Class 9 जीवविज्ञान Ch-3 जीवों में विविधता

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📅 31/05/2026

अध्याय 3 : जीवों में विविधता (Diversity in Living Organisms)

पृथ्वी पर करोड़ों प्रकार के जीव पाए जाते हैं। कुछ जीव सूक्ष्म होते हैं जिन्हें केवल सूक्ष्मदर्शी से देखा जा सकता है, जबकि कुछ जीव विशाल आकार के होते हैं। सभी जीवों की संरचना, भोजन प्राप्त करने की विधि, प्रजनन, आवास तथा जीवन-क्रियाएँ अलग-अलग होती हैं। जीवों की इसी भिन्नता को जैव विविधता (Biodiversity) कहा जाता है।

जैव विविधता (Biodiversity)

किसी क्षेत्र, देश या पूरे विश्व में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के जीवों की विविधता को जैव विविधता कहते हैं।

जैव विविधता के कारण

  • जलवायु में अंतर
  • भौगोलिक परिस्थितियाँ
  • आनुवंशिक भिन्नताएँ
  • विकासक्रम (Evolution)
  • पर्यावरणीय अनुकूलन

जैव विविधता का महत्व

  • पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखती है।
  • खाद्य श्रृंखला को स्थिर बनाती है।
  • औषधियाँ प्राप्त होती हैं।
  • कृषि उत्पादन में सहायता मिलती है।
  • पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखती है।

जैव विविधता के स्तर

1. आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity)

एक ही प्रजाति के जीवों में पाए जाने वाले आनुवंशिक अंतर को आनुवंशिक विविधता कहते हैं।

2. प्रजातीय विविधता (Species Diversity)

किसी क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न प्रजातियों की विविधता को प्रजातीय विविधता कहते हैं।

3. पारिस्थितिक विविधता (Ecological Diversity)

विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों की विविधता को पारिस्थितिक विविधता कहते हैं।

वर्गीकरण (Classification)

समान गुणों वाले जीवों को एक समूह में रखने तथा अलग गुणों वाले जीवों को अलग समूहों में रखने की प्रक्रिया वर्गीकरण कहलाती है।

वर्गीकरण की आवश्यकता

  • जीवों का अध्ययन आसान होता है।
  • पहचान में सुविधा होती है।
  • विकासीय संबंध समझ में आते हैं।
  • नई प्रजातियों का अध्ययन आसान होता है।
  • वैज्ञानिक नामकरण में सहायता मिलती है।

वर्गीकरण का इतिहास (History of Classification)

अरस्तू (Aristotle)

  • जीव विज्ञान के प्रारम्भिक वैज्ञानिकों में से एक थे।
  • सबसे पहले जीवों को पौधों और जन्तुओं में विभाजित किया।

थियोफ्रेस्टस (Theophrastus)

  • वनस्पति विज्ञान के जनक कहलाते हैं।
  • पौधों का प्रारम्भिक वर्गीकरण किया।

कैरोलस लिनियस (Carolus Linnaeus)

  • आधुनिक वर्गीकरण के जनक।
  • द्विपद नामकरण प्रणाली की शुरुआत की।

अर्न्स्ट हेकेल (Ernst Haeckel)

  • तीन-जगत वर्गीकरण दिया।
  • Protista जगत को जोड़ा।

आर. एच. व्हिटेकर (R. H. Whittaker)

  • 1969 में पंच-जगत वर्गीकरण प्रस्तुत किया।

कार्ल वूज (Carl Woese)

  • तीन डोमेन वर्गीकरण प्रणाली प्रस्तुत की।

वर्गीकरण के आधार

जीवों का वर्गीकरण निम्न आधारों पर किया जाता है।

कोशिका की संरचना

  • प्रोकैरियोटिक
  • यूकैरियोटिक

कोशिकाओं की संख्या

  • एककोशिकीय
  • बहुकोशिकीय

पोषण की विधि

  • स्वपोषी
  • परपोषी

शरीर संगठन

  • ऊतक
  • अंग
  • अंग तंत्र

प्रजनन

  • लैंगिक
  • अलैंगिक

विकासीय संबंध

  • समान पूर्वज
  • अनुकूलन

द्विपद नामकरण (Binomial Nomenclature)

प्रत्येक जीव का एक वैज्ञानिक नाम होता है जो दो शब्दों से मिलकर बना होता है।

उदाहरण:

  • Homo sapiens (मनुष्य)
  • Mangifera indica (आम)

द्विपद नामकरण के नियम

  • पहला शब्द वंश (Genus) का नाम होता है।
  • दूसरा शब्द जाति (Species) का नाम होता है।
  • वंश का पहला अक्षर बड़ा लिखा जाता है।
  • जाति का पहला अक्षर छोटा लिखा जाता है।
  • वैज्ञानिक नाम इटैलिक में लिखा जाता है।

