Class 9 इतिहास Ch-5 आधुनिक दुनिया में पशुपालक

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📅 03/06/2026

अध्याय 5 : आधुनिक दुनिया में पशुपालक

यह अध्याय बताता है कि पशुपालक समुदाय कौन होते हैं, उनका जीवन कैसे चलता है, वे अपने पशुओं के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान पर क्यों जाते हैं, औपनिवेशिक शासन ने उनके जीवन को कैसे प्रभावित किया और आधुनिक समय में उनके जीवन में क्या परिवर्तन आए हैं। पशुपालक समुदाय सदियों से मानव सभ्यता का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। वे केवल पशु नहीं पालते, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, व्यापार और संस्कृति के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

1. पशुपालक कौन हैं?

पशुपालक (Pastoralists) वे लोग होते हैं जिनकी आजीविका मुख्य रूप से पशुओं पर निर्भर होती है। ये लोग भेड़, बकरी, गाय, भैंस, ऊँट, याक, घोड़े और रेनडियर जैसे पशुओं का पालन करते हैं। पशुपालकों के लिए पशु केवल आय का साधन नहीं होते बल्कि उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, संस्कृति और जीवनशैली का आधार भी होते हैं।

1.1 पशुपालन का अर्थ

पशुपालन का अर्थ है पशुओं का पालन-पोषण करके उनसे प्राप्त होने वाले उत्पादों जैसे दूध, घी, मक्खन, ऊन, मांस और चमड़े से जीवनयापन करना।

1.2 पशुपालकों की प्रमुख विशेषताएँ

• पशुधन पर निर्भर अर्थव्यवस्था।
• प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग।
• मौसम के अनुसार जीवनशैली में परिवर्तन।
• सामुदायिक जीवन और पारंपरिक ज्ञान।
• चरागाहों पर निर्भरता।

1.3 पशुपालन क्यों महत्वपूर्ण है?

• भोजन उपलब्ध कराता है।
• रोजगार प्रदान करता है।
• ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है।
• वस्त्र उद्योग के लिए ऊन उपलब्ध कराता है।
• परिवहन और कृषि कार्यों में सहायता करता है।

2. घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय

2.1 घुमंतू समुदाय (Nomadic Communities)

घुमंतू समुदाय स्थायी रूप से एक स्थान पर नहीं रहते। वे अपने पशुओं के साथ पानी और चारे की तलाश में लगातार स्थान बदलते रहते हैं।

2.2 अर्ध-घुमंतू समुदाय

ये समुदाय वर्ष के कुछ समय एक स्थान पर रहते हैं और कुछ समय पशुओं के साथ प्रवास करते हैं।

2.3 घुमंतू जीवन की विशेषताएँ

• तंबुओं या अस्थायी घरों में रहना।
• पशुओं के साथ यात्रा करना।
• चरागाहों की खोज करना।
• प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार जीवन जीना।

2.4 घुमंतू जीवन के लाभ

• पशुओं को पर्याप्त चारा मिलता है।
• प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग होता है।
• सूखे और अकाल से बचाव होता है।

2.5 घुमंतू जीवन की कठिनाइयाँ

• शिक्षा की कमी।
• स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी।
• मौसम की मार।
• सरकारी प्रतिबंध।

3. मौसमी प्रवास (Seasonal Migration)

मौसमी प्रवास पशुपालकों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। मौसम बदलने पर पशुपालक अपने पशुओं के साथ नए चरागाहों की ओर चले जाते हैं।

3.1 मौसमी प्रवास की आवश्यकता

• चारे की उपलब्धता।
• पानी की उपलब्धता।
• अत्यधिक गर्मी या सर्दी से बचाव।
• पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा।

3.2 ऊर्ध्वाधर प्रवास (Vertical Migration)

पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालक गर्मियों में ऊँचे पहाड़ों पर और सर्दियों में निचले क्षेत्रों में चले जाते हैं।

3.3 क्षैतिज प्रवास (Horizontal Migration)

मैदानी और रेगिस्तानी क्षेत्रों में पशुपालक लंबी दूरी तय करते हुए नए चरागाहों तक पहुँचते हैं।

3.4 ट्रांसह्यूमेंस (Transhumance)

मौसम के अनुसार नियमित रूप से एक निश्चित मार्ग पर होने वाले प्रवास को ट्रांसह्यूमेंस कहा जाता है।

4. पशुधन और उनका महत्व

4.1 पशुधन क्या है?

