Class 9th 10th Sanskrit Vyakaran Ch-9a Lakar

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📅 31/05/2026

लकार (Lakāra) – संस्कृत क्रिया-रूपों का सम्पूर्ण एवं विस्तृत अध्ययन

संस्कृत व्याकरण में लकार अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। किसी भी भाषा में क्रिया (Verb) यह बताती है कि कार्य कब हुआ, हो रहा है या होगा, तथा वह कार्य आज्ञा, इच्छा, संभावना, आशीर्वाद या आदेश के रूप में कहा जा रहा है। संस्कृत में इन सभी भावों और कालों को व्यक्त करने के लिए लकारों का प्रयोग किया जाता है।

यदि धातु संस्कृत व्याकरण का हृदय है, तो लकार धातु की शक्ति हैं। बिना लकार के क्रिया का सही अर्थ समझना संभव नहीं होता।

लकार की परिभाषा

जिस प्रत्यय या रूप के द्वारा क्रिया के काल (Tense) अथवा भाव (Mood) का ज्ञान हो, उसे लकार कहते हैं।

उदाहरण

  • रामः पठति। (राम पढ़ता है।)
  • रामः अपठत्। (राम पढ़ता था।)
  • रामः पठिष्यति। (राम पढ़ेगा।)

यहाँ “पठति”, “अपठत्” और “पठिष्यति” तीनों क्रिया रूप अलग-अलग लकारों में हैं।

लकारों का महत्व

लकारों के माध्यम से हम जान सकते हैं—

  • कार्य कब हुआ?
  • कार्य किसके द्वारा किया गया?
  • कार्य वर्तमान, भूत या भविष्य में है?
  • वाक्य में आदेश है या प्रार्थना?
  • वाक्य में इच्छा है या संभावना?
  • वाक्य में आशीर्वाद दिया जा रहा है या नहीं?

संस्कृत में कुल कितने लकार होते हैं?

पाणिनीय व्याकरण में मुख्यतः 10 लकार माने जाते हैं।

  1. लट्
  2. लिट्
  3. लुट्
  4. लृट्
  5. लेट्
  6. लोट्
  7. लङ्
  8. विधिलिङ्
  9. आशीर्लिङ्
  10. लुङ्

लकारों का वर्गीकरण

कालबोधक लकार

जो समय (काल) का बोध कराते हैं।

  • लट्
  • लिट्
  • लङ्
  • लुङ्
  • लृट्
  • लुट्

भावबोधक लकार

जो मनोभाव व्यक्त करते हैं।

  • लोट्
  • विधिलिङ्
  • आशीर्लिङ्
  • लेट्

लट् लकार (वर्तमान काल)

परिचय

जब क्रिया वर्तमान समय में हो रही हो, तब लट् लकार का प्रयोग किया जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

  • वर्तमान काल का बोध
  • सबसे अधिक प्रयोग होने वाला लकार
  • दैनिक जीवन के वाक्यों में प्रयोग

उदाहरण

  • बालकः पठति।
  • छात्रः लिखति।
  • रामः गच्छति।

लट् लकार की पहचान

  • ति
  • तः
  • अन्ति
  • सि
  • थः
  • मि
  • वः
  • मः

विशेष प्रयोग

वर्तमान कार्य

  • अहं भोजनं खादामि।

आदत

  • सः प्रतिदिनं विद्यालयं गच्छति।

सार्वकालिक सत्य

  • सूर्यः पूर्वदिशि उदेति।
  • पृथिवी सूर्यं परितः भ्रमति।

ऐतिहासिक वर्तमान

कभी-कभी भूतकाल की घटनाएँ भी वर्तमान रूप में बताई जाती हैं।

लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल)

परिचय

जिस कार्य का होना भूतकाल में हो चुका हो और वह आज न हुआ हो, वहाँ लङ् लकार का प्रयोग होता है।

