लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं होता। किसी देश को वास्तविक लोकतंत्र तब माना जाता है जब वहाँ के नागरिकों को स्वतंत्रता, समानता, न्याय और सम्मानपूर्ण जीवन जीने का अधिकार प्राप्त हो। यदि लोगों को अपनी बात कहने, सरकार की आलोचना करने, धर्म का पालन करने या न्याय प्राप्त करने की स्वतंत्रता न हो, तो वह लोकतंत्र केवल नाम का रह जाता है। इसलिए लोकतांत्रिक देशों में नागरिकों को विभिन्न अधिकार प्रदान किए जाते हैं जिन्हें लोकतांत्रिक अधिकार कहा जाता है।
लोकतांत्रिक अधिकार नागरिकों को सरकार की मनमानी से बचाते हैं और उनके व्यक्तित्व के विकास में सहायता करते हैं। भारत में इन अधिकारों को संविधान द्वारा सुरक्षा प्रदान की गई है।
अधिकारों का अर्थ और महत्व
अधिकार वे सुविधाएँ, स्वतंत्रताएँ और अवसर हैं जो प्रत्येक व्यक्ति के विकास, सम्मान और सुरक्षा के लिए आवश्यक होते हैं। अधिकार व्यक्ति को समाज में गरिमा के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान करते हैं।
अधिकारों का महत्व
व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास होता है।
स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
शोषण और अन्याय से रक्षा होती है।
समान अवसर प्राप्त होते हैं।
लोकतंत्र मजबूत बनता है।
सरकार की मनमानी पर नियंत्रण रहता है।
सामाजिक न्याय की स्थापना होती है।
यदि किसी देश में अधिकारों की सुरक्षा नहीं होती, तो वहाँ लोकतंत्र कमजोर हो जाता है और नागरिकों का जीवन असुरक्षित हो जाता है।
अधिकारों का ऐतिहासिक विकास
आज जो अधिकार हमें प्राप्त हैं, वे लंबे संघर्षों का परिणाम हैं।
मैग्ना कार्टा (1215)
इंग्लैंड के राजा जॉन को सामंतों के दबाव में एक समझौते पर हस्ताक्षर करने पड़े जिसे मैग्ना कार्टा कहा जाता है।
मैग्ना कार्टा का महत्व
राजा की निरंकुश शक्ति सीमित हुई।
कानून के शासन की शुरुआत हुई।
नागरिक अधिकारों की नींव पड़ी।
अमेरिकी स्वतंत्रता घोषणा (1776)
अमेरिका ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करते समय घोषणा की कि सभी मनुष्य समान पैदा होते हैं और उन्हें कुछ प्राकृतिक अधिकार प्राप्त हैं।
इनमें प्रमुख थे—
जीवन का अधिकार
स्वतंत्रता का अधिकार
सुख की खोज का अधिकार
फ्रांसीसी क्रांति (1789)
फ्रांस की जनता ने अत्याचारी शासन के विरुद्ध क्रांति की।
क्रांति का मुख्य नारा था—
स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व
इस क्रांति ने पूरी दुनिया में लोकतंत्र और मानवाधिकारों के विचारों को फैलाया।
लोकतंत्र और अधिकार का संबंध
लोकतंत्र तथा अधिकार एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।
लोकतंत्र अधिकारों की रक्षा करता है
लोकतांत्रिक सरकार नागरिकों को अधिकार प्रदान करती है और उनकी रक्षा करती है।
अधिकार लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं
जब लोगों को अधिकार प्राप्त होते हैं तो वे शासन में भाग लेते हैं और सरकार को जवाबदेह बनाते हैं।
लोकतंत्र में अधिकार क्यों आवश्यक हैं?
सरकार की शक्ति सीमित करने के लिए
नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए
सामाजिक न्याय स्थापित करने के लिए
नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए
मानव गरिमा की रक्षा के लिए
दक्षिण अफ्रीका और अधिकारों का संघर्ष
लोकतांत्रिक अधिकारों का महत्व समझाने के लिए दक्षिण अफ्रीका का उदाहरण बहुत महत्वपूर्ण है।
रंगभेद (Apartheid)
दक्षिण अफ्रीका में लंबे समय तक गोरी सरकार ने अश्वेत लोगों के साथ भेदभाव किया।
रंगभेद की विशेषताएँ
अश्वेत लोगों को मतदान का अधिकार नहीं था।
अलग स्कूल और अस्पताल थे।
सार्वजनिक सुविधाओं में भेदभाव होता था।
राजनीतिक अधिकार सीमित थे।
नेल्सन मंडेला का संघर्ष
Nelson Mandela ने रंगभेद के विरुद्ध संघर्ष किया।
उन्हें 27 वर्षों तक जेल में रखा गया, लेकिन उन्होंने अपने संघर्ष को जारी रखा।
1994 में दक्षिण अफ्रीका में लोकतांत्रिक चुनाव हुए और मंडेला राष्ट्रपति बने।
दक्षिण अफ्रीका का संविधान
दक्षिण अफ्रीका के नए संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान किए और मानव गरिमा को सर्वोच्च महत्व दिया।
भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार
भारतीय संविधान के भाग III (अनुच्छेद 12 से 35) में मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है।
मौलिक अधिकार लोकतंत्र की आत्मा माने जाते हैं क्योंकि वे नागरिकों को राज्य की मनमानी से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
मौलिक अधिकारों की विशेषताएँ
संविधान द्वारा संरक्षित हैं।
न्यायालय द्वारा लागू करवाए जा सकते हैं।
लोकतंत्र की रक्षा करते हैं।
नागरिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करते हैं।
सभी व्यक्तियों की गरिमा बनाए रखते हैं।
समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से 18)
समानता का अधिकार भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है।
कानून के समक्ष समानता
सभी नागरिक कानून की नजर में बराबर हैं।