पालतू पशुओं की कुल संख्या और संपत्ति को पशुधन कहा जाता है।

4.2 पशुधन का आर्थिक महत्व

• आय का प्रमुख स्रोत।
• व्यापार का आधार।
• ग्रामीण उद्योगों का विकास।

4.3 पशुधन का सामाजिक महत्व

• सम्मान और प्रतिष्ठा का प्रतीक।
• विवाह और सामाजिक समारोहों में उपयोग।
• पारंपरिक संस्कृति का हिस्सा।

4.4 पशुओं से प्राप्त उत्पाद

• दूध
• दही
• घी
• मक्खन
• पनीर
• ऊन
• चमड़ा
• मांस

5. चरागाह और चराई प्रणाली

5.1 चरागाह का अर्थ

वह भूमि जहाँ पशु घास और अन्य वनस्पतियाँ खाते हैं, चरागाह कहलाती है।

5.2 चराई के प्रकार

खुली चराई

पशुओं को खुले क्षेत्रों में चरने दिया जाता है।

नियंत्रित चराई

निश्चित क्षेत्र और समय के अनुसार चराई कराई जाती है।

सामुदायिक चराई

पूरे समुदाय द्वारा साझा चरागाहों का उपयोग किया जाता है।

5.3 चरागाहों की समस्याएँ

• कृषि भूमि का विस्तार।
• जंगलों का आरक्षण।
• औद्योगिकीकरण।
• शहरीकरण।
• जलवायु परिवर्तन।

6. भारत के प्रमुख पशुपालक समुदाय

6.1 गुज्जर

• हिमालयी क्षेत्रों में निवास।
• मुख्य रूप से भैंस पालन।
• दूध उत्पादन के लिए प्रसिद्ध।

6.2 बकरवाल

• जम्मू-कश्मीर के प्रमुख घुमंतू समुदाय।
• भेड़ और बकरी पालन।
• लंबी दूरी का मौसमी प्रवास।

6.3 गद्दी

• हिमाचल प्रदेश में निवास।
• भेड़ और बकरी पालन।
• ऊँचे और निचले क्षेत्रों के बीच प्रवास।

6.4 राबारी

• गुजरात और राजस्थान के प्रसिद्ध पशुपालक।
• ऊँट और भेड़ पालन।

6.5 धनगर

• महाराष्ट्र के पशुपालक समुदाय।
• ऊन उत्पादन के लिए प्रसिद्ध।

6.6 टोडा

• नीलगिरि पहाड़ियों में निवास।
• भैंस पालन प्रमुख व्यवसाय।

6.7 कुरुमा और कुरुबा

• दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण पशुपालक समुदाय।

7. विश्व के प्रमुख पशुपालक समुदाय

7.1 मासाई (Masai)

• केन्या और तंजानिया में रहते हैं।
• गाय पालन प्रमुख व्यवसाय।
• पशुओं को धन और प्रतिष्ठा का प्रतीक मानते हैं।

7.2 बेदुइन (Bedouins)

• अरब मरुस्थलों के घुमंतू समुदाय।
• ऊँट पालन प्रमुख कार्य।

7.3 सामी (Sami)

• उत्तरी यूरोप में निवास।
• रेनडियर पालन करते हैं।

7.4 मंगोलियाई पशुपालक

• याक, घोड़े और भेड़ पालन।
• विशाल घास के मैदानों में जीवन।

8. औपनिवेशिक शासन और पशुपालक

ब्रिटिश शासन और अन्य यूरोपीय औपनिवेशिक शक्तियों ने पशुपालकों के जीवन में बड़े बदलाव किए।

8.1 वन कानूनों का प्रभाव

सरकार ने जंगलों को अपने नियंत्रण में लेना शुरू किया।

आरक्षित वन (Reserved Forests)

• चराई पर प्रतिबंध।
• लकड़ी काटने पर रोक।
• पशुपालकों की आवाजाही सीमित।

संरक्षित वन (Protected Forests)

• सीमित गतिविधियों की अनुमति।

8.2 भारतीय वन अधिनियम 1878

यह अधिनियम पशुपालकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे उनके पारंपरिक अधिकार सीमित हो गए।

8.3 चराई कर (Grazing Tax)

• पशु चराने के लिए कर देना पड़ता था।
• पशुपालकों की आय कम हुई।
• कई लोगों को पशुओं की संख्या घटानी पड़ी।

8.4 परमिट व्यवस्था

• यात्रा के लिए सरकारी अनुमति आवश्यक।
• स्वतंत्र आवागमन समाप्त।

8.5 अपराधी जनजाति अधिनियम 1871

कुछ घुमंतू समुदायों को “अपराधी” घोषित कर दिया गया।

इसके परिणाम:

• नियमित निगरानी।
• स्वतंत्रता में कमी।
• सामाजिक भेदभाव।

9. औपनिवेशिक सरकार ने पशुपालकों को क्यों नियंत्रित किया?

