ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) भौतिकी की वह शाखा है जो ऊष्मा (Heat), तापमान (Temperature), ऊर्जा (Energy) और कार्य (Work) के बीच संबंध का अध्ययन करती है। यह अध्याय बताता है कि किसी तंत्र (System) में ऊर्जा कैसे स्थानांतरित होती है, कैसे एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है तथा ऊष्मा के कारण पदार्थों के गुणों में क्या परिवर्तन होता है।
कक्षा 11 में यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आगे चलकर ऊष्मा इंजन, रेफ्रिजरेटर, गैसों के व्यवहार, एंट्रॉपी तथा इंजीनियरिंग के कई विषयों की नींव बनता है।
ऊष्मागतिकी मुख्य रूप से पदार्थ के स्थूल (Macroscopic) गुणों का अध्ययन करती है। इसमें पदार्थ के प्रत्येक अणु को अलग-अलग नहीं देखा जाता बल्कि पूरे पदार्थ के सामूहिक व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।
इसमें अणुओं और परमाणुओं की गति का अध्ययन किया जाता है।
उदाहरण: गैस के अणुओं की चाल, टक्कर आदि।
इसमें केवल दाब, तापमान और आयतन जैसी राशियों का अध्ययन किया जाता है।
उदाहरण: किसी गैस का तापमान बढ़ने पर उसका फैलना।
ब्रह्मांड के जिस भाग का अध्ययन किया जाता है उसे तंत्र (System) कहते हैं।
ऊर्जा और पदार्थ दोनों का आदान-प्रदान संभव होता है।
उदाहरण: खुला बर्तन।
केवल ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है।
उदाहरण: पिस्टन में बंद गैस।
न ऊर्जा का आदान-प्रदान और न पदार्थ का।
उदाहरण: आदर्श थर्मस फ्लास्क।
तंत्र के बाहर का सम्पूर्ण भाग परिवेश कहलाता है।
उदाहरण: यदि हम गैस भरे सिलेंडर का अध्ययन कर रहे हैं तो सिलेंडर के बाहर की सारी वस्तुएँ परिवेश कहलाएँगी।
ऊष्मागतिकी में,
ब्रह्मांड = तंत्र + परिवेश
तंत्र और परिवेश को अलग करने वाली सतह को सीमा (Boundary) कहते हैं।
जब किसी तंत्र के सभी भौतिक गुण समय के साथ नहीं बदलते तब वह संतुलन अवस्था में होता है।
तापमान हर जगह समान हो।
दाब हर जगह समान हो।
कोई रासायनिक अभिक्रिया न हो।
यदि वस्तु A और वस्तु B अलग-अलग किसी तीसरी वस्तु C के साथ तापीय संतुलन में हैं, तो A और B भी आपस में तापीय संतुलन में होंगे।
किसी तंत्र की निश्चित स्थिति को अवस्था कहते हैं।
वे राशियाँ जो किसी तंत्र की अवस्था को व्यक्त करती हैं।
दाब, आयतन और तापमान के बीच संबंध बताने वाली समीकरण।
PV=nRTPV=nRT
जहाँ,
P = दाब
V = आयतन
n = मोल संख्या
R = सार्वत्रिक गैस नियतांक
T = परम ताप
जो केवल प्रारंभिक और अंतिम अवस्था पर निर्भर करते हैं।
उदाहरण:
जो अपनाए गए मार्ग पर निर्भर करते हैं।
उदाहरण:
किसी वस्तु की गर्माहट या ठंडक की माप तापमान कहलाती है।
K = °C + 273
केल्विन पैमाने पर मापा गया ताप।
0 K = -273.15°C
इस ताप पर अणुओं की गतिज ऊर्जा न्यूनतम होती है।
किसी पदार्थ के सभी अणुओं की कुल गतिज और स्थितिज ऊर्जा का योग आंतरिक ऊर्जा कहलाता है।
