मनुष्य के जीवन के लिए भोजन सबसे आवश्यक आवश्यकता है। बढ़ती जनसंख्या के कारण भोजन की मांग लगातार बढ़ रही है। यदि कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य खाद्य उत्पादन प्रणालियों में सुधार नहीं किया जाए, तो भविष्य में खाद्य संकट उत्पन्न हो सकता है। इसलिए वैज्ञानिक तकनीकों, उन्नत बीजों, आधुनिक कृषि पद्धतियों तथा पशुधन सुधार के माध्यम से खाद्य संसाधनों में वृद्धि करना आवश्यक है।
इस अध्याय में हम फसल उत्पादन, फसल संरक्षण, पशुपालन, डेयरी, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
खाद्य संसाधन वे साधन हैं जिनसे मनुष्य को भोजन प्राप्त होता है। भोजन हमें ऊर्जा, वृद्धि तथा रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है।
यह विषय अक्सर छात्रों द्वारा छोड़ दिया जाता है, लेकिन NCERT में यह बहुत महत्वपूर्ण है।
फसल की ऐसी नई किस्में विकसित करना जिनमें अधिक उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा बेहतर गुणवत्ता हो, फसल किस्म सुधार कहलाता है।
ऐसी किस्में विकसित करना जो कम भूमि में अधिक उत्पादन दें।
उदाहरण:
जैविक कारक
अजैविक कारक
ऐसी फसलें जो कम समय में तैयार हो जाएँ।
विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में उगने वाली किस्में।
भूमि पर वैज्ञानिक ढंग से फसल उगाने की प्रक्रिया कृषि कहलाती है।
वर्षा ऋतु में बोई जाने वाली फसलें।
उदाहरण: धान, मक्का, कपास, सोयाबीन
सर्दी के मौसम में बोई जाने वाली फसलें।
उदाहरण: गेहूँ, चना, सरसों
गर्मी के मौसम में उगाई जाने वाली फसलें।
उदाहरण: तरबूज, खरबूजा, खीरा
फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए अपनाए जाने वाले वैज्ञानिक उपायों को फसल उत्पादन प्रबंधन कहते हैं।
इसके तीन प्रमुख भाग हैं:
मृदा पौधों की वृद्धि का आधार है।
मिट्टी की पौधों को पोषक तत्व देने की क्षमता को उर्वरता कहते हैं।
मिट्टी को पलटने तथा ढीला करने की प्रक्रिया जुताई कहलाती है।
खेत को समतल बनाने की प्रक्रिया।
बीजों को उचित गहराई और दूरी पर बोना बुवाई कहलाता है।
बुवाई से पहले बीजों को दवा या जैविक पदार्थ से उपचारित करना।
पौधों को वृद्धि के लिए 16 आवश्यक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है।
प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त पोषक पदार्थ।
पशुओं के गोबर से तैयार।
कूड़े-कचरे और पौध अवशेषों से बनाई जाती है।
हरी फसल को मिट्टी में दबाकर तैयार की जाती है।
केंचुओं द्वारा बनाई गई उच्च गुणवत्ता वाली खाद।
यह विषय भी अक्सर छूट जाता है।
उदाहरण:
ये वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करते हैं।
रासायनिक पदार्थ जो पौधों को पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
फसलों को कृत्रिम रूप से पानी देना सिंचाई कहलाता है।
पानी का छिड़काव वर्षा की तरह किया जाता है।
पानी सीधे जड़ों तक पहुँचाया जाता है।
फसलों के साथ उगने वाले अवांछित पौधे।
परिपक्व फसल को काटने की प्रक्रिया।
अनाज को भूसे से अलग करना।
भूसे और दानों को हवा की सहायता से अलग करना।
कटाई, मड़ाई और सफाई एक साथ करता है।
कटाई के बाद अनाज को सुरक्षित रखना।
पशुओं के वैज्ञानिक पालन-पोषण को पशुपालन कहते हैं।
दूध उत्पादन एवं प्रसंस्करण से संबंधित उद्योग।
अंडा देने वाली मुर्गियाँ।
मांस उत्पादन के लिए पाली जाने वाली मुर्गियाँ।
तालाब, झील, नदी आदि में।
समुद्र में।
एक तालाब में विभिन्न स्तरों पर रहने वाली कई मछलियों को साथ पालना।
मधुमक्खियों का वैज्ञानिक पालन।
रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना खेती करना।
यह भी एक महत्वपूर्ण विषय है।
ऐसी कृषि जो वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकताओं को पूरा करे।
भारत में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए अपनाई गई आधुनिक कृषि तकनीकों को हरित क्रांति कहते हैं।
प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध होना।
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