मुद्रा वह सामान्य रूप से स्वीकार किया जाने वाला माध्यम है जिसका उपयोग वस्तुओं और सेवाओं के लेन-देन के लिए किया जाता है। यह अर्थव्यवस्था में विनिमय को सरल, तेज और सुरक्षित बनाती है।
मुद्रा की प्रमुख विशेषताएँ हैं
मुद्रा आधुनिक अर्थव्यवस्था की आधारशिला है क्योंकि इसके बिना बड़े पैमाने पर व्यापार संभव नहीं है।
प्रारंभिक अवस्था में लोग वस्तु के बदले वस्तु का लेन-देन करते थे जैसे अनाज, पशु, नमक आदि।
इस प्रणाली की मुख्य समस्या यह थी कि हर व्यक्ति की आवश्यकता आपस में मेल नहीं खाती थी।
समय के साथ सोना, चाँदी और ताँबा जैसे धातुओं का उपयोग शुरू हुआ। ये टिकाऊ और मूल्यवान होते थे, इसलिए व्यापार में विश्वास बढ़ा।
राज्य द्वारा प्रमाणित सिक्के जारी किए गए। इससे लेन-देन अधिक संगठित और भरोसेमंद हुआ।
बैंक और सरकार द्वारा जारी नोटों का उपयोग शुरू हुआ। यह हल्की, सुरक्षित और बड़े लेन-देन के लिए उपयुक्त थी।
डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के रूप में मुद्रा का उपयोग हुआ, जिससे नकद की आवश्यकता कम हुई।
आज के समय में UPI, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से डिजिटल भुगतान होता है।
Bitcoin और अन्य क्रिप्टोकरेंसी ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित हैं और किसी केंद्रीय बैंक द्वारा नियंत्रित नहीं होतीं।
वस्तु विनिमय प्रणाली में वस्तु के बदले वस्तु का आदान-प्रदान होता था।
इस प्रणाली की मुख्य समस्याएँ
इन समस्याओं के कारण मुद्रा की आवश्यकता उत्पन्न हुई।
मुद्रा के कार्यों को तीन भागों में समझा जाता है
बैंकिंग प्रणाली आधुनिक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ये जनता से जमा लेते हैं और ऋण प्रदान करते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता के आधार पर कार्य करते हैं।
ग्रामीण विकास और कृषि ऋण पर केंद्रित होते हैं।
छोटे लेन-देन और डिजिटल सेवाएँ प्रदान करते हैं।
गरीब और छोटे व्यापारियों को ऋण उपलब्ध कराते हैं।
बैंक बचत, चालू और सावधि जमा स्वीकार करते हैं।
बैंक कृषि, शिक्षा, गृह और व्यापार के लिए ऋण देते हैं।
NEFT, RTGS और IMPS के माध्यम से पैसा भेजा जाता है।
बैंक जमा राशि से अधिक ऋण देकर अर्थव्यवस्था में मुद्रा की आपूर्ति बढ़ाते हैं।
निवेश, बीमा और वित्तीय सलाह भी प्रदान की जाती है।
भारतीय रिजर्व बैंक भारत का केंद्रीय बैंक है।
इसके प्रमुख कार्य
बैंकों को अपनी जमा राशि का एक हिस्सा RBI के पास रखना पड़ता है।
बैंकों को सोना या सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करना अनिवार्य होता है।
RBI जिस दर पर बैंकों को ऋण देता है।
बैंक RBI के पास पैसा जमा करते हैं और ब्याज प्राप्त करते हैं।
दीर्घकालिक ऋण की दर।
RBI बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री करता है।
डिजिटल बैंकिंग ने वित्तीय प्रणाली को तेज और सरल बनाया है।
प्रमुख माध्यम
डिजिटल बैंकिंग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह 24×7 उपलब्ध रहती है।
ऋण वह धन है जो वर्तमान में लिया जाता है और भविष्य में ब्याज सहित लौटाया जाता है।
सूक्ष्म वित्त में गरीब लोगों को छोटे ऋण दिए जाते हैं ताकि वे अपना रोजगार शुरू कर सकें।
स्वयं सहायता समूह 10 से 20 लोगों का समूह होता है जो बचत और ऋण गतिविधियाँ करता है।
इसके लाभ
इसका उद्देश्य हर व्यक्ति को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना है।
मुख्य योजनाएँ
जब वस्तुओं और सेवाओं के दाम लगातार बढ़ते हैं तो उसे मुद्रास्फीति कहते हैं।
कारण
जब कोई ऋण समय पर वापस नहीं किया जाता (90 दिन से अधिक), तो वह NPA कहलाता है।
मुद्रा और ऋण आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। बैंकिंग प्रणाली, RBI और डिजिटल भुगतान ने आर्थिक गतिविधियों को तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बना दिया है।
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