Class 9 भूगोल Ch-3 जल निकासी तंत्र

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📅 02/06/2026

3. जल निकासी तंत्र (Drainage System)

1. जल निकासी तंत्र का अर्थ

पृथ्वी की सतह पर गिरने वाला वर्षा जल, हिमनदों का पिघला हुआ जल तथा अन्य स्रोतों से प्राप्त जल विभिन्न नदियों, नालों, झीलों और समुद्रों तक जिस प्राकृतिक व्यवस्था के माध्यम से पहुँचता है, उसे जल निकासी तंत्र (Drainage System) कहा जाता है।

सरल शब्दों में, किसी क्षेत्र का पूरा नदी-जाल (River Network) ही उसका जल निकासी तंत्र कहलाता है।

उदाहरण के लिए, गंगा नदी और उसकी सभी सहायक नदियाँ मिलकर गंगा का जल निकासी तंत्र बनाती हैं।

2. जल निकासी प्रतिरूप (Drainage Pattern)

नदियाँ किसी क्षेत्र में जिस विशेष आकृति या पैटर्न में बहती हैं उसे जल निकासी प्रतिरूप कहते हैं।

वृक्षाकार प्रतिरूप (Dendritic Pattern)

पेड़ की शाखाओं जैसा दिखाई देता है। यह सबसे सामान्य प्रतिरूप है और कठोर एवं समरूप चट्टानों वाले क्षेत्रों में मिलता है।

जालीदार प्रतिरूप (Trellis Pattern)

मुख्य नदी के साथ सहायक नदियाँ समकोण पर मिलती हैं। यह वलित पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाता है।

आयताकार प्रतिरूप (Rectangular Pattern)

चट्टानों में दरारों के कारण बनता है। इसमें नदियाँ समकोण पर मुड़ती हैं।

अरीय प्रतिरूप (Radial Pattern)

नदियाँ किसी ऊँचे पर्वत या गुंबदाकार स्थल से चारों दिशाओं में निकलती हैं। अमरकंटक क्षेत्र इसका उदाहरण है।

केन्द्राभिमुख प्रतिरूप (Centripetal Pattern)

नदियाँ किसी झील या अवसाद की ओर बहती हैं।

3. नदी प्रणाली (River System)

मुख्य नदी तथा उसकी सभी सहायक नदियों के समूह को नदी प्रणाली कहा जाता है।

नदी प्रणाली के मुख्य घटक हैं:

  • मुख्य नदी (Main River)
  • सहायक नदी (Tributary)
  • वितरिका (Distributary)
  • नदी बेसिन (River Basin)
  • जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area)

4. नदी का उद्गम (Source of River)

नदी जिस स्थान से निकलती है उसे उसका उद्गम कहते हैं।

नदियों का उद्गम विभिन्न स्थानों से हो सकता है।

हिमनदों से

गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियाँ हिमनदों से निकलती हैं।

झीलों से

कुछ नदियाँ झीलों से उत्पन्न होती हैं।

पर्वतीय झरनों से

कई छोटी नदियाँ पहाड़ी झरनों से निकलती हैं।

पठारों से

नर्मदा, सोन और महानदी जैसी नदियाँ पठारी क्षेत्रों से निकलती हैं।

5. नदी का प्रवाह (Course of River)

ऊपरी प्रवाह (Upper Course)

इस अवस्था में ढाल अधिक होती है। नदी तेज गति से बहती है और अपरदन अधिक करती है।

मुख्य स्थलाकृतियाँ:

  • जलप्रपात
  • गॉर्ज
  • V आकार की घाटियाँ

मध्य प्रवाह (Middle Course)

इस अवस्था में ढाल कम हो जाती है। नदी चौड़ी होने लगती है और पार्श्व अपरदन बढ़ जाता है।

मुख्य स्थलाकृतियाँ:

  • मेन्डर (Meanders)
  • नदी तट
  • बाढ़ मैदान

निचला प्रवाह (Lower Course)

इस अवस्था में नदी की गति धीमी हो जाती है और निक्षेपण अधिक होता है।

मुख्य स्थलाकृतियाँ:

  • डेल्टा
  • प्राकृतिक तटबंध
  • वितरिकाएँ

6. नदी का संगम (Confluence)

जहाँ दो या अधिक नदियाँ मिलती हैं उसे संगम कहते हैं।

उदाहरण: प्रयागराज में गंगा और यमुना का संगम।

7. सहायक नदी (Tributary)

जो छोटी नदियाँ मुख्य नदी में आकर मिलती हैं उन्हें सहायक नदियाँ कहते हैं।

उदाहरण:

  • यमुना
  • घाघरा
  • गंडक
  • कोसी

8. वितरिका (Distributary)

मुख्य नदी से निकलने वाली शाखाओं को वितरिका कहा जाता है।

ये मुख्यतः डेल्टा क्षेत्र में पाई जाती हैं।

9. नदी बेसिन (River Basin)