पदानुक्रमिक वर्गीकरण (Hierarchical Classification)

Kingdom → Phylum/Division → Class → Order → Family → Genus → Species

जाति (Species)

वर्गीकरण की सबसे छोटी इकाई। समान लक्षणों वाले जीव जो आपस में प्रजनन कर सकते हैं, एक जाति के सदस्य कहलाते हैं।

वंश (Genus)

समान जातियों का समूह वंश कहलाता है।

कुल (Family)

समान वंशों के समूह को कुल कहते हैं।

गण (Order)

समान कुलों के समूह को गण कहते हैं।

वर्ग (Class)

समान गणों के समूह को वर्ग कहते हैं।

संघ (Phylum)

समान वर्गों के समूह को संघ कहते हैं।

जगत (Kingdom)

वर्गीकरण की सबसे बड़ी इकाई जगत कहलाती है।

पंच-जगत वर्गीकरण (Five Kingdom Classification)

आर. एच. व्हिटेकर ने जीवों को पाँच जगतों में विभाजित किया।

  1. मोनेरा
  2. प्रोटिस्टा
  3. कवक
  4. पादप
  5. जन्तु

मोनेरा जगत (Kingdom Monera)

विशेषताएँ

  • प्रोकैरियोटिक जीव
  • एककोशिकीय
  • वास्तविक केंद्रक का अभाव
  • कोशिका भित्ति उपस्थित

उदाहरण

  • जीवाणु (Bacteria)
  • सायनोबैक्टीरिया

मोनेरा के प्रमुख समूह

  • आर्कीबैक्टीरिया
  • यूबैक्टीरिया
  • सायनोबैक्टीरिया
  • माइकोप्लाज्मा

प्रोटिस्टा जगत (Kingdom Protista)

विशेषताएँ

  • यूकैरियोटिक
  • अधिकतर एककोशिकीय
  • जलीय वातावरण में पाए जाते हैं

उदाहरण

  • अमीबा
  • पैरामीशियम
  • यूग्लीना

कवक जगत (Kingdom Fungi)

विशेषताएँ

  • क्लोरोफिल का अभाव
  • परपोषी पोषण
  • बीजाणुओं द्वारा प्रजनन

उदाहरण

  • मशरूम
  • यीस्ट
  • राइजोपस

महत्व

  • अपघटक के रूप में कार्य
  • एंटीबायोटिक निर्माण
  • ब्रेड एवं शराब उद्योग में उपयोग

लाइकेन (Lichen)

शैवाल और कवक के सहजीवी संबंध को लाइकेन कहते हैं।

महत्व

  • वायु प्रदूषण के सूचक
  • चट्टानों के अपक्षय में सहायक

पादप जगत (Kingdom Plantae)

सामान्य विशेषताएँ

  • बहुकोशिकीय
  • स्वपोषी
  • क्लोरोफिल युक्त
  • कोशिका भित्ति उपस्थित

पादप जगत का वर्गीकरण

थैलोफाइटा (Thallophyta)

  • शरीर जड़, तना और पत्ती में विभाजित नहीं होता।
  • संवहनी ऊतक नहीं पाए जाते।

उदाहरण: स्पाइरोगाइरा, वॉल्वॉक्स

ब्रायोफाइटा (Bryophyta)

  • स्थल पर उगते हैं लेकिन प्रजनन के लिए जल आवश्यक होता है।
  • इन्हें पादप जगत के उभयचर कहा जाता है।

उदाहरण: मॉस, मार्चेन्टिया

टेरिडोफाइटा (Pteridophyta)

  • प्रथम संवहनी पौधे।
  • बीज नहीं बनते।

उदाहरण: फर्न, इक्विसेटम

जिम्नोस्पर्म (Gymnosperm)

  • नग्न बीज वाले पौधे।
  • फल नहीं बनते।

उदाहरण: पाइन, देवदार, साइकस

एंजियोस्पर्म (Angiosperm)

  • पुष्पीय पौधे।
  • बीज फल के भीतर सुरक्षित रहते हैं।

उदाहरण: आम, गुलाब, गेहूँ

एकबीजपत्री पौधे (Monocotyledons)

  • एक बीजपत्र
  • समानांतर शिराविन्यास
  • रेशेदार जड़

उदाहरण: धान, गेहूँ, मक्का

द्विबीजपत्री पौधे (Dicotyledons)

  • दो बीजपत्र
  • जालिकानुमा शिराविन्यास
  • मूसला जड़

उदाहरण: मटर, सरसों, चना

जन्तु जगत (Kingdom Animalia)