कोई व्यक्ति चाहे कितना भी बड़ा पदाधिकारी क्यों न हो, कानून उसके लिए भी समान रूप से लागू होगा।
कानून का समान संरक्षण
समान परिस्थितियों में सभी लोगों के साथ समान व्यवहार किया जाएगा।
भेदभाव का निषेध
राज्य निम्न आधारों पर भेदभाव नहीं कर सकता—
धर्म
जाति
लिंग
जन्म स्थान
भाषा
सार्वजनिक अवसरों में समानता
सरकारी नौकरियों और सार्वजनिक सेवाओं में सभी नागरिकों को समान अवसर प्राप्त हैं।
अस्पृश्यता का उन्मूलन
अनुच्छेद 17 के अंतर्गत अस्पृश्यता को समाप्त कर दिया गया है।
उपाधियों का अंत
भारत में वंशानुगत उपाधियों की व्यवस्था समाप्त कर दी गई।
स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19 से 22)
यह अधिकार नागरिकों को स्वतंत्र जीवन जीने का अवसर देता है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
नागरिकों को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है।
वे—
बोल सकते हैं
लिख सकते हैं
भाषण दे सकते हैं
समाचार प्रकाशित कर सकते हैं
उचित प्रतिबंध
यह स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है।
राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और नैतिकता की रक्षा के लिए कुछ सीमाएँ लगाई जा सकती हैं।
शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता
नागरिक शांतिपूर्ण तरीके से एकत्रित हो सकते हैं और अपनी मांगों को रख सकते हैं।
संगठन बनाने की स्वतंत्रता
नागरिक संगठन, संघ, यूनियन और राजनीतिक दल बना सकते हैं।
आवागमन की स्वतंत्रता
भारत के किसी भी भाग में स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं।
निवास की स्वतंत्रता
भारत के किसी भी राज्य में रह सकते हैं।
व्यवसाय चुनने की स्वतंत्रता
किसी भी वैध व्यवसाय, व्यापार या पेशे को अपनाया जा सकता है।
जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 21)
यह संविधान का सबसे महत्वपूर्ण अधिकार माना जाता है।
जीवन का अधिकार
इसका अर्थ केवल जीवित रहना नहीं है।
सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार
इसमें शामिल हैं—
भोजन
स्वास्थ्य
शिक्षा
स्वच्छ वातावरण
आवास
स्वच्छ जल
निजता का अधिकार
व्यक्ति की निजी जानकारी और व्यक्तिगत जीवन की सुरक्षा भी इसी अधिकार का भाग है।
गिरफ्तारी और निरोध से सुरक्षा (अनुच्छेद 22)
यदि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है तो—
गिरफ्तारी का कारण बताया जाएगा।
वकील की सहायता लेने का अधिकार होगा।
24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।
शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24)
यह अधिकार कमजोर वर्गों की रक्षा करता है।
मानव तस्करी का निषेध
मनुष्यों की खरीद-फरोख्त प्रतिबंधित है।
बंधुआ मजदूरी का निषेध
जबरन काम करवाना अपराध है।
बेगार प्रथा का निषेध
बिना वेतन कार्य करवाना गैरकानूनी है।
बाल श्रम निषेध
14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से खतरनाक उद्योगों में काम नहीं करवाया जा सकता।
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28)
भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है।
धर्म अपनाने की स्वतंत्रता
कोई भी धर्म स्वीकार किया जा सकता है।
धर्म पालन की स्वतंत्रता
अपने धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन किया जा सकता है।
धर्म प्रचार की स्वतंत्रता
अपने धर्म के बारे में दूसरों को जानकारी दी जा सकती है।
धार्मिक संस्थाओं का प्रबंधन
धार्मिक समुदाय अपने धार्मिक संस्थानों का संचालन कर सकते हैं।
सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार (अनुच्छेद 29-30)
भारत विविधताओं का देश है।
इन अधिकारों का उद्देश्य विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और अल्पसंख्यक समुदायों की पहचान की रक्षा करना है।
भाषा और संस्कृति की सुरक्षा
हर समुदाय अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रख सकता है।
अल्पसंख्यकों के अधिकार
धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक अपने शिक्षण संस्थान स्थापित और संचालित कर सकते हैं।
संवैधानिक उपचार का अधिकार (अनुच्छेद 32)
यदि किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है तो नागरिक न्यायालय जा सकता है।
B. R. Ambedkar ने इसे संविधान की “आत्मा और हृदय” कहा था।
इस अधिकार का महत्व
अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
सरकार को संविधान के दायरे में रखता है।
नागरिकों को न्याय दिलाता है।
रिट (Writs)
हैबियस कॉर्पस (Habeas Corpus)
अवैध गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करती है।
मंडामस (Mandamus)
सरकारी अधिकारी को अपना कर्तव्य पूरा करने का आदेश देती है।
प्रोहिबिशन (Prohibition)
निचली अदालत को कार्यवाही रोकने का आदेश देती है।
सर्टियोरारी (Certiorari)
निचली अदालत के निर्णय को रद्द करने के लिए जारी की जाती है।
क्वो वारंटो (Quo Warranto)
किसी व्यक्ति के पद पर अधिकार की वैधता की जाँच करती है।
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