संस्कृत व्याकरण में वाच्य एक अत्यन्त महत्वपूर्ण विषय है। परीक्षा की दृष्टि से भी यह विषय बहुत पूछा जाता है, क्योंकि इसके माध्यम से यह समझा जाता है कि वाक्य में क्रिया का संबंध कर्ता, कर्म अथवा केवल भाव से किस प्रकार है। वाच्य का सही ज्ञान होने पर छात्र आसानी से वाक्य-परिवर्तन, अनुवाद तथा व्याकरणिक विश्लेषण कर सकते हैं।
“वाच्य” शब्द वच् (बोलना) धातु से बना है, जिसका अर्थ है – जो कहा जाए अथवा जिसके विषय में कहा जाए।
व्याकरण में वाच्य का अर्थ है—
क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव में से कौन प्रधान है, उसे वाच्य कहते हैं।
क्रियया यः अर्थः प्रमुखतया बोध्यते सः वाच्यम्।
अर्थात् क्रिया के द्वारा जिस तत्व (कर्ता, कर्म या भाव) की प्रधानता प्रकट होती है, वही वाच्य कहलाता है।
वाच्य का अध्ययन निम्न कारणों से आवश्यक है—
संस्कृत में वाच्य तीन प्रकार के होते हैं—
जिस वाक्य में कर्ता प्रधान होता है और क्रिया कर्ता के अनुसार चलती है, वहाँ कर्तृवाच्य होता है।
दूसरे शब्दों में—
जहाँ कार्य करने वाले व्यक्ति को विशेष महत्व दिया जाए, वहाँ कर्तृवाच्य होता है।
रामः पुस्तकं पठति।
अर्थ — राम पुस्तक पढ़ता है।
यहाँ मुख्य बात राम के बारे में कही जा रही है।
अतः यह कर्तृवाच्य है।
जो कार्य करता है।
उदाहरण—
रामः पठति।
यहाँ “रामः” कर्ता है।
जिस पर कार्य का प्रभाव पड़ता है।
रामः पुस्तकं पठति।
यहाँ “पुस्तकं” कर्म है।
कार्य को बताने वाला शब्द।
पठति = पढ़ता है।
| कारक | विभक्ति |
|---|---|
| कर्ता | प्रथमा |
| कर्म | द्वितीया |
| करण | तृतीया |
| सम्प्रदान | चतुर्थी |
| अपादान | पञ्चमी |
| सम्बन्ध | षष्ठी |
| अधिकरण | सप्तमी |
क्रिया कर्ता के अनुसार बदलती है।
उदाहरण—
बालकः पठति।
बालकौ पठतः।
बालकाः पठन्ति।
यहाँ क्रिया कर्ता के वचन के अनुसार बदल रही है।
जिस वाक्य में कर्म प्रधान हो जाता है और क्रिया कर्म के अनुसार प्रयुक्त होती है, उसे कर्मवाच्य कहते हैं।
कई बार कार्य करने वाले व्यक्ति से अधिक महत्वपूर्ण कार्य का परिणाम होता है। ऐसे समय कर्मवाच्य का प्रयोग किया जाता है।
रामेण पुस्तकं पठ्यते।
अर्थ—
पुस्तक राम द्वारा पढ़ी जाती है।
यहाँ ध्यान पुस्तक पर है।
कर्तृवाच्य:
रामः पुस्तकं पठति।
कर्मवाच्य:
रामेण पुस्तकं पठ्यते।
परिवर्तन—
| कर्तृवाच्य | कर्मवाच्य |
|---|---|
| रामः | रामेण |
| पुस्तकं | पुस्तकम् |
| पठति | पठ्यते |
कर्ता को तृतीया विभक्ति में बदलिए।
रामः → रामेण
कर्म को प्रथमा विभक्ति में लाइए।
पुस्तकं → पुस्तकम्
क्रिया को कर्मवाच्य में बदलिए।
पठति → पठ्यते
कर्मवाच्य सामान्यतः सकर्मक धातुओं से बनता है।
जिस वाक्य में न कर्ता प्रधान होता है और न कर्म, बल्कि केवल कार्य या भाव प्रधान होता है, वहाँ भाववाच्य होता है।
भाववाच्य में केवल यह बताया जाता है कि कोई कार्य हो रहा है।
यह नहीं बताया जाता कि किस वस्तु पर कार्य हो रहा है।
मया हस्यते।
मेरे द्वारा हँसा जाता है।
भाववाच्य मुख्यतः अकर्मक धातुओं से बनता है।
रामः पत्रं लिखति।
रामेण पत्रं लिख्यते।
बालकः धावति।
बालकेन धाव्यते।
पत्रं रामेण लिख्यते।
रामः पत्रं लिखति।
मया हस्यते।
अहं हसामि।
→ कर्तृवाच्य
रामः पठति।
→ कर्मवाच्य
रामेण पुस्तकं पठ्यते।
→ भाववाच्य
रामेण गम्यते।
वाच्य के अध्ययन में पदों का भी महत्व है।
जहाँ क्रिया का फल दूसरे को प्राप्त हो।
उदाहरण—
जहाँ क्रिया का फल स्वयं को प्राप्त हो।
उदाहरण—
कर्मवाच्य में प्रायः आत्मनेपदी रूप प्रयुक्त होते हैं।
सः पठति।
त्वं पठसि।
अहं पठामि।
वाच्य परिवर्तन के बाद पुरुष बदल सकता है, लेकिन नियम नहीं बदलते।
बालकः पठति।
बालकौ पठतः।
बालकाः पठन्ति।
कर्मवाच्य में क्रिया कर्म के वचन के अनुसार होती है।
वाच्य का प्रयोग विभिन्न लकारों में भी होता है—
उदाहरण—
कुछ धातुओं के दो कर्म होते हैं। इन्हें द्विकर्मक धातु कहते हैं।
उदाहरण—
गुरुः छात्राय ज्ञानं ददाति।
यहाँ छात्राय और ज्ञानं दोनों क्रिया से सम्बन्धित हैं, इसलिए यह द्विकर्मक प्रयोग है।
| धातु | कर्तृवाच्य | कर्मवाच्य |
|---|---|---|
| पठ् | पठति | पठ्यते |
| लिख् | लिखति | लिख्यते |
| खाद् | खादति | खाद्यते |
| कृ | करोति | क्रियते |
| दा | ददाति | दीयते |
| गा | गायति | गीयते |
| नी | नयति | नीयते |
| ज्ञा | जानाति | ज्ञायते |
| पृच्छ् | पृच्छति | पृच्छ्यते |
| दृश् | पश्यति | दृश्यते |
वाच्य अध्याय केवल कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत वाच्य की परिभाषा, उद्देश्य, प्रकार, पहचान, कर्ता-कर्म-क्रिया, विभक्ति परिवर्तन, सकर्मक-अकर्मक धातुएँ, वाच्य परिवर्तन, परस्मैपद-आत्मनेपद, पुरुष, वचन, लकार, द्विकर्मक धातुएँ, नियम, अपवाद, विशेषताएँ तथा परीक्षा-उपयोगी सूत्रों का भी विस्तृत अध्ययन किया जाता है। यह विषय संस्कृत व्याकरण की नींव माने जाने वाले महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है।
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