सामान्य विशेषताएँ

  • बहुकोशिकीय
  • परपोषी
  • कोशिका भित्ति अनुपस्थित
  • अधिकांश जीव गतिशील होते हैं

जन्तु जगत का वर्गीकरण

पोरिफेरा (Porifera)

  • शरीर में अनेक छिद्र होते हैं।
  • सबसे सरल बहुकोशिकीय जन्तु।

उदाहरण: स्पंज

निडेरिया (Cnidaria)

  • दंश कोशिकाएँ पाई जाती हैं।
  • जलीय जन्तु होते हैं।

उदाहरण: हाइड्रा, जेलीफिश

प्लेटीहेल्मिन्थीस (Platyhelminthes)

  • चपटे कृमि
  • द्विपार्श्व सममिति

उदाहरण: टेपवर्म

निमेटोडा (Nematoda)

  • गोल कृमि
  • परजीवी भी हो सकते हैं।

उदाहरण: एस्कैरिस

एनेलिडा (Annelida)

  • शरीर खंडों में विभाजित होता है।

उदाहरण: केंचुआ, जोंक

आर्थ्रोपोडा (Arthropoda)

  • संयुक्त पैर
  • सबसे बड़ा जन्तु संघ

उदाहरण: तिलचट्टा, मकड़ी, मधुमक्खी

मोलस्का (Mollusca)

  • मुलायम शरीर
  • कठोर कवच पाया जा सकता है।

उदाहरण: घोंघा, ऑक्टोपस

इकाइनोडर्मेटा (Echinodermata)

  • कांटेदार त्वचा
  • समुद्री जन्तु

उदाहरण: स्टारफिश

कशेरुकी जन्तु (Vertebrates)

प्रमुख विशेषताएँ

  • मेरुदण्ड उपस्थित
  • विकसित तंत्रिका तंत्र
  • विकसित परिसंचरण तंत्र

मछलियाँ (Pisces)

  • गलफड़ों द्वारा श्वसन
  • पंख उपस्थित

उदाहरण: रोहू, शार्क

उभयचर (Amphibia)

  • जल और स्थल दोनों में रहते हैं।

उदाहरण: मेंढक, टोड

सरीसृप (Reptilia)

  • शुष्क एवं शल्कयुक्त त्वचा

उदाहरण: साँप, मगरमच्छ

पक्षी (Aves)

  • शरीर पर पंख
  • अंडज

उदाहरण: कबूतर, मोर

स्तनधारी (Mammalia)

  • दुग्ध ग्रंथियाँ उपस्थित
  • शरीर पर बाल

उदाहरण: मनुष्य, गाय, कुत्ता, व्हेल

वायरस (Virus)

विशेषताएँ

  • कोशिकीय संरचना नहीं होती।
  • DNA या RNA में से कोई एक होता है।
  • जीवित कोशिका में ही सक्रिय रहते हैं।
  • अत्यंत सूक्ष्म होते हैं।

वायरस से होने वाले रोग

  • एड्स
  • पोलियो
  • डेंगू
  • कोविड-19
  • इन्फ्लुएंजा

जीवाश्म (Fossils)

प्राचीन जीवों के अवशेष, छाप या चिन्ह जो चट्टानों में सुरक्षित रह जाते हैं, जीवाश्म कहलाते हैं।

महत्व

  • विकासवाद का प्रमाण
  • विलुप्त जीवों की जानकारी
  • पृथ्वी के इतिहास का अध्ययन

अनुकूलन (Adaptation)

जीवों द्वारा अपने पर्यावरण के अनुसार विकसित विशेष लक्षणों को अनुकूलन कहते हैं।

उदाहरण

  • ऊँट की कूबड़
  • कैक्टस के काँटे
  • ध्रुवीय भालू के घने बाल

विकास एवं वर्गीकरण का संबंध

जीवों में जितनी अधिक समानताएँ होती हैं, उनका विकासीय संबंध उतना ही निकट माना जाता है। वर्गीकरण हमें जीवों के पूर्वजों और उनके विकासक्रम को समझने में सहायता करता है।

विकासवाद के प्रमुख प्रमाण

  • जीवाश्म
  • समजात अंग
  • अवशेषी अंग
  • भ्रूणीय अध्ययन
  • आणविक जीवविज्ञान

यह अध्याय जीवों की पहचान, वर्गीकरण, जैव विविधता, पादप एवं जन्तु जगत, वायरस, जीवाश्म तथा विकासवाद को समझने का आधार प्रदान करता है और जीव विज्ञान के अध्ययन की मजबूत नींव तैयार करता है।

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