मुख्य नदी तथा उसकी सहायक नदियों द्वारा जल प्राप्त करने वाले सम्पूर्ण क्षेत्र को नदी बेसिन कहते हैं।

भारत के प्रमुख नदी बेसिन:

  • गंगा बेसिन
  • सिंधु बेसिन
  • ब्रह्मपुत्र बेसिन
  • गोदावरी बेसिन

10. जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area)

वह क्षेत्र जहाँ का वर्षा जल किसी विशेष नदी में जाकर मिलता है, जलग्रहण क्षेत्र कहलाता है।

11. जल विभाजक (Water Divide)

दो नदी बेसिनों को अलग करने वाली ऊँची भूमि को जल विभाजक कहते हैं।

उदाहरण: अम्बाला क्षेत्र गंगा और सिंधु नदी प्रणालियों को अलग करता है।

12. हिमालयी नदी प्रणाली

हिमालय पर्वत से निकलने वाली नदियों को हिमालयी नदियाँ कहते हैं।

प्रमुख हिमालयी नदियाँ:

  • सिंधु
  • गंगा
  • ब्रह्मपुत्र

हिमालयी नदियों की विशेषताएँ

  • बारहमासी होती हैं।
  • हिमनद एवं वर्षा दोनों से जल प्राप्त करती हैं।
  • लंबी दूरी तय करती हैं।
  • बड़े नदी बेसिन बनाती हैं।
  • विशाल बाढ़ मैदान बनाती हैं।
  • उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी लाती हैं।

13. सिंधु नदी प्रणाली

उद्गम

मानसरोवर झील के निकट तिब्बत से।

प्रमुख सहायक नदियाँ

  • झेलम
  • चिनाब
  • रावी
  • ब्यास
  • सतलुज

विशेषताएँ

  • भारत की प्रमुख नदी प्रणालियों में से एक।
  • सिंचाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।

14. गंगा नदी प्रणाली

गंगा का निर्माण

देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा के संगम से गंगा नदी का निर्माण होता है।

अलकनंदा की प्रमुख सहायक नदियाँ

  • धौलीगंगा
  • नंदाकिनी
  • पिंडर
  • मंदाकिनी

पंच प्रयाग

  • विष्णुप्रयाग
  • नंदप्रयाग
  • कर्णप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • देवप्रयाग

गंगा की प्रमुख सहायक नदियाँ

बाएँ किनारे की:

  • रामगंगा
  • गोमती
  • घाघरा
  • गंडक
  • कोसी
  • महानंदा

दाएँ किनारे की:

  • यमुना
  • सोन
  • पुनपुन

गंगा का महत्व

  • सिंचाई
  • कृषि
  • पेयजल
  • जल परिवहन
  • धार्मिक महत्व

15. यमुना नदी

उद्गम

यमुनोत्री हिमनद

प्रमुख सहायक नदियाँ

  • चंबल
  • बेतवा
  • केन
  • सिंध

महत्व

दिल्ली, आगरा और प्रयागराज जैसे शहरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण नदी है।

16. घाघरा नदी

यह तिब्बत से निकलती है, नेपाल से होकर भारत में प्रवेश करती है और गंगा की प्रमुख सहायक नदी है।

17. गंडक नदी

नेपाल हिमालय से निकलती है और बिहार में गंगा नदी से मिलती है। सिंचाई की दृष्टि से इसका विशेष महत्व है।

18. कोसी नदी

यह नदी बार-बार अपना मार्ग बदलती है और भीषण बाढ़ लाती है। इसी कारण इसे “बिहार का शोक” कहा जाता है।

19. सोन नदी

अमरकंटक पठार से निकलती है और गंगा की दाएँ किनारे की प्रमुख सहायक नदी है।

20. ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली

उद्गम

अंगसी हिमनद, तिब्बत

विभिन्न नाम

  • तिब्बत में – सांगपो
  • अरुणाचल प्रदेश में – दिहांग
  • असम में – ब्रह्मपुत्र

प्रमुख सहायक नदियाँ

  • लोहित
  • दिबांग
  • सुबनसिरी
  • मानस
  • तीस्ता

विशेषताएँ

  • अत्यधिक जलराशि
  • भारी बाढ़
  • चौड़ा नदी पाट
  • नदी द्वीपों का निर्माण

21. प्रायद्वीपीय नदी प्रणाली

दक्षिण भारत के पठारी भाग से निकलने वाली नदियों को प्रायद्वीपीय नदियाँ कहते हैं।

विशेषताएँ

  • प्राचीन नदियाँ हैं।
  • अधिकांश वर्षा पर निर्भर हैं।
  • अपेक्षाकृत छोटी हैं।
  • कम सहायक नदियाँ हैं।
  • कठोर चट्टानों पर बहती हैं।

22. पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ

ये नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं और बड़े डेल्टा बनाती हैं।

गोदावरी

  • दक्षिण गंगा कहलाती है।
  • सबसे लंबी प्रायद्वीपीय नदी है।

कृष्णा

  • महाराष्ट्र से निकलती है।
  • तुंगभद्रा इसकी प्रमुख सहायक नदी है।

कावेरी

  • कर्नाटक से निकलती है।
  • दक्षिण भारत की महत्वपूर्ण नदी है।

महानदी

  • छत्तीसगढ़ से निकलती है।
  • उड़ीसा में विशाल डेल्टा बनाती है।

23. पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ

ये नदियाँ अरब सागर में गिरती हैं और सामान्यतः मुहाना बनाती हैं।

नर्मदा

  • रिफ्ट घाटी में बहती है।
  • अरब सागर में गिरती है।

तापी

  • नर्मदा के समानांतर बहती है।
  • अरब सागर में मिलती है।

माही

  • राजस्थान और गुजरात से होकर बहती है।

साबरमती

  • राजस्थान से निकलकर गुजरात में बहती है।

लूनी

  • राजस्थान की प्रमुख अंतर्देशीय नदी है।

24. नदियों द्वारा निर्मित स्थलाकृतियाँ

अपरदनात्मक स्थलाकृतियाँ

  • गॉर्ज
  • कैनियन
  • V आकार की घाटी
  • जलप्रपात
  • पॉटहोल

निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियाँ

  • बाढ़ मैदान
  • मेन्डर
  • डेल्टा
  • प्राकृतिक तटबंध
  • ऑक्स-बो झील

25. डेल्टा (Delta)

जब नदी समुद्र में मिलने से पहले अपने द्वारा लाए गए अवसादों को जमा करती है तो त्रिभुजाकार भू-भाग का निर्माण होता है जिसे डेल्टा कहते हैं।

उदाहरण: सुंदरबन डेल्टा

26. मुहाना (Estuary)

जहाँ नदी सीधे समुद्र में मिलती है और डेल्टा का निर्माण नहीं करती, वहाँ मुहाना बनता है।

उदाहरण:

  • नर्मदा
  • तापी

27. झीलें (Lakes)

स्थल भाग में चारों ओर से घिरा हुआ जलाशय झील कहलाता है।

प्राकृतिक झीलें

प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा निर्मित झीलें।

उदाहरण:

  • वुलर झील
  • डल झील
  • चिल्का झील
  • लोकटक झील

कृत्रिम झीलें

मानव द्वारा निर्मित झीलें।

उदाहरण:

  • गोविंद सागर
  • नागार्जुन सागर
  • इंदिरा सागर

मीठे पानी की झीलें

  • वुलर
  • डल
  • लोकटक

खारे पानी की झीलें

  • चिल्का
  • सांभर

28. नदी प्रदूषण के कारण

  • घरेलू अपशिष्ट
  • औद्योगिक कचरा
  • कृषि रसायन
  • प्लास्टिक प्रदूषण
  • धार्मिक गतिविधियाँ
  • शहरीकरण
  • वनों की कटाई

29. नदी प्रदूषण के प्रभाव

  • जल की गुणवत्ता में कमी
  • जलीय जीवों की मृत्यु
  • जलजनित रोगों में वृद्धि
  • पेयजल संकट
  • जैव विविधता का ह्रास

30. नदी संरक्षण के उपाय

  • अपशिष्ट जल का शोधन
  • औद्योगिक कचरे पर नियंत्रण
  • वृक्षारोपण
  • प्लास्टिक पर रोक
  • जन-जागरूकता
  • वर्षा जल संचयन
  • नदी तट संरक्षण

31. जल निकासी तंत्र का महत्व

कृषि में महत्व

नदियाँ सिंचाई का प्रमुख स्रोत हैं और कृषि उत्पादन बढ़ाने में सहायता करती हैं।

पेयजल में महत्व

देश की बड़ी आबादी नदियों और झीलों के जल पर निर्भर करती है।

उद्योगों में महत्व

अनेक उद्योगों को जल की आवश्यकता होती है, जो नदियों से प्राप्त होता है।

जलविद्युत उत्पादन में महत्व

बाँधों और नदी घाटी परियोजनाओं के माध्यम से बिजली उत्पन्न की जाती है।

परिवहन में महत्व

कई नदियाँ अंतर्देशीय जल परिवहन का साधन प्रदान करती हैं।

मत्स्य पालन में महत्व

नदियाँ और झीलें मत्स्य पालन तथा रोजगार का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

पर्यावरणीय महत्व

नदियाँ पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

सांस्कृतिक महत्व

भारत की अधिकांश प्राचीन सभ्यताएँ नदियों के किनारे विकसित हुई हैं और आज भी नदियाँ भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

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