आदर्श गैस के लिए आंतरिक ऊर्जा केवल तापमान पर निर्भर करती है।
तापमान के अंतर के कारण ऊर्जा का स्थानांतरण ऊष्मा कहलाता है।
ऊष्मा का संचरण कणों के प्रत्यक्ष संपर्क द्वारा होता है।
द्रवों और गैसों में ऊष्मा का स्थानांतरण।
बिना किसी माध्यम के ऊष्मा का स्थानांतरण।
उदाहरण: सूर्य से पृथ्वी तक ऊष्मा का आना।
जब गैस फैलती या संकुचित होती है तो कार्य होता है।
गैस पिस्टन को बाहर धकेलती है।
बाहरी बल गैस को दबाता है।
यह ऊष्मागतिक प्रक्रियाओं का चित्रात्मक निरूपण है।
P-V ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = किया गया कार्य
किसी वस्तु का तापमान 1 K बढ़ाने हेतु आवश्यक ऊष्मा।
1 kg पदार्थ का तापमान 1 K बढ़ाने हेतु आवश्यक ऊष्मा।
Q = msΔT
1 मोल पदार्थ का तापमान 1 K बढ़ाने हेतु आवश्यक ऊष्मा।
CP−CV=RC_P-C_V=R
यह संबंध केवल आदर्श गैसों के लिए लागू होता है।
यह ऊर्जा संरक्षण का नियम है।
Q=ΔU+WQ=\Delta U+W
दी गई ऊष्मा का कुछ भाग आंतरिक ऊर्जा बढ़ाने में तथा शेष कार्य करने में खर्च होता है।
जब गैस बिना किसी बाहरी प्रतिरोध के फैलती है।
तापमान स्थिर रहता है।
PV=constantPV=\text{constant}
ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता।
PVγ=constantPV^{\gamma}=\text{constant}
दाब स्थिर रहता है।
उदाहरण: खुले बर्तन में पानी गर्म करना।
आयतन स्थिर रहता है।
उदाहरण: बंद कंटेनर में गैस गर्म करना।
यह एक सामान्य प्रक्रिया है।
PVⁿ = Constant
जिसे विपरीत दिशा में उसी मार्ग से वापस लाया जा सके।
जो वापस उसी मार्ग से न लाई जा सके।
यह ऊष्मा के प्रवाह की दिशा बताता है।
100% दक्षता वाला ऊष्मा इंजन संभव नहीं।
ऊष्मा स्वयं ठंडी वस्तु से गर्म वस्तु की ओर नहीं जा सकती।
किसी तंत्र की अव्यवस्था की माप एंट्रॉपी कहलाती है।
पृथक तंत्र में एंट्रॉपी सदैव बढ़ती है।
समान ताप स्रोतों के बीच कार्य करने वाला कोई भी इंजन कार्नो इंजन से अधिक दक्ष नहीं हो सकता।
चार प्रक्रियाओं से बना आदर्श चक्र।
सैद्धांतिक रूप से सर्वाधिक दक्ष ऊष्मा इंजन।
η = 1 – Tc/Th
ऊष्मा को यांत्रिक कार्य में परिवर्तित करने वाली मशीन।
दक्षता बताती है कि प्राप्त ऊष्मा का कितना भाग उपयोगी कार्य में परिवर्तित हुआ।
η = W/Qh
निम्न ताप से ऊष्मा लेकर उच्च ताप पर भेजता है।
ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम पर आधारित।
COP = Qc/W
COP जितना अधिक होगा, रेफ्रिजरेटर उतना ही अधिक प्रभावी होगा।
ठंडे स्थान से ऊष्मा लेकर गर्म स्थान तक पहुँचाता है।
ऐसा स्रोत या सिंक जिसका तापमान ऊष्मा देने या लेने पर भी लगभग स्थिर रहता है।
वह पदार्थ जो इंजन या रेफ्रिजरेटर के भीतर ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया में भाग लेता है।
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