अनद्यतन का अर्थ

  • अद्य = आज
  • अनद्यतन = आज से पहले

उदाहरण

  • रामः वनम् अगच्छत्।
  • बालकः अपठत्।

पहचान

अधिकांश रूपों के आरम्भ में “अ” आता है।

उदाहरण

  • अगच्छत्
  • अपठत्
  • अलिखत्

प्रयोग

इतिहास

  • अशोकः महान् राजा आसीत्।

कथा

  • एकदा सिंहः वने वसत्।

लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल)

परिचय

ऐसी घटना जो भूतकाल में हुई हो लेकिन वक्ता ने उसे स्वयं न देखा हो।

उदाहरण

  • रामः जगाम।
  • कृष्णः उवाच।
  • बभूव।

विशेषता

इसमें धातु का अभ्यास होता है।

उदाहरण

  • भू → बभूव
  • गम् → जगाम

प्रयोग

  • पुराण
  • महाभारत
  • रामायण
  • इतिहास

लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल)

परिचय

सामान्य रूप से बीते हुए कार्य को बताने के लिए।

उदाहरण

  • अगमत्।
  • अभूत्।
  • अकरोत्।

लङ् और लुङ् में अंतर

लङ्लुङ्
अनद्यतन भूतकालसामान्य भूतकाल
विस्तृत भूत घटनासाधारण भूत घटना

लृट् लकार (सामान्य भविष्यत्काल)

परिचय

भविष्य में होने वाले कार्य का बोध।

उदाहरण

  • रामः पठिष्यति।
  • बालकः गमिष्यति।
  • छात्राः लिखिष्यन्ति।

पहचान

  • ष्य
  • इष्य

उदाहरण

  • पठिष्यति
  • करिष्यति
  • गमिष्यति

प्रयोग

भविष्य की योजना

  • अहं श्वः दिल्लीं गमिष्यामि।

भविष्यवाणी

  • भारतं विकसितं राष्ट्रं भविष्यति।

लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत्काल)

परिचय

दूर भविष्य या निश्चित भविष्य की घटना के लिए।

उदाहरण

  • कर्ता
  • भोक्ता
  • गन्ता

विशेष प्रयोग

  • भविष्यवाणी
  • निश्चित घोषणा
  • दूर भविष्य

लोट् लकार (आज्ञार्थक)

परिचय

आज्ञा, आदेश, निवेदन, अनुरोध, प्रेरणा आदि के लिए।

उदाहरण

  • पठतु।
  • गच्छतु।
  • लिखतु।

प्रयोग

आदेश

  • त्वं गच्छ।

प्रार्थना

  • भगवन् रक्षतु।

निमंत्रण

  • आगच्छतु।

विधिलिङ् लकार

परिचय

इच्छा, संभावना, कर्तव्य, सलाह तथा उपदेश का बोध।

उदाहरण

  • पठेत्।
  • गच्छेत्।
  • कुर्यात्।

प्रयोग

चाहिए

  • छात्रः पठेत्।

संभावना

  • सः आगच्छेत्।

उपदेश

  • सत्यं वदेत्।

आशीर्लिङ् लकार

परिचय

आशीर्वाद, मंगलकामना और शुभेच्छा व्यक्त करने के लिए।

उदाहरण

  • जीव्यात्।
  • भूयात्।
  • वर्धेताम्।

प्रयोग

  • त्वं शतं वर्षाणि जीव्यात्।
  • सर्वे सुखिनः भूयासुः।

लेट् लकार

परिचय

यह वैदिक संस्कृत का लकार है।

महत्व

  • केवल वैदिक साहित्य में प्रयोग।
  • आधुनिक संस्कृत में लगभग अनुपस्थित।

पुरुष (Person)

प्रथम पुरुष

जिसके बारे में कहा जाए।

  • सः
  • सा
  • ते

मध्यम पुरुष

जिससे कहा जाए।

  • त्वम्
  • युवाम्
  • यूयम्

उत्तम पुरुष

जो स्वयं बोले।

  • अहम्
  • आवाम्
  • वयम्

वचन (Number)

एकवचन

एक व्यक्ति

  • रामः

द्विवचन

दो व्यक्ति

  • रामौ

बहुवचन

दो से अधिक व्यक्ति

  • रामाः

पद (Pada)

