोलनों को प्रेरित किया।
एशिया और अफ्रीका के स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरणा मिली।
1919 में स्थापित संगठन।
विश्वभर में साम्यवादी विचारधारा का प्रसार करना।
Study Raw: Education World of India आप सभी Students के सहूलियत के लिए Social Media पर भी सारे Students को Bihar के सारे News से Updated रखते है। आपलोग नीचे दिए किसी भी Social Media से जुर सकते हैं। Follow us with following link mentioned below.
| University Name | Syllabus |
|---|---|
| BRABU Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| LNMU Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| TMBU Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| VKSU Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| BNMU Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Jai Prakash Universit BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Patliputra University BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Purnea University BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Magadh University BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Munger University BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
| Patna University BA BSc BCom Syllabus | Syllabus |
Leave a Reply