9.1 राजस्व प्राप्त करना

सरकार चराई कर और अन्य करों से आय प्राप्त करना चाहती थी।

9.2 कृषि का विस्तार

ब्रिटिश सरकार अधिक कृषि भूमि विकसित करना चाहती थी।

9.3 रेलवे विस्तार

रेलवे के लिए लकड़ी और भूमि की आवश्यकता थी।

9.4 वन संसाधनों का दोहन

जंगलों को आर्थिक संसाधन के रूप में देखा गया।

10. अफ्रीका में पशुपालकों पर प्रभाव

10.1 मासाई समुदाय की समस्याएँ

• चरागाह भूमि का नुकसान।
• राष्ट्रीय उद्यानों की स्थापना।
• आवाजाही पर प्रतिबंध।

10.2 भूमि का विभाजन

यूरोपीय बसने वालों को उपजाऊ भूमि दे दी गई।

10.3 पशुधन नियंत्रण

• पशुओं की संख्या पर नियंत्रण।
• सरकारी नियम और कर।

11. पशुपालकों का प्रतिरोध और अनुकूलन

11.1 प्रतिरोध

• कानूनों का विरोध।
• पारंपरिक अधिकारों की मांग।
• करों के खिलाफ आंदोलन।

11.2 अनुकूलन

• नए व्यापार अपनाना।
• कृषि शुरू करना।
• स्थायी बस्तियों में बसना।

12. आधुनिक समय में पशुपालक

12.1 शिक्षा का प्रभाव

• बच्चों की शिक्षा बढ़ी।
• नए रोजगार अवसर मिले।

12.2 परिवहन और संचार

• बाजारों तक पहुँच आसान हुई।
• व्यापार बढ़ा।

12.3 डेयरी उद्योग का विकास

• दुग्ध सहकारी समितियाँ।
• श्वेत क्रांति का प्रभाव।
• दूध उत्पादन में वृद्धि।

12.4 पशु चिकित्सा सेवाएँ

• टीकाकरण।
• आधुनिक उपचार।
• नस्ल सुधार कार्यक्रम।

13. आधुनिक चुनौतियाँ

13.1 जलवायु परिवर्तन

• सूखा बढ़ रहा है।
• चरागाह कम हो रहे हैं।

13.2 शहरीकरण

• चरागाह भूमि पर शहर बस रहे हैं।

13.3 औद्योगिकीकरण

• भूमि का औद्योगिक उपयोग बढ़ रहा है।

13.4 वन्यजीव संरक्षण नीतियाँ

• कई क्षेत्रों में चराई प्रतिबंधित।

13.5 सीमाओं का निर्माण

• देशों की सीमाओं के कारण पारंपरिक प्रवास मार्ग बाधित हुए।

14. पशुपालकों का आर्थिक योगदान

14.1 दुग्ध उत्पादन

भारत विश्व के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देशों में से एक है और इसमें पशुपालकों का महत्वपूर्ण योगदान है।

14.2 ऊन उद्योग

वस्त्र उद्योग के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराते हैं।

14.3 चमड़ा उद्योग

चमड़ा उद्योग को आधार प्रदान करते हैं।

14.4 ग्रामीण अर्थव्यवस्था

ग्रामीण रोजगार और व्यापार को बढ़ावा देते हैं।

15. अध्याय के महत्वपूर्ण शब्द (Key Terms)

• पशुपालक (Pastoralist)
• चरागाह (Pasture)
• पशुधन (Livestock)
• मौसमी प्रवास (Seasonal Migration)
• ट्रांसह्यूमेंस (Transhumance)
• घुमंतू समुदाय (Nomadic Community)
• चराई कर (Grazing Tax)
• आरक्षित वन (Reserved Forest)
• संरक्षित वन (Protected Forest)
• औपनिवेशिक शासन (Colonial Rule)
• अपराधी जनजाति अधिनियम (Criminal Tribes Act)
• डेयरी उद्योग (Dairy Industry)

16. परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु

• ट्रांसह्यूमेंस क्या है और क्यों किया जाता है?
• गुज्जर, बकरवाल, गद्दी और राबारी समुदायों की विशेषताएँ।
• वन अधिनियम 1878 का प्रभाव।
• चराई कर का महत्व।
• अपराधी जनजाति अधिनियम 1871।
• मासाई समुदाय की समस्याएँ।
• औपनिवेशिक शासन का पशुपालकों पर प्रभाव।
• आधुनिक समय में पशुपालकों के सामने चुनौतियाँ।
• पशुपालकों का आर्थिक और सामाजिक योगदान।

यह विस्तृत सामग्री अध्याय के लगभग सभी NCERT बिंदुओं, उप-विषयों, केस स्टडी, औपनिवेशिक नीतियों, भारतीय एवं वैश्विक पशुपालक समुदायों, प्रवास प्रणाली, चरागाह प्रबंधन, चुनौतियों और परीक्षा-उपयोगी तथ्यों को कवर करती है।

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