लकारों के रूप बनाते समय पद का बहुत महत्व होता है।

परस्मैपद

क्रिया का फल दूसरे को प्राप्त हो।

उदाहरण

  • पठति
  • गच्छति
  • लिखति

परस्मैपद प्रत्यय

  • ति, तः, अन्ति
  • सि, थः, थ
  • मि, वः, मः

आत्मनेपद

क्रिया का फल स्वयं को प्राप्त हो।

उदाहरण

  • सेवते
  • लभते
  • वन्दते

आत्मनेपद प्रत्यय

  • ते, एते, अन्ते
  • से, एथे, ध्वे
  • ए, वहे, महे

उभयपदी धातु

जो दोनों पदों में प्रयुक्त हो।

उदाहरण

  • नी
  • कृ
  • हृ

धातु (Root Verb)

लकारों का निर्माण धातुओं से होता है।

प्रमुख धातुएँ

  • पठ् = पढ़ना
  • गम् = जाना
  • कृ = करना
  • भू = होना
  • वद् = बोलना
  • लिख् = लिखना
  • खाद् = खाना
  • पिब् = पीना

धातु + लकार + पुरुष + वचन = क्रियारूप

उदाहरण

धातु = पठ्

लकार = लट्

पुरुष = प्रथम

वचन = एकवचन

रूप = पठति

संस्कृत क्रिया-रूप निर्माण की प्रक्रिया

  1. धातु चुनें।
  2. गण पहचानें।
  3. पद पहचानें।
  4. लकार चुनें।
  5. पुरुष चुनें।
  6. वचन चुनें।
  7. प्रत्यय जोड़ें।
  8. संधि नियम लागू करें।
  9. अंतिम क्रियारूप प्राप्त करें।

सभी लकारों की त्वरित पहचान

लकारकाल/भावसामान्य पहचान
लट्वर्तमानति
लङ्भूतअ + धातु
लिट्परोक्ष भूतअभ्यास
लुङ्सामान्य भूत
लृट्भविष्यष्य
लुट्दूर भविष्यता
लोट्आज्ञातु
विधिलिङ्चाहिए/संभावनाएत्
आशीर्लिङ्आशीर्वादयात्
लेट्वैदिक प्रयोगविशेष रूप

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • संस्कृत में कुल 10 प्रमुख लकार होते हैं।
  • लट् लकार वर्तमान काल को व्यक्त करता है।
  • लङ् लकार भूतकाल को व्यक्त करता है।
  • लृट् लकार भविष्यत्काल को व्यक्त करता है।
  • लोट् लकार आदेश और आज्ञा के लिए प्रयोग होता है।
  • विधिलिङ् लकार संभावना, इच्छा और कर्तव्य का बोध कराता है।
  • आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद व्यक्त करता है।
  • लिट् लकार परोक्ष भूतकाल को व्यक्त करता है।
  • लुट् लकार दूर भविष्य को व्यक्त करता है।
  • लेट् लकार वैदिक संस्कृत में प्रयुक्त होता है।

लकार अध्याय से जुड़े अतिरिक्त महत्वपूर्ण उपविषय

  • तिङ् प्रत्यय
  • धातुपाठ
  • दशगण (भ्वादिगण, अदादिगण आदि)
  • विकरण
  • परस्मैपद एवं आत्मनेपद रूप
  • उभयपदी धातुएँ
  • सकर्मक और अकर्मक क्रियाएँ
  • कृदन्त एवं तद्धित से संबंध
  • लकार परिवर्तन (Tense Conversion)
  • धातु रूप निर्माण के नियम
  • संधि और लकार का संबंध
  • वाच्य परिवर्तन (कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य)
  • सामान्य धातुओं के सभी लकारों में रूप
  • परीक्षा में पूछे जाने वाले लकार-आधारित अनुवाद प्रश्न

इस प्रकार लकार अध्याय को पूरी तरह समझने के लिए केवल लट्, लङ् और लृट् लकार ही नहीं, बल्कि धातु, पद, पुरुष, वचन, तिङ् प्रत्यय, गण, विकरण, वाच्य तथा सभी 10 लकारों के प्रयोग और रूप निर्माण का अध्ययन भी आवश्